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तीसरी लहर... तैयारी बेअसर: चौबेपुर में चिकित्सा व्यवस्था भगवान भरोसे, डॉक्टर कोविड ड्यूटी पर, पीएचसी बना तबेला
Sun, 30 May 2021 03:02 PM IST
शिखा पांडेय
शैलेश शुक्ल, अमर उजाला, कानपुर
शैलेश शुक्ल, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Sun, 30 May 2021 03:02 PM IST
सार
कोरोना की तीसरी लहर की चुनौतियों के बीच चौबेपुर क्षेत्र के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की व्यवस्था ही भगवान भरोसे है। यहां पीएचसी तबेला बना हुआ है।
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राजारामपुर पीएचसी परिसर में बंधे पालतू पशु
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
कानपुर के चौबेपुर ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं के आधार माने जाने वाले पीएचसी (प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र) को ही इलाज की दरकार है। कोरोना महामारी के दौर में ये न किसी काम आए और न ही यह उम्मीद है कि तीसरी लहर से निपटने में इनकी कोई खास भूमिका होगी।
चौबेपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) से संबद्ध पीएचसी राजारामपुर, बंसठी और तरी पाठकपुर का हाल कुछ ऐसा ही है। दो पीएचसी में तैनात डॉक्टर कोविड ड्यूटी पर हैं तो तरी पाठकपुर की प्रभारी महिला चिकित्सक के आने का कोई समय ही नहीं तय है।
इससे इलाज का जिम्मा फार्मासिस्ट और वार्ड ब्वॉय पर है। वह भी अपनी सुविधा के अनुसार सेवाएं दे रहे हैँ। इन अव्यवस्थाओं के बीच राजारामपुर पीएचसी का हाल देखकर आप भी दंग रह जाएंगे। जर्जर हो चुके पीएचसी परिसर में पशु भी भी बांधे जा रहे हैं।
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खंडहर जैसा पीएचसी और डॉक्टर भी नहीं आ रहे
राजारामपुर पीएचसी में दो चिकित्सकों डॉ. दीपक कुमार और डॉ. राजीव शुक्ला की तैनाती है। लेकिन, लंबे समय से इनमें से एक भी चिकित्सक पीएचसी में नहीं बैठे। दरअसल, डॉ. दीपक की ड्यूटी चौबेपुर स्थित अस्थायी कारागार में लगी है, जबकि डॉ. राजीव नगर निगम स्थित कोविड कमांड सेंटर में तैनात हैं।
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चौबेपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) से संबद्ध पीएचसी राजारामपुर, बंसठी और तरी पाठकपुर का हाल कुछ ऐसा ही है। दो पीएचसी में तैनात डॉक्टर कोविड ड्यूटी पर हैं तो तरी पाठकपुर की प्रभारी महिला चिकित्सक के आने का कोई समय ही नहीं तय है।
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इससे इलाज का जिम्मा फार्मासिस्ट और वार्ड ब्वॉय पर है। वह भी अपनी सुविधा के अनुसार सेवाएं दे रहे हैँ। इन अव्यवस्थाओं के बीच राजारामपुर पीएचसी का हाल देखकर आप भी दंग रह जाएंगे। जर्जर हो चुके पीएचसी परिसर में पशु भी भी बांधे जा रहे हैं।
