जानें ‘हाईटेक’ बदमाशों से आखिर क्यों डरती है पुलिस
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महिला थाना फतेहगढ़, मऊदरवाजा, नवाबगंज, कमालगंज, शमसाबाद, राजेपुर, मेरापुर, अमृतपुर, कंपिल, जहानगंज के अलावा चार कोतवालियां कायमगंज, फतेहगढ़, मोहम्मदाबाद और फर्रुखाबाद हैं। इन कोतवाली और थानों में सुरक्षा व्यवस्था के लिए ब्रिटिश जमाने की थ्रीनाटथ्री की 369 राइफलें हैं। वर्तनमान में इन राइफलों की हालत ठीक नहीं है। इन्हीं राइफलों के सहारे पुलिस जनता की सुरक्षा व्यवस्था करती है। देखरेख के लिए कोई बजट भी नहीं, इसीलिए पुलिस भी राइफलों की देखरेख में अनदेखी बरतती है। बदमाशों से लोहा लेने में भी सिपाही घबराते हैं। हैरत की बात तो यह है कि आधुनिक दौर में जहां बदमाश हाईटेक असलहे लेकर घटनाएं करते हैं। वहीं पुलिस महकमा ब्रिटिश जमाने की खस्ताहाल राइफलों से ही सुरक्षा करने को मजबूर है। पुलिस के पास आधुनिक हथियारों में एसएलआर 350, एनसास, 380 और एके-47 भी मौजूद हैं लेकिन यह हथियार थाना प्रभारियों के हमराहों के पास ही रहती हैं। गश्त पर जाने वाले सिपाही, पिकेट ड्यूटी और पहरा ड्यूटी पर तैनात सिपाही ब्रिटिश जमाने की राइफलों से ही सुरक्षा करने को मजबूर हैं। प्रभारी आर्मोरर ज्ञानेंद्र दीक्षित ने कहा कि प्रस्ताव मंजूर होने पर थ्रीनाटथ्री की जगह आधुनिक असलहों से सिपाही लैस होंगे। राइफलों की देखभाल का कोई बजट शासन से नहीं मिलता है। सिर्फ साफ-सफाई के लिए कलपुर्जे और तेल मिलता है।
इन घटनाओं में ब्रिटिश राइफलें दे गईं दगा
केस-1
13 अगस्त 2016 को फर्रुखाबाद कोतवाली में दो संप्रदायों के बीच जमकर ईंट-पत्थर और फायरिंग हुई थी। उपद्रवियों को खदेड़ने के दौरान पहरा ड्यूटी पर तैनात सिपाहियों ने जैसे ही अपनी थ्रीनाटथ्री राइफल को लोड करने का प्रयास किया तो वह दगा दे गई।
केस-2
10 साल पहले आतंक का पर्याय रहे दस्यु कलुआ से पुलिस की मुठभेड़ कंपिल थाना क्षेत्र के गांव कारव की कटरी में हुई। इस मुठभेड़ में सिपाहियों की थ्रीनाटथ्री की राइफलें दगा दे गईं थीं। सिपाहियों ने जैसे-तैसे अपनी जान बचाई। दस्यु कलुआ अपने गिरोह के साथ सकुशल भाग गया था।