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आयकर के रडार पर 35 रियल इस्टेट कंपनियां
ब्यूरो, अमर उजाला कानपुर
Updated Mon, 08 Dec 2014 02:32 AM IST
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काले धन को लेकर लगातार हो रहे खुलासों को देखते हुए आयकर विभाग ने कानपुर समेत देश की 35 रियल इस्टेट सेक्टर कंपनियों को निशाने पर लिया है। इस संबंध में केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) के निदेशक (जांच) ने सभी प्रिंसिपल चीफ कमिश्नर और महानिदेशक (जांच) को इन कंपनियों की जांच के लिए पत्र लिखा है। इसके साथ ही हाल ही में हुए एक स्टिंग ऑपरेशन का पूरा ब्यौरा भी दिया है।
बीते पांच साल में सिविल लाइंस स्थित आयकर निदेशालय से लगभग सभी प्रमुख बिल्डरों के यहां छापेमारी की कार्रवाई हुई है। इन सभी जगहों पर मिले कागजात और रिकॉर्ड देखने से साफ है कि रियल इस्टेट के धंधे में दो नंबर की रकम का भरपूर इस्तेमाल किया जा रहा है। 26 नवंबर को एक स्टिंग ऑपरेशन में दिखाया गया था कि किस तरह से रियल इस्टेट के धंधे में दो नंबर की रकम का लेन-देन हो रहा है। बिल्डर सीधे तौर पर 10 फीसदी से 90 फीसदी तक रकम को नकद में लेकर फ्लैट बेचने को तैयार हैं। यही नहीं बड़ा सौदा करने पर किसी एनबीएफसी से दो नंबर की रकम को एक नंबर करवाने तक की बात तय कर रहे हैं। इस स्टिंग ऑपरेशन को आयकर विभाग ने गंभीरता से लिया है। सीबीडीटी के निदेशक (जांच) के. रवि रामाचंद्रन ने नौ राज्यों के प्रिंसिपल चीफ कमिश्नर और महानिदेशक (जांच) को पत्र लिखकर सभी 35 रियल इस्टेट कंपनियों की जांच-पड़ताल करके 15 दिसंबर तक रिपोर्ट मुख्यालय को भेजने के निर्देश दिए हैं। इसमें नकदी के लेनदेन के अलावा यह भी देखा जाएगा कि निवेश के लिए दूसरे देशों में भी कंपनियों ने हवाला के जरिए कोई रकम ली है। साथ ही अफसर इस बात की भी जांच करेंगे कि क्या बिल्डर भुगतान की राशि घटाने और स्टांप ड्यूटी चोरी करने के मकसद से फ्लैट की कीमत कम करके ले रहे हैं। तमाम बैंक खातों और बेनामी कंपनियों द्वारा भी काले धन को सफेद करने की बात इस अभियान के दौरान देखी जाएगी। यह भी कहा गया है कि यदि इन 35 नामों के विरुद्ध यदि बीते तीन वर्ष में कोई कार्रवाई की गई है तो इन बिंदुओं पर दोबारा जांच के लिए फाइल खोली जाएगी।
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बीते पांच साल में सिविल लाइंस स्थित आयकर निदेशालय से लगभग सभी प्रमुख बिल्डरों के यहां छापेमारी की कार्रवाई हुई है। इन सभी जगहों पर मिले कागजात और रिकॉर्ड देखने से साफ है कि रियल इस्टेट के धंधे में दो नंबर की रकम का भरपूर इस्तेमाल किया जा रहा है। 26 नवंबर को एक स्टिंग ऑपरेशन में दिखाया गया था कि किस तरह से रियल इस्टेट के धंधे में दो नंबर की रकम का लेन-देन हो रहा है। बिल्डर सीधे तौर पर 10 फीसदी से 90 फीसदी तक रकम को नकद में लेकर फ्लैट बेचने को तैयार हैं। यही नहीं बड़ा सौदा करने पर किसी एनबीएफसी से दो नंबर की रकम को एक नंबर करवाने तक की बात तय कर रहे हैं। इस स्टिंग ऑपरेशन को आयकर विभाग ने गंभीरता से लिया है। सीबीडीटी के निदेशक (जांच) के. रवि रामाचंद्रन ने नौ राज्यों के प्रिंसिपल चीफ कमिश्नर और महानिदेशक (जांच) को पत्र लिखकर सभी 35 रियल इस्टेट कंपनियों की जांच-पड़ताल करके 15 दिसंबर तक रिपोर्ट मुख्यालय को भेजने के निर्देश दिए हैं। इसमें नकदी के लेनदेन के अलावा यह भी देखा जाएगा कि निवेश के लिए दूसरे देशों में भी कंपनियों ने हवाला के जरिए कोई रकम ली है। साथ ही अफसर इस बात की भी जांच करेंगे कि क्या बिल्डर भुगतान की राशि घटाने और स्टांप ड्यूटी चोरी करने के मकसद से फ्लैट की कीमत कम करके ले रहे हैं। तमाम बैंक खातों और बेनामी कंपनियों द्वारा भी काले धन को सफेद करने की बात इस अभियान के दौरान देखी जाएगी। यह भी कहा गया है कि यदि इन 35 नामों के विरुद्ध यदि बीते तीन वर्ष में कोई कार्रवाई की गई है तो इन बिंदुओं पर दोबारा जांच के लिए फाइल खोली जाएगी।
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