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मूंग, मसूर से बढ़ेगी दलहन की पैदावार

Thu, 21 Apr 2016 01:15 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Updated Thu, 21 Apr 2016 01:15 AM IST
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Mung, lentil yields grow pulses
मुक्तसर की अनाजमंडी में चारपाई की छांव में बैठ खाना खाता किसान। - फोटो : अमर उजाला
कानपुर। दलहनी फसलों की पैदावार बढ़ाने के उद्देश्य से चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के विज्ञानियों ने मूंग, जौ और मसूर की नई प्रजातियां विकसित की हैं। इनकी बुआई कानपुर नगर और बुंदेलखंड सहित यूपी के सभी जिलोें में की जा सकेगी। ये नई प्रजातियां रोग रोधी हैं। इनसे उत्पादन बढ़ने की उम्मीद है। 
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राज्य बीज उप समिति की 30वीं मीटिंग 18 अप्रैल को लखनऊ में हुई थी। इसमें कानपुर कृषि विश्वविद्यालय की अलग-अलग बीजों की प्रजातियां रिलीज की गईं। मीडिया प्रभारी डॉ. वेद रतन तिवारी ने बताया कि डॉ. मनोज कटियार ने मूंग और मसूर की तीन नई प्रजातियां विकसित की हैं। डॉ. पीके गुप्ता ने जौ की प्रखर (के-1055) प्रजाति विकसित की। इसकी बुआई ऊसर जमीन पर भी की जा सकती है। प्रति हेक्टेयर में 51 क्विंटल पैदावार प्राप्त की जा सकती है। सामान्य पैदावार 38 क्विंटल है। यूपी के सभी जिलों में इसकी बुआई की सिफारिश की गई है। डॉ. नलिनी तिवारी ने अलसी की उमा (एलसीके-1101) और इंदू (एलसीके-1108) बीज की प्रजाति विकसित की है। इनकी बुआई बुंदेलखंड में भी की जा सकती है। फसल 130 से 140 दिन में पक जाएगी।  
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दलहन की नई प्रजातियां
d    मसूर की शेखर-5 (केएलएस-122) की बुआई दिसंबर में होगी। यूपी के सभी जिलों में बुआई की संस्तुति की गई है। यह प्रजाति रोग रोधी है। उकठा और रतुआ रोग नहीं लगेंगे। 110 दिन में अच्छी उपज प्राप्त की जा सकेगी। 
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d    मूंग की अरुण (केएम 2328) प्रजाति की बुआई भी यूपी के सभी जिलोें में की 
जा सकेगी। इसका दाना हरा और मध्यम साइज का चमकीला होता है। 60 से 
62 दिन की अवधि मेें पूरी फसल एक साथ पकती है। प्रति हेक्टेयर में 11 से 12 क्विंटल की पैदावार प्राप्त की जा सकती है। प्रजाति रोग रोधी है। बुआई गर्मी 

में होगी। 
d    मसूर की शेखर-6 (केएलएस-112) की बुआई विशेष करके बुंदेलखंड में होगी। 123-125 दिन में पकने वाली इस फसल के दाने बड़े होंगे। इसका इस्तेमाल दालमोठ के रूप में किया जा सकेगा। प्रति हेक्टेयर में 16 से 18 क्विंटल की पैदावार प्राप्त की जा सकेगी। प्रजाति रोग रोधी है। 
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