सामान्य से तीन गुना मैली हो चुकी है गंगा
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बोर्ड के अनुसार इसकी वजह टेनरियों से निकलने वाला कचरा है, जो बिना ट्रीटमेंट के गंगा में जा रहा है। पिछले काफी समय से टेनरियों के लिए अलग त्रिस्तरीय ट्रीटमेंट प्लांट लगाने की बात कही जा रही है।
गंगा में इतनी तेजी से बढ़े हानिकारक तत्वों की वजह कानपुर में आकर इसमें मिलने वाली दूसरी नदियां भी हैं। इसमें काली नदी और पांडु नदी प्रमुख हैं। काली नदी मेरठ, बुलंदशहर, अलीगढ़ होते हुए यहां आती है। जबकि पांडु नदी शहर के बीच से होकर केमिकल युक्त हानिकारक कचरा लेकर गंगा में मिलती है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी मोहम्मद सिकंदर का कहना है कि हानिकारक तत्वों की मात्रा बढ़ने से पानी का प्रयोग नुकसानदायक हो जाता है।
बीओडी : पानी के हानिकारक तत्वों को मापने की इकाई है। इसका मतलब पानी में हानिकारक बैक्टीरिया की मात्रा बढ़ रही है। 30 बीओडी की मात्रा सामान्य मानी जाती है।
300 सीओडी (केमिकल आक्सीजन डिमांड) : यह गंगा में घुलने वाले हानिकारक तत्वों की मात्रा है। इस स्तर पर गंगा में रहने वाले जंतुओं को सांस लेने में दिक्कत होने लगती है। यदि कोई व्यक्ति उसमें खड़ा होता है तो उसकी त्वचा को नुकसान भी पहुंच सकता है। 250 सीओडी सामान्य मात्रा होती है।
- वर्तमान में 90 बीओडी के करीब है हानिकारक तत्वों की मात्रा
- 30 बीओडी की मात्रा सामान्य मानी जाती है
- कुछ समय पहले तक 100 बीओडी थी मात्रा