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कानपुर: मेट्रो का विकास पॉलिटेक्निक छात्रों पर पड़ न जाए भारी, हॉस्टल, लैबें, स्टाफ क्वार्टर सब ध्वस्त

Sun, 13 Jun 2021 03:54 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा दिव्यांश सिंह, अमर उजाला, कानपुर
दिव्यांश सिंह, अमर उजाला, कानपुर Published by: प्रभापुंज मिश्रा Updated Sun, 13 Jun 2021 03:54 PM IST
सार

डिपो बनाने के लिए मेट्रो ने हॉस्टल, लैबें, स्टाफ क्वार्टर आदि ध्वस्त करा दिए हैं। ऐसे में इन्फ्रास्ट्रक्चर कम होने पर ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजुकेशन (एआईसीटीई) सीटों में कटौती कर सकता है।

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Kanpur: Development of metro should not be heavy on polytechnic students, hostels, labs, staff quarters all demolished
मेट्रो डिपो बनाने के लिए हॉस्टल, लैबें, स्टाफ क्वार्टर ध्वस्त किए - फोटो : amar ujala

विस्तार

कानपुर राजकीय पॉलिटेक्निक परिसर में बन रहा मेट्रो डिपो संस्थान की सीटों में कटौती करवा सकता है। चूंकि डिपो बनाने के लिए मेट्रो ने हॉस्टल, लैबें, स्टाफ क्वार्टर आदि ध्वस्त करा दिए हैं। ऐसे में इन्फ्रास्ट्रक्चर कम होने पर ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजुकेशन (एआईसीटीई) सीटों में कटौती कर सकता है।
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इससे सबसे बड़ा नुकसान छात्रों को होगा क्योंकि सरकारी पॉलिटेक्निक में सीटें कम होने पर उन्हें निजी पॉलिटेक्निक में दाखिला लेना होगा और ज्यादा फीस भरनी पड़ेगी। संस्थान परिसर की 16.2 हेक्टेयर जमीन मेट्रो को डिपो बनाने के लिए दी गई है। 12 सितंबर 2019 को लखनऊ में प्रमुख सचिव प्राविधिक शिक्षा की अध्यक्षता में निदेशक प्राविधिक शिक्षा और मेट्रो के अधिकारियों के बीच हुई बैठक में ध्वस्तीकरण के बाद 18 महीने में स्टाफ क्वार्टर और गर्ल्स हॉस्टल को बनाने पर सहमति हुई थी।
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मेट्रो ने आईटी, सीएस और इन्सट्रूमेंटेशन एंड कंट्रोल विभाग के भवनों और लैबों के साथ दो महिला और पांच पुरुष छात्रावास को ध्वस्त कर दिया है। 21 महीने बीत चुके हैं पर अभी तक लैब तक नहीं बनाई जा सकी हैं। ऐसे में एआईसीटीई के मानकों के अनुसार संस्थान में छात्र क्षमता और पाठ्यक्रमों की तुलना में भवनों, लैबों और छात्रावास की संख्या में कमी हो गई है।
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फिलहाल प्रशासनिक भवन की कक्षाओं में कुछ लैब संचालित की जा रही हैं। कुछ लैबों को यूपीएमआरसी ने अन्य पुराने भवनों में सुसज्जित करके समायोजित कर दिया है। छात्राओं को संस्थान स्तर पर निजी छात्रावास को उपलब्ध करा दिया गया है, लेकिन छात्रों को भटकना पड़ रहा है। (संवाद)

 

बिजली-पानी का भी संकट  
मेट्रो डिपो निर्माण के दौरान संस्थान बिजली, पानी और
इंटरनेट की लाइन कई बार टूट चुकी है। इस समय टेक्सटाइल और केमिस्ट्री विभाग में पानी का संकट है। ऐसे में ऑफलाइन कक्षाएं शुरू होने पर छात्रों को दिक्कत होगी। इतना ही नहीं जल निकासी की व्यवस्थाएं बंद हो गई हैं। ऐसे में हल्की बारिश के बाद परिसर तालाब सा दिखता है। 

भवनों, लैबों और छात्रावास के निर्माण के लिए मेट्रो के एमडी को पत्र लिखा है। अधिकारियों संग कई बार बैठक करके समस्याएं बताई जा चुकी हैं। एआईसीटीई के मानकों को हर हाल में पूरा करना होगा, नहीं तो सीटें कम हो जाएंगी।
मुकेश चंद्र आनंद, प्रधानाचार्य, राजकीय पॉलिटेक्निक

लैब बनाकर दे दी गई हैं। कोरोना की वजह से डिजाइन अप्रूव होने कुछ लेटलतीफी हुई है, जल्द निर्माण शुरू हो जाएगा। 
पंचानन मिश्रा, उप महाप्रबंधक, जनसंपर्क विभाग, यूपीएमआरसी 

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