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केडीए मेहरबान तो हवा में मकान
ब्यूरो, अमर उजाला कानपुर
Updated Sat, 20 Dec 2014 03:12 AM IST
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‘हमें मालूम है जन्नत की हकीकत, दिल खुश रखने को गालिब ये ख्याल अच्छा है।’ पहले 12 बड़ी आवासीय योजनाएं लांच करके शहरियों को ‘बाबा जी का ठुल्लू’ थमाने वाला केडीए अब नया ढोल पीट रहा है, 64 हजार समाजवादी आवास बनाने का।
पुरानी योजनाओं के लिए न जमीन है, न अधिग्रहण, न मुआवजे पर सहमति और अब 64 हजार समाजवादी आवास की ताल ठोंकी जा रही है।
गुरुवार को ही मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने समाजवादी आवास का आदेश दिया है और शुक्रवार को इसके लिए केडीए उपाध्यक्ष ने बैठक कर चारों जोनों में 20 - 20 हेक्टेयर ग्राम समाज की जमीन चिह्नित करने के लिए जोनल टीमें गठित कर दी।
सभी टीमों से तीन दिन में रिपोर्ट मांगी गई है। कागजों पर रिपोर्ट भी आ जाएगी लेकिन पुरानी योजनाओं में पैसा फंसाने वाले लोग पूछ रहे हैं हमारी बारी कब आएगी।
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मुख्यमंत्री ने 18 दिसंबर को लखनऊ में सभी विकास प्राधिकरणों के उपाध्यक्षों की बैठक में समाजवादी आवास योजना के तहत सूबे के विभिन्न शहरों में तीन लाख आवास बनाने के निर्देश दिए।
हालांकि अभी तक प्राधिकरण वार आवासों का लक्ष्य निर्धारित नहीं किया गया है। यह योजना जनवरी में लांच होनी है। शुक्रवार को केडीए उपाध्यक्ष जयश्री भोज ने चारों जोनों के तहसीलदारों, सहायक नगर नियोजकों (एटीपी) और अधिशासी अभियंताओं की बैठक की।
बैठक में चारों जोनों के चार टीमें बनाई गईं। प्रत्येक टीम में उसी जोन का तहसीलदार, एटीपी और अधिशाषी अभियंता को शामिल किया गया है। टीमों ने भी तेजी दिखाते हुए छतमरा, तौधकपुर में ग्राम समाज की जमीन देखी।
जवाहरपुरम (आईआईटी के पीछे) में पांच हजार आवास बनाने का खाका भी तय हो गया।
‘अपने घर’ का सपना कब होगा अपना
12 बड़ी आवासीय योजनाएं लांच करके शहरियों को केडीए ने जो ‘अपने घर’ का सपना दिखाया था वो सपना ही रह गया। हकीकत यह है कि अभी तक इनके लिए जमीन ही नहीं मिली है।
इस कारण तमाम योजनाएं रद्द की जा रही हैं, जिसकी जानकारी पब्लिक को नहीं है। योजनाओं के लिए पैसा भी जमा कराया जा चुका है। अब सवाल यह है कि शहरवासियों का पैसा वापस किया जाएगा या फिर उन्हें दूसरी जगह जमीन दी जाएगी।
इस पर केडीए चुप्पी साधे है। केडीए ने वर्ष 1996, 2005, 2010, 2012 और 2013 में 12 आवासीय योजनाएं लांच कीं। इन पर काम भी शुरू हुआ, जो अभी तक पूरा नहीं हो सका है।
नया अध्यादेश आने के बाद जमीन अधिग्रहण महंगा हो गया है। अब किसानों से सीधे जमीन खरीदने में फायदा है। केडीए ने कुछ योजनाओं के भूमि अधिग्रहण का प्रस्ताव टाल दिया है।
कुछ मामले हाईकोर्ट के विचाराधीन और कुछ मामलों में मुआवजे पर किसानों से सहमति नहीं बन सकी है। इसका सीधा प्रभाव केडीए की 12 योजनाओं पर आया है।
ओके सिंह, एडीएम भूमि अध्याप्ति
