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मशहूर बिजनेसमैन का ‘कारनामा’ देख आयकर अफसर हैरान, अब मिला 2 करोड़ कैश, 3 किलो सोना
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
Updated Sun, 17 Dec 2017 09:00 AM IST
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कान्हा होटल ग्रुप और ट्रांसपोर्ट के नौ ठिकानों पर तीसरे दिन भी जारी रही जांच
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कान्हा होटल ग्रुप और ट्रांसपोर्ट सर्विस संचालक राजिंदर सिंह छाबड़ा और उनके भाई गुरदीप सिंह छाबड़ा के ठिकानों से अब तक दो करोड़ रुपये कैश की बरामदगी हो चुकी है। तीसरे दिन तीन किलो सोना और भारी भरकम ज्वैलरी भी मिली है। इसके अलावा कई शहरों में 20 से ज्यादा अचल संपत्तियां सामने आ चुकी हैं। कानपुर में छाबड़ा बंधुओं की संपत्तियों के मामले में मजबूत लिखा पढ़ी से आयकर अफसर भी हैरान हैं। जांच खत्म होने के बजाय बढ़ती जा रही है।
छाबड़ा बंधुओं के यहां आयकर अफसरों ने गुरुवार को सुबह नौ बजे छापा मारा था। बीते 60 घंटों से यहां 30 से ज्यादा अफसरों की टीम गहन छानबीन कर रही है। विभागीय सूत्र बताते हैं कि शहर में यह पहला मौका है जब किसी व्यवसायी के सभी परिसरों में लगातार इतने समय तक जांच जारी रही है। आम तौर पर अफसर कई परिसरों में जांच शुरू तो करते हैं लेकिन दो दिन में दस्तावेज लेकर उन्हें छोड़ देते हैं। किसी एक परिसर को कंट्रोल रूम बनाकर वहीं से जांच जारी रखते हैं। सूत्र बताते हैं कि छाबड़ा बंधुओं ने अपनी संपत्तियों के कागजात तो दुरुस्त रखें हैं ताकि प्रथम दृष्टया वे सही लगें लेकिन उनमें भारी गड़बड़ियां हैं। अफसरों ने ऐसे सभी दस्तावेजों को जब्त कर लिया है।
दो भाइयों के बीच 450 ट्रक
छाबड़ा बंधु शहर में आमतौर पर अपने होटल व्यवसाय की वजह से जाने जाते हैं, लेकिन आयकर छापे में चौकाने वाला सच सामने आया। दोनों भाइयों के नाम 450 से ज्यादा ट्रक हैं। गुरदीप सिंह के नाम 250 और राजिंदर छाबड़ा के नाम 200 ट्रक। राजिंदर (छाबड़ा) बस सर्विस के अधीन तीन फर्में काम कर रही हैं। इनमें कान्हा कार्गो मूवर्स, प्रशांत रोड लाइंस और छाबड़ा कैरियर्स शामिल हैं। इनके ट्रांसपोर्ट व्यवसाय में पहली बार आयकर का छापा पड़ा है। बताते हैं कि इससे पहले किसी किसी दूसरे टैक्स डिपार्टमेंट ने भी यहां दखल देने की हिम्मत नहीं जुटाई। आयकर अफसर ट्रकों में बेनामी संपत्ति और काले धन के निवेश की संभावना तलाश रहे हैं।
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यहां चल रही है जांच
