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बीघापुर की काली मिट्टी से तैयार होगी ग्रीनपार्क की पिच: तेज गेंदबाजों को मिलेगी मदद, नए सिरे से उगेगी घास

Fri, 24 Sep 2021 08:42 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: प्रभापुंज मिश्रा Updated Fri, 24 Sep 2021 08:42 PM IST
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Green Park pitch will be prepared from the black soil of Bighapur
ग्रीनपार्क स्टेडियम कानपुर - फोटो : अमर उजाला
उन्नाव के बीघापुर की काली मिट्टी से ग्रीनपार्क की पिच को फाइनल टच दिया जाएगा। इस मिट्टी के कई फायदे होते हैं। इसका क्ले कंटेंट हाई होता है। लाल मिट्टी के मुकाबले काली मिट्टी की पिच अलग होती है।
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लाल मिट्टी की पिच स्पिनरों के लिए मददगार साबित होती है। वहीं, काली मिट्टी की पिच तेज गेंदबाजों के लिए फायदेमंद होती है। इस पिच पर गेंद काफी बाउंस करती है। पिच क्यूरेटर शिव कुमार ने बताया कि काली मिट्टी से टॉप ड्रेसिंग का काम किया जाएगा।  
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मैदान को खूबसूरत बनाने के लिए पिच क्यूरेटर शिव कुमार अपनी टीम के साथ जुट गए है। आउट सीजन में पिच पर काफी काम किया जा चुका है, जिसका खिलाड़ियों को फायदा मिलेगा। शिव कुमार ने बताया कि आउट फील्ड से काम शुरू हो गया है। मैदान की पूरी घास काटी जाएगी, इसके बाद खरपतवार ट्रीटमेंट करेंगे।
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फिर घास की डेवलपमेंट पर काम किया जाएगा। मैदान कर्मी कई ग्रुपों में अलग-अलग घास पर काम कर रहे हैं। आउट सीजन में इस बार काफी समय मिला है जिसके चलते पिच पर काफी काम किया गया है। पिछले सीजन में बारिश का पानी मैदान में भर गया था। जिसके चलते ड्रेनेज सिस्टम का भी काम पूरा कर लिया गया है। अब अधिक बारिश होने पर भी मैदान में पानी नहीं रुकेगा।

बालू डालकर बनाया गया मैदान
पूरे मैदान को सेंड बेेस (बालू आधारित) कर दिया गया है। इससे बारिश का पानी मैदान में न रुकता है और न कीचड़ होता है। इसमें खिलाड़ियों को दौड़ने में भी आसानी रहती है। ज्यादा बारिश के कारण मैदान में खिलाड़ियों को दौड़ने में दिक्कत होती है।


मगर मैदान बालू डालकर मैदान बनाने से इसमें पानी जल्द सूखता है और खिलाड़ी चोटिल होने से बचते हैं। इसके साथ ही मैदान में सूखी घास व जंगली घास को खोद कर हटाया जा रहा है। उसकी जगह पर नई घास लगाई जाएगी।
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