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लोकसभा चुनाव के बीच भाजपा को तगड़ा झटका, पूर्व सांसद ने पार्टी छोड़ बीजेपी पर लगाए गंभीर आरोप
Mon, 15 Apr 2019 07:07 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Mon, 15 Apr 2019 07:07 PM IST
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लोकसभा चुनाव
- फोटो : अमर उजाला
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लोकसभा चुनाव 2019 के बीच में भाजपा को तगड़ा झटका देते हुए पूर्व सांसद ने पार्टी छोड़ गंभीर आरोप भी लगाए हैं। भाजपा से दो बार राज्यसभा सदस्य रहे प्रोफेसर डॉ. रामबख्श सिंह वर्मा ने उपेक्षा से आहत होकर पार्टी छोड़ने का एलान कर दिया। इस दौरान तिर्वा विधानसभा से चुनाव लड़ चुके उनके बेटे आलोक वर्मा ने भी भाजपा छोड़ दी।
सोमवार को कन्नौज के छिबरामऊ में मोहल्ला इंदिरानगर स्थित अपने आवास सेवा कुटीर में पत्रकारों के साथ बातचीत करते हुए पूर्व सांसद प्रो. डॉ. रामबख्श सिंह वर्मा ने कहा कि पार्टी में पूरे मनोयोग और तन, मन, धन से कार्य करने के बाद भी सम्मान न मिलने और लगातार अपमानजनक स्थितियों से गुजरना पड़ रहा था।
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सोमवार को कन्नौज के छिबरामऊ में मोहल्ला इंदिरानगर स्थित अपने आवास सेवा कुटीर में पत्रकारों के साथ बातचीत करते हुए पूर्व सांसद प्रो. डॉ. रामबख्श सिंह वर्मा ने कहा कि पार्टी में पूरे मनोयोग और तन, मन, धन से कार्य करने के बाद भी सम्मान न मिलने और लगातार अपमानजनक स्थितियों से गुजरना पड़ रहा था।
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जिस पार्टी को मेरी जरूरत नहीं, उस पार्टी की हमें भी जरूरत नहीं
पार्टी के प्रदेश व केंद्र स्तर के पदाधिकारियों से कई बार अनुरोध के बाद भी कोई कार्रवाई न होने से आहत होकर भाजपा से अलग होने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि पार्टी से लोकसभा का टिकट न मिलना एक मात्र वजह नहीं है। टिकट न मिलने पर भी वह और उनके पुत्र आलोक वर्मा प्रचार करना चाहते थे। पार्टी का एक भी पदाधिकारी उन्हें यह विश्वास दिलाने को तैयार नहीं था कि वाजिब हक दिया जाएगा।
बताया गया कि उनके भाग्य का फैसला पार्टी नहीं, बल्कि पार्टी में रह चुके और अब भी संवैधानिक पद पर आसीन बड़े महानुभावों द्वारा होगा। आरोप लगाया कि भाजपा अब एक व्यक्ति की बंधुआ होकर रह गई है। ईमानदार नेताओं को हाशिये पर डाल दिया गया। समाज विरोधी कार्यों में लिप्त बालू खनन करने वालों व थानों में दलाली करने वाले लोगों ने पार्टी पर कब्जा कर लिया है।
उन्होंने कहा कि वह राजनीति से संन्यास नहीं ले रहे हैं, जिस पार्टी को मेरी जरूरत नहीं, उस पार्टी की हमें भी जरूरत नहीं। बहुत जल्द समर्थकों से राय लेकर किसी अन्य राजनीतिक दल, जिसमें मुझे और मेरे समर्थकों को सम्मान मिलेगा, उसमें शामिल होकर नया राजनीतिक जीवन शुरू करेंगे। इस दौरान काफी समर्थक मौजूद रहे।
बताया गया कि उनके भाग्य का फैसला पार्टी नहीं, बल्कि पार्टी में रह चुके और अब भी संवैधानिक पद पर आसीन बड़े महानुभावों द्वारा होगा। आरोप लगाया कि भाजपा अब एक व्यक्ति की बंधुआ होकर रह गई है। ईमानदार नेताओं को हाशिये पर डाल दिया गया। समाज विरोधी कार्यों में लिप्त बालू खनन करने वालों व थानों में दलाली करने वाले लोगों ने पार्टी पर कब्जा कर लिया है।
उन्होंने कहा कि वह राजनीति से संन्यास नहीं ले रहे हैं, जिस पार्टी को मेरी जरूरत नहीं, उस पार्टी की हमें भी जरूरत नहीं। बहुत जल्द समर्थकों से राय लेकर किसी अन्य राजनीतिक दल, जिसमें मुझे और मेरे समर्थकों को सम्मान मिलेगा, उसमें शामिल होकर नया राजनीतिक जीवन शुरू करेंगे। इस दौरान काफी समर्थक मौजूद रहे।