जीटी रोड पर कोकाकोला चौराहे के पास स्थित होटल कान्हा गैलेक्सी, कान्हा कान्टीनेंटल और कान्हा इंटरनेशनल होटल, राजिंदर सिंह छाबड़ा के मॉडल टाउन स्थित आवास, उनके भाई गुरदीप सिंह के गुमटी स्थित घर और जीटी रोड पर बने दो ऑफिस, राजिंदर (छाबड़ा) बस सर्विस के कोकाकोला चौराहा स्थित ऑफिस, जीटी रोड पर ही आरबीएस मोटरसाइकिल के शोरूम।
करोड़ों की संपत्तियां कौड़ियों में दिखाई
कान्हा होटल ग्रुप और ट्रांसपोर्ट सर्विस संचालक राजिंदर सिंह छाबड़ा और उनके भाई गुरदीप सिंह छाबड़ा ने अचल संपत्तियों के जरिए अकूत दौलत बनाई है। आयकर विभाग के छापे में इनकी 20 से अधिक बेशकीमती अचल संपत्तियों का पता चला है। खास बात यह है कि कागजों में इन संपत्तियों की कीमत कौड़ियों के भाव दर्शायी गई है। आयकर अफसरों ने इसे कालेधन को ठिकाने लगाने का ‘कारनामा’ माना है। इस खेल के पीछे इनके सीए का दिमाग बताया जा रहा है।
विभागीय सूत्र बताते हैं कि छाबड़ा बंधुओं की कानपुर में ही 10 से अधिक संपत्तियां हैं। इनमें कीमती मकान, फ्लैट और प्लाट शामिल हैं। तीन बेशकीमती फ्लैट तो कंपनी बाग चौराहे के पास शहर के सबसे महंगे अपार्टमेंट एमरॉल्ड में ही हैं। हालांकि दस्तावेजों में इनकी कीमत ऐसी दर्शायी गई हैं जैसे किसी गली मोहल्ले के फ्लैट की कीमत हो। मसलन यहां के एक फ्लैट की कीमत करीब 40 लाख रुपये दर्शायी गई है, जबकि सभी जानते हैं कि एमरॉल्ड में डेढ़ करोड़ से नीचे का कोई फ्लैट है ही नहीं। यही वजह है कि एक दिन में खत्म होने वाला छापा तीसरे दिन भी जारी रहा। इसी तरह दोनों भाइयों के कीमती फ्लैट लखनऊ, आगरा, गाजियाबाद, नोएडा, दिल्ली में भी हैं। हर जगह यही खेल सामने आ रहा है। इसी वजह से व्यवसायी की संपत्तियों की जांच बेनामी संपत्ति अनुभाग करेगा। आयकर अफसरों का मानना है कि अभी तक की जांच में जिस तरह से संपत्तियों का पता चला है, वैसे ही लॉकर खुलने पर भी प्रॉपर्टी के कागजात मिल सकते हैं। लॉकर खुलने के बाद ही जांच को अंतिम रूप मिलेगा।
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छाबड़ा बंधुओं के यहां आयकर अफसरों ने गुरुवार को सुबह नौ बजे छापा मारा था। बीते 60 घंटों से यहां 30 से ज्यादा अफसरों की टीम गहन छानबीन कर रही है। विभागीय सूत्र बताते हैं कि शहर में यह पहला मौका है जब किसी व्यवसायी के सभी परिसरों में लगातार इतने समय तक जांच जारी रही है। आम तौर पर अफसर कई परिसरों में जांच शुरू तो करते हैं लेकिन दो दिन में दस्तावेज लेकर उन्हें छोड़ देते हैं। किसी एक परिसर को कंट्रोल रूम बनाकर वहीं से जांच जारी रखते हैं। सूत्र बताते हैं कि छाबड़ा बंधुओं ने अपनी संपत्तियों के कागजात तो दुरुस्त रखें हैं ताकि प्रथम दृष्टया वे सही लगें लेकिन उनमें भारी गड़बड़ियां हैं। अफसरों ने ऐसे सभी दस्तावेजों को जब्त कर लिया है।
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दो भाइयों के बीच 450 ट्रक