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खंडहर जैसा पीएचसी और डॉक्टर भी नहीं आ रहे
राजारामपुर पीएचसी में दो चिकित्सकों डॉ. दीपक कुमार और डॉ. राजीव शुक्ला की तैनाती है। लेकिन, लंबे समय से इनमें से एक भी चिकित्सक पीएचसी में नहीं बैठे। दरअसल, डॉ. दीपक की ड्यूटी चौबेपुर स्थित अस्थायी कारागार में लगी है, जबकि डॉ. राजीव नगर निगम स्थित कोविड कमांड सेंटर में तैनात हैं।
गांव के सुधीर दीक्षित, देवशरण तिवारी, दिनेश शर्मा, रामसेवक सैनी, धीरज शुक्ला, भगवानदीन और अशोक कुमार आदि ने बताया कि अस्पताल फार्मासिस्ट प्रताप सिंह के आने पर कभी-कभार ही खुलता है। ऐसे में बुखार, खांसी, जुकाम, दस्त समेत अन्य सामान्य बीमारियों के मरीजों को चौबेपुर जाना पड़ता है।
बताया कि अस्पताल परिसर में बने आवास अब खंडहर में तब्दील हो रहे हैं। खिड़की-दरवाजे तक चोरी हो गए। पानी की टंकी वर्षों पहले टूटकर गिर चुकी है। रात में यहां कोई भी स्वास्थ्यकर्मी नहीं रुकता। खस्ताहाल आवास में अवकाश प्राप्त चौकीदार मुंशीलाल ही परिवार के साथ रहता है। वह अपने पशुओं को भी इसी परिसर के अंदर बांधता है। इससे यह अस्पताल कम तबेला ज्यादा लगता है।
तरीपाठकपुर में डॉक्टर के आने का समय ही नहीं
गंगा किनारे के दो दर्जन से अधिक गांवों के लोगों को प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया कराने के लिए संचालित तरी पाठकपुर पीएचसी में तो चिकित्सक के आनेजाने का कोई समय ही नहीं है। गांव के नवनिर्वाचित प्रधान शिवराज सिंह सहित ग्रामीण बृजकिशोर शुक्ला, राजेश पाल, कल्लू, जगदीश और प्रवेश सिंह आदि ने बताया कि अस्पताल की प्रभारी डॉ. प्रियंका कटियार शहर से आती हैं। यहां ओपीडी का समय सुबह आठ से दोपहर दो बजे तक है, पर उनके आनेजाने का समय निर्धारित नहीं है। इस दौरान अस्पताल केवल फार्मासिस्ट अजय श्रीवास्तव के सहारे रहता है। बताया कि रात के समय तो यहां वार्ड ब्वाय सालिगराम तक नहीं रुकता। ऐसे में मरीजों को निजी अस्पतालों का ही सहारा है। ग्राम प्रधान का आरोप है कि प्रभारी चिकित्सक इसकी भी जानकारी नहीं दे रहीं कि अब तक कितना टीकाकरण हुआ है।
बताया कि अस्पताल परिसर में बने आवास अब खंडहर में तब्दील हो रहे हैं। खिड़की-दरवाजे तक चोरी हो गए। पानी की टंकी वर्षों पहले टूटकर गिर चुकी है। रात में यहां कोई भी स्वास्थ्यकर्मी नहीं रुकता। खस्ताहाल आवास में अवकाश प्राप्त चौकीदार मुंशीलाल ही परिवार के साथ रहता है। वह अपने पशुओं को भी इसी परिसर के अंदर बांधता है। इससे यह अस्पताल कम तबेला ज्यादा लगता है।
तरीपाठकपुर में डॉक्टर के आने का समय ही नहीं