नई भूमि अधिग्रहण नीति आनी थी। इसलिए मामले ऐसे लटके थे। नई आवास नीति इसी महीने में आई है। अपर जिलाधिकारी (भूमि अध्याप्ति) के पास शासनादेश आ गया है। अब भूमि अधिग्रहण के नए मामले जल्द निस्तारित हो जाएंगे।
जगदीश, सचिव, केडीए
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पुरानी योजनाओं के लिए न जमीन है, न अधिग्रहण, न मुआवजे पर सहमति और अब 64 हजार समाजवादी आवास की ताल ठोंकी जा रही है।
गुरुवार को ही मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने समाजवादी आवास का आदेश दिया है और शुक्रवार को इसके लिए केडीए उपाध्यक्ष ने बैठक कर चारों जोनों में 20 - 20 हेक्टेयर ग्राम समाज की जमीन चिह्नित करने के लिए जोनल टीमें गठित कर दी।
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सभी टीमों से तीन दिन में रिपोर्ट मांगी गई है। कागजों पर रिपोर्ट भी आ जाएगी लेकिन पुरानी योजनाओं में पैसा फंसाने वाले लोग पूछ रहे हैं हमारी बारी कब आएगी।
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मुख्यमंत्री ने 18 दिसंबर को लखनऊ में सभी विकास प्राधिकरणों के उपाध्यक्षों की बैठक में समाजवादी आवास योजना के तहत सूबे के विभिन्न शहरों में तीन लाख आवास बनाने के निर्देश दिए।
हालांकि अभी तक प्राधिकरण वार आवासों का लक्ष्य निर्धारित नहीं किया गया है। यह योजना जनवरी में लांच होनी है। शुक्रवार को केडीए उपाध्यक्ष जयश्री भोज ने चारों जोनों के तहसीलदारों, सहायक नगर नियोजकों (एटीपी) और अधिशासी अभियंताओं की बैठक की।
बैठक में चारों जोनों के चार टीमें बनाई गईं। प्रत्येक टीम में उसी जोन का तहसीलदार, एटीपी और अधिशाषी अभियंता को शामिल किया गया है। टीमों ने भी तेजी दिखाते हुए छतमरा, तौधकपुर में ग्राम समाज की जमीन देखी।
जवाहरपुरम (आईआईटी के पीछे) में पांच हजार आवास बनाने का खाका भी तय हो गया।
‘अपने घर’ का सपना कब होगा अपना
12 बड़ी आवासीय योजनाएं लांच करके शहरियों को केडीए ने जो ‘अपने घर’ का सपना दिखाया था वो सपना ही रह गया। हकीकत यह है कि अभी तक इनके लिए जमीन ही नहीं मिली है।
इस कारण तमाम योजनाएं रद्द की जा रही हैं, जिसकी जानकारी पब्लिक को नहीं है। योजनाओं के लिए पैसा भी जमा कराया जा चुका है। अब सवाल यह है कि शहरवासियों का पैसा वापस किया जाएगा या फिर उन्हें दूसरी जगह जमीन दी जाएगी।
इस पर केडीए चुप्पी साधे है। केडीए ने वर्ष 1996, 2005, 2010, 2012 और 2013 में 12 आवासीय योजनाएं लांच कीं। इन पर काम भी शुरू हुआ, जो अभी तक पूरा नहीं हो सका है।
नया अध्यादेश आने के बाद जमीन अधिग्रहण महंगा हो गया है। अब किसानों से सीधे जमीन खरीदने में फायदा है। केडीए ने कुछ योजनाओं के भूमि अधिग्रहण का प्रस्ताव टाल दिया है।
कुछ मामले हाईकोर्ट के विचाराधीन और कुछ मामलों में मुआवजे पर किसानों से सहमति नहीं बन सकी है। इसका सीधा प्रभाव केडीए की 12 योजनाओं पर आया है।
ओके सिंह, एडीएम भूमि अध्याप्ति
नई भूमि अधिग्रहण नीति आनी थी। इसलिए मामले ऐसे लटके थे। नई आवास नीति इसी महीने में आई है। अपर जिलाधिकारी (भूमि अध्याप्ति) के पास शासनादेश आ गया है। अब भूमि अधिग्रहण के नए मामले जल्द निस्तारित हो जाएंगे।
जगदीश, सचिव, केडीए