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भ्रष्टाचार की लीलाः आयकर के शिकंजे से फिर बच गए बैंक अफसर, किस्सा केशव लाल के 11 करोड़ से जुड़ा
Thu, 09 May 2019 07:44 PM IST
प्रशांत कुमार
प्रदीप अवस्थी, अमर उजाला, कानपुर
प्रदीप अवस्थी, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रशांत कुमार
Updated Thu, 09 May 2019 07:44 PM IST
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आयकर के शिकंजे से फिर बच गए बैंक अफसर
नोटबंदी के दौरान जब लोग हजार, दो हजार रुपये के लिए तरस रहे थे, तब स्टेट जीएसटी के तत्कालीन एडिशनल कमिश्नर केशव लाल के 11 करोड़ रुपये बैंकों में बदले गए। यह बात भला आयकर विभाग से बेहतर कौन जान सकता है। बावजूद इसके विभाग बैंक अफसरों पर शिकंजा कसने में नाकाम रहा है। केशव लाल के यहां छापा मुख्य निदेशक आशु जैन के समय पड़ा था लेकिन जांच प्रधान निदेशक अमरेंद्र कुमार के समय में भी जारी थी। उन्होंने बैंक अफसरों का पर्दाफाश करने का दावा भी किया था।
स्टेट जीएसटी के पूर्व एडिशनल कमिश्नर केशव लाल के घर से मिली 11 करोड़ रुपये की नकदी के मामले में आधा दर्जन से अधिक बैंकों का फंसना तय था। पूछताछ में केशव लाल ने कुछ बैंकों के नाम भी लिए थे, जहां से उन्होंने अपने गुर्गों के जरिये नोट बदलवाए, लेकिन बाद में पता नहीं क्या हुआ कि एक भी बैंक जांच के दायरे में नहीं आया।
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स्टेट जीएसटी के पूर्व एडिशनल कमिश्नर केशव लाल के घर से मिली 11 करोड़ रुपये की नकदी के मामले में आधा दर्जन से अधिक बैंकों का फंसना तय था। पूछताछ में केशव लाल ने कुछ बैंकों के नाम भी लिए थे, जहां से उन्होंने अपने गुर्गों के जरिये नोट बदलवाए, लेकिन बाद में पता नहीं क्या हुआ कि एक भी बैंक जांच के दायरे में नहीं आया।
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जवाब देने से अधिकतर अफसर बच रहे हैं
हालांकि विभाग ने केशव लाल के घर से मिले नोटों का ब्योरा तैयार कर एक रिपोर्ट रिजर्व बैंक भेजी थी। रिजर्व बैंक को करेंसी में दर्ज सीरियल नंबर भेजकर यह जानकारी मांगी गई थी कि यह किस बैंक से जारी हुए। रिजर्व बैंक के पास बैंकों को भेजी गई करेंसी का डाटा उपलब्ध रहता है।
रिजर्व बैंक ने आयकर विभाग की रिपोर्ट को गंभीरता से नहीं लिया और न कोई जवाब दिया। आयकर अफसरों ने दो रिमाइंडर भेजे, फिर मामला ठंडे बस्ते में चला गया। कुल मिलाकर आयकर अफसरों ने बैंकों की भूमिका की पड़ताल में लचर रुख अपनाया।
अब इसका जवाब देने से अधिकतर अफसर बच रहे हैं। सभी का कहना है कि इसका जवाब प्रधान निदेशक देंगे। प्रधान निदेशक अमरेंद्र कुमार से इस संबंध में सवाल जवाब के लिए समय मांगा लेकिन उनका पक्ष नहीं आ सका। वे जब भी अपनी बात कहेंगे, उसे भी विधिवत छापेंगे।
रिजर्व बैंक ने आयकर विभाग की रिपोर्ट को गंभीरता से नहीं लिया और न कोई जवाब दिया। आयकर अफसरों ने दो रिमाइंडर भेजे, फिर मामला ठंडे बस्ते में चला गया। कुल मिलाकर आयकर अफसरों ने बैंकों की भूमिका की पड़ताल में लचर रुख अपनाया।
अब इसका जवाब देने से अधिकतर अफसर बच रहे हैं। सभी का कहना है कि इसका जवाब प्रधान निदेशक देंगे। प्रधान निदेशक अमरेंद्र कुमार से इस संबंध में सवाल जवाब के लिए समय मांगा लेकिन उनका पक्ष नहीं आ सका। वे जब भी अपनी बात कहेंगे, उसे भी विधिवत छापेंगे।