Kanpur: ‘मौत के साए से पुरवामीर मुक्त’, सात डंपर क्रोमियम कचरा हटा, ग्रामीणों ने ली चैन की सांस, जारी है सफाई
Kanpur News: महाराजपुर क्षेत्र स्थित पुरवामीर गांव से महीनों बाद जहरीला क्रोमियम कचरा हटाए जाने का सिलसिला तेज होने से ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है। गुरुवार तक गांव से कुल 23 डंफर कचरा उठाया जा चुका है। इस जहरीले कचरे के कारण जहां एक तरफ किसानों के मवेशी गंभीर चर्म रोग का शिकार हो रहे थे।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
कानपुर में महाराजपुर के पुरवामीर में महीनों से पड़े जहरीले क्रोमियम कचरे के हटने से ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है। हालांकि, विभाग की कार्रवाई अभी भी सुस्त बनी हुई है। गुरुवार को गांव से करीब सात डंपर कचरा हटाया गया है। अब तक कुल 23 डंफर कचरा ले जाया गया है, जिसमें राजेश पाल के खेत के पास से एक डंपर, जयनारायण गुप्ता के खेत से 11 डंपर, अपोलो महुआगांव मोड़ से दो डंफर और साइन सिटी के पास से दस डंपर कचरा उठाया गया है।
धीरे-धीरे ही सही, लेकिन कचरा हटने से खेतों और रास्तों पर फैली बदबू और खतरे से कुछ हद तक निजात मिली है। ग्रामीण मंगली कुमार ने बताया कि वह किसान हैं। जब शुरुआत में यह कचरा डाला गया था तब उनकी दो भैंसें गलती से उसी पानी में घुस गई थीं। कुछ ही दिन में उनकी खाल छूटने लगी और पूरे शरीर पर चर्म रोग जैसे निशान पड़ गए। करीब पांच हजार रुपये की दवाइयों से इलाज कराने के बाद पंद्रह दिन में भैंसें ठीक हुईं, लेकिन निशान आज भी मौजूद हैं।
एक डंपर कचरे के निस्तारण में 70 से 80 हजार रुपये का आता है खर्च
वहीं, किसान बकरीदी ने बताया कि कचरे की वजह से कई महीनों तक उन्होंने बकरियों को बांधकर रखा, खुले में छोड़ने की हिम्मत नहीं हुई। अब कचरा हटने से उम्मीद है कि बारिश में जगह धुल जाएगी और बीमारियों से भी बचाव होगा। मौके पर मौजूद अधिकारियों ने बताया कि एक डंपर कचरे के निस्तारण में करीब सत्तर से अस्सी हजार रुपये का खर्च आता है।
दोबारा इस तरह कचरा डालने की घटना नहीं होगी
12 रुपये प्रति किलो के हिसाब से इसका वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण कराया जाता है। ज्यादा खर्च से बचने के लिए ही डंफर और फैक्ट्री संचालक चोरी-छिपे गांव के बाहर और हाईवे किनारे कचरा फेंककर चले जाते थे। अधिकारियों का कहना है कि अब ग्रामीण जागरूक हो गए हैं, इसलिए उम्मीद है कि दोबारा इस तरह कचरा डालने की घटना नहीं होगी।