गंगा किनारे के दो दर्जन से अधिक गांवों के लोगों को प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया कराने के लिए संचालित तरी पाठकपुर पीएचसी में तो चिकित्सक के आनेजाने का कोई समय ही नहीं है। गांव के नवनिर्वाचित प्रधान शिवराज सिंह सहित ग्रामीण बृजकिशोर शुक्ला, राजेश पाल, कल्लू, जगदीश और प्रवेश सिंह आदि ने बताया कि अस्पताल की प्रभारी डॉ. प्रियंका कटियार शहर से आती हैं। यहां ओपीडी का समय सुबह आठ से दोपहर दो बजे तक है, पर उनके आनेजाने का समय निर्धारित नहीं है। इस दौरान अस्पताल केवल फार्मासिस्ट अजय श्रीवास्तव के सहारे रहता है। बताया कि रात के समय तो यहां वार्ड ब्वाय सालिगराम तक नहीं रुकता। ऐसे में मरीजों को निजी अस्पतालों का ही सहारा है। ग्राम प्रधान का आरोप है कि प्रभारी चिकित्सक इसकी भी जानकारी नहीं दे रहीं कि अब तक कितना टीकाकरण हुआ है।
बंसठी में स्टाफ भरपूर, पर इलाज नहीं
बेला मार्ग से जुड़े नहर किनारे के 50 गांवों के लोग चिकित्सीय सेवाओं के लिए बंसठी पीएचसी पर निर्भर हैं। यहां प्रभारी डॉ. विपुल चतुर्वेदी, फार्मासिस्ट संजय कुमार, वार्ड ब्वॉय रामअंजोर, नर्सिंग स्टाफ अनुज और दो एएनएम सीमा चौधरी व मोनी राजपूत की तैनाती है।
गांव के पूर्व प्रधान मनीष त्रिपाठी, श्याम बाबू, मोहम्मद अरमान, महेश सविता, शिवम आदि ने बताया कि आवास होने के बाद भी रात के समय अस्पताल में चिकित्सक, फार्मासिस्ट या अन्य स्वास्थ्य कर्मी कभी नहीं ठहरते। यहां छोटी-मोटी बीमारी हो या झगड़ा-मारपीट में घायल लोगों को प्राथमिक इलाज भी नहीं मिल पाता। ऐसे में लोगों को चौबेपुर स्थिति सीएचसी या फिर निजी अस्पतालों का सहारा लेना पड़ता है। बताया गया कि बंसठी पीएचसी में तैनात डॉ. विपुल चतुर्वेदी की ड्यूटी काफी समय से रामा कोविड अस्पताल में लगी थी, जिससे दिक्कत रही।
बेला मार्ग से जुड़े नहर किनारे के 50 गांवों के लोग चिकित्सीय सेवाओं के लिए बंसठी पीएचसी पर निर्भर हैं। यहां प्रभारी डॉ. विपुल चतुर्वेदी, फार्मासिस्ट संजय कुमार, वार्ड ब्वॉय रामअंजोर, नर्सिंग स्टाफ अनुज और दो एएनएम सीमा चौधरी व मोनी राजपूत की तैनाती है।
गांव के पूर्व प्रधान मनीष त्रिपाठी, श्याम बाबू, मोहम्मद अरमान, महेश सविता, शिवम आदि ने बताया कि आवास होने के बाद भी रात के समय अस्पताल में चिकित्सक, फार्मासिस्ट या अन्य स्वास्थ्य कर्मी कभी नहीं ठहरते। यहां छोटी-मोटी बीमारी हो या झगड़ा-मारपीट में घायल लोगों को प्राथमिक इलाज भी नहीं मिल पाता। ऐसे में लोगों को चौबेपुर स्थिति सीएचसी या फिर निजी अस्पतालों का सहारा लेना पड़ता है। बताया गया कि बंसठी पीएचसी में तैनात डॉ. विपुल चतुर्वेदी की ड्यूटी काफी समय से रामा कोविड अस्पताल में लगी थी, जिससे दिक्कत रही।
चौबेपुर सीएचसी से संबद्ध पीएचसी राजारामपुर में तैनात चिकित्सकों की ड्यूटी कोविड -19 इमरजेंसी के चलते दूसरे स्थानों पर है। बंसठी पीएचसी में तैनात चिकित्सक अब कोविड अस्पताल की इमरजेंसी ड्यूटी से लौट आए हैं। इसलिए यहां नियमित रूप से टीकाकरण शुरू हो चुका है। तरी पाठकपुर पीएचसी में भी टीकाकरण चल रहा है। 84 दिनों की बाध्यता के चलते टीकाकरण नियमित रूप से नहीं हो पा रहा है। - डॉ. यशोवर्द्धन सिंह, अधीक्षक, सीएचसी चौबेपुर