Kanpur: पहली बार विवि के किसी कुलपति की सीबीआई जांच, प्रो. पाठक के कार्यकाल में लिए गए फैसलों पर उठ रहे सवाल
29 अक्तूबर को आगरा विश्वविद्यालय में भ्रष्टाचार के आरोप में मुकदमा दर्ज होने के बाद से कुलपति के खिलाफ लगातार नए-नए आरोप लग रहे हैं। प्रो. पाठक ने विवि में चार्ज लेते ही सबसे पहले सुरक्षा के लिए नई प्राइवेट एजेंसी तैनात की जबकि विवि में होमगार्ड की सुरक्षा थी। मामले में कुलपति पर कमीशन लेने का आरोप लगा।
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कानपुर में छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। विवि के इतिहास में यह पहली बार हुआ है जब किसी कुलपति के खिलाफ सीबीआई जांच की संस्तुति की गई है। सीबीआई के मुकदमा दर्ज होते ही विरोध के स्वर और तेज हो गए। पिछले दो महीने से गायब चल रहे कुलपति के विवि के कार्यकाल पर भी सवाल उठ रहे हैं।
29 अक्तूबर को आगरा विश्वविद्यालय में भ्रष्टाचार के आरोप में मुकदमा दर्ज होने के बाद से कुलपति के खिलाफ लगातार नए-नए आरोप लग रहे हैं। प्रो. पाठक ने विवि में चार्ज लेते ही सबसे पहले सुरक्षा के लिए नई प्राइवेट एजेंसी तैनात की जबकि विवि में होमगार्ड की सुरक्षा थी। मामले में कुलपति पर कमीशन लेने का आरोप लगा। फिर कैफेटेरिया को सुव्यवस्थित करने के लिए टेंडर बदला और कानपुर के एक बड़े व्यापारी व सत्ता पक्ष के एक व्यापारी को जिम्मेदारी दे दी।
इसमें भी कमीशन का आरोप लगा। नियुक्तियों को लेकर भी उन पर आरोप लगे हैं। कई साल से पढ़ा रहे शिक्षकों को उन्होंने बाहर का रास्ता दिखाया। उन पर भवनों को जबरन तोड़कर सुंदरीकरण करवाने का भी आरोप लगा।
ये भी लगे आरोप
छात्रों की समस्या के समाधान का हवाला देकर विवि में प्रो. पाठक ने पीएमयू सेल का गठन किया था। आरोप है कि सेल का गठन प्रो. पाठक ने अपने लोगों की नियुक्ति के लिए किश्स था। इसमें प्राइवेट कर्मचारी उच्च वेतन पर रखे गए। इसके अलावा बिना नियम संकायों को स्कूल में परिवर्तित करने और बिना योग्यता हेड बनाने का आरोप भी है। प्रमोशन में गड़बड़ी करने का आरोप भी कर्मचारी लगा रहे हैं।