छाबड़ा बंधु शहर में आमतौर पर अपने होटल व्यवसाय की वजह से जाने जाते हैं, लेकिन आयकर छापे में चौकाने वाला सच सामने आया। दोनों भाइयों के नाम 450 से ज्यादा ट्रक हैं। गुरदीप सिंह के नाम 250 और राजिंदर छाबड़ा के नाम 200 ट्रक। राजिंदर (छाबड़ा) बस सर्विस के अधीन तीन फर्में काम कर रही हैं। इनमें कान्हा कार्गो मूवर्स, प्रशांत रोड लाइंस और छाबड़ा कैरियर्स शामिल हैं। इनके ट्रांसपोर्ट व्यवसाय में पहली बार आयकर का छापा पड़ा है। बताते हैं कि इससे पहले किसी किसी दूसरे टैक्स डिपार्टमेंट ने भी यहां दखल देने की हिम्मत नहीं जुटाई। आयकर अफसर ट्रकों में बेनामी संपत्ति और काले धन के निवेश की संभावना तलाश रहे हैं।
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यहां चल रही है जांच
जीटी रोड पर कोकाकोला चौराहे के पास स्थित होटल कान्हा गैलेक्सी, कान्हा कान्टीनेंटल और कान्हा इंटरनेशनल होटल, राजिंदर सिंह छाबड़ा के मॉडल टाउन स्थित आवास, उनके भाई गुरदीप सिंह के गुमटी स्थित घर और जीटी रोड पर बने दो ऑफिस, राजिंदर (छाबड़ा) बस सर्विस के कोकाकोला चौराहा स्थित ऑफिस, जीटी रोड पर ही आरबीएस मोटरसाइकिल के शोरूम।
करोड़ों की संपत्तियां कौड़ियों में दिखाई
कान्हा होटल ग्रुप और ट्रांसपोर्ट सर्विस संचालक राजिंदर सिंह छाबड़ा और उनके भाई गुरदीप सिंह छाबड़ा ने अचल संपत्तियों के जरिए अकूत दौलत बनाई है। आयकर विभाग के छापे में इनकी 20 से अधिक बेशकीमती अचल संपत्तियों का पता चला है। खास बात यह है कि कागजों में इन संपत्तियों की कीमत कौड़ियों के भाव दर्शायी गई है। आयकर अफसरों ने इसे कालेधन को ठिकाने लगाने का ‘कारनामा’ माना है। इस खेल के पीछे इनके सीए का दिमाग बताया जा रहा है।
विभागीय सूत्र बताते हैं कि छाबड़ा बंधुओं की कानपुर में ही 10 से अधिक संपत्तियां हैं। इनमें कीमती मकान, फ्लैट और प्लाट शामिल हैं। तीन बेशकीमती फ्लैट तो कंपनी बाग चौराहे के पास शहर के सबसे महंगे अपार्टमेंट एमरॉल्ड में ही हैं। हालांकि दस्तावेजों में इनकी कीमत ऐसी दर्शायी गई हैं जैसे किसी गली मोहल्ले के फ्लैट की कीमत हो। मसलन यहां के एक फ्लैट की कीमत करीब 40 लाख रुपये दर्शायी गई है, जबकि सभी जानते हैं कि एमरॉल्ड में डेढ़ करोड़ से नीचे का कोई फ्लैट है ही नहीं। यही वजह है कि एक दिन में खत्म होने वाला छापा तीसरे दिन भी जारी रहा। इसी तरह दोनों भाइयों के कीमती फ्लैट लखनऊ, आगरा, गाजियाबाद, नोएडा, दिल्ली में भी हैं। हर जगह यही खेल सामने आ रहा है। इसी वजह से व्यवसायी की संपत्तियों की जांच बेनामी संपत्ति अनुभाग करेगा। आयकर अफसरों का मानना है कि अभी तक की जांच में जिस तरह से संपत्तियों का पता चला है, वैसे ही लॉकर खुलने पर भी प्रॉपर्टी के कागजात मिल सकते हैं। लॉकर खुलने के बाद ही जांच को अंतिम रूप मिलेगा।