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घटने के बजाय बढ़ गया गंगा में प्रदूषण, यहां पाए गए सामान्य से 94 हजार गुना अधिक हानिकारक बैक्टीरिया
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Updated Sat, 21 Jul 2018 07:49 PM IST
सार
- नालों, सीवर से अभी भी पहुंच रहा प्रदूषित पानी और कचरा
- प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ताजा रिपोर्ट से हुआ खुलासा
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यूपी के कानपुर में गंगा के पानी में सामान्य से 94 हजार गुना अधिक हानिकारक कालीफार्म बैक्टीरिया पाए गए हैं। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ताजा रिपोर्ट के अनुसार उसमें गंगा में सीवर और नालों के पानी से होने वाले हानिकारक बैक्टीरिया की संख्या में मात्र तीन प्रतिशत की कमी आई है। प्रति मिलीमीटर पानी में कालीफार्म बैक्टीरिया की मात्रा जीरो होनी चाहिए लेकिन यह 94 हजार पाई गई है।
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गंगा को प्रदूषण मुक्त करने को लेकर प्रदेश सरकार की तरफ से से पिछले एक साल से जो कवायद की जा रही है, उसका नाम मात्र का असर हो पाया है। ऐसे में दिसंबर तक गंगा को प्रदूषण मुुक्त करने का मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का संकल्प कितना सफल होगा, इसमें संदेह हो रहा है। गंगा में गिरने वाले सबसे बड़े नाले सीसामऊ नाले को गंगा में गिरने से रोकने का कार्य शुरू हो गया है। अभी तक आधा कार्य ही हो पाया है।
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गंगा में गिरने वाले 31 बड़े नाले और सीवर हैं, जिनसे करोड़ों लीटर प्रदूषित पानी और कचरा गंगा में जा रहा है। इससे बड़ी संख्या में हानिकारक बैक्टीरिया पैदा हो रहे हैं। बोर्ड की तरफ से जारी रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कालीफार्म बैक्टीरिया युक्त पानी पीने से सीधा असर आंत पर पड़ता है। यदि लगातार यह पानी पिया जाए तो आंतें खराब हो सकती हैं।
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भैरवघाट से सिद्घनाथ घाट के बीच कालीफार्म की मात्रा प्रति मिमी में
2016 में- 120000, बिठूर में- 4900
2017 में- 130000, बिठूर में- 4900
2018 में- 94000 , बिठूर में- 4600
2016 में- 120000, बिठूर में- 4900
2017 में- 130000, बिठूर में- 4900
2018 में- 94000 , बिठूर में- 4600
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नवाबगंज से जाजमऊ तक गंगा में गिर रहे नाले
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वर्तमान समय में नवाबगंज से जाजमऊ के बीच स्थित नाले और सीवर सीधे में गंगा में गिर रहे हैं। इन नालों के जरिए रोजाना गंगा में करीब 5 करोड़ लीटर से अधिकत प्रदूषित पानी गिर रहा है। करीब एक साल पहले इन सभी को टैप करने का निर्देश जारी हुआ था। अभी तक इसमें सिर्फ तीन नालों (जेल नाला, सरसैया घाट नाला और भगवतदास घाट नाला) को ही टैप करने में सफलता मिल पाई है। बाकी से कचरा अभी भी सीधे गंगा में जा रहा है। नवाबगंज से जाजमऊ के बीच स्थिति 15 ऐसे बड़े नाले हैं, जिन्हें गंगा में सीधे गिरते हुए देखा भी जा सकता है।