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नमी बढ़ी, फिर छा सकता है कोहरा
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, कानपुर
Updated Fri, 16 Dec 2016 09:55 PM IST
सार
- न्यूनतम पारा लुढ़ककर 6.6 डिग्री पहुंचा
- अधिकतम पारा में तीन डिग्री की गिरावट
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विस्तार
न्यूनतम पारा के लुढ़कने और वातावरण में सुबह की नमी बढ़ने से घना कोहरा छाने के आसार हैं। ऐसा हुआ तो सर्दी बढ़ेगी। अधिकतम पारा भी नीचे आएगा। न्यूनतम पारा में जबरदस्त गिरावट है। यह पारा 6.6 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया, जो इस मौसम का सबसे कम है। गत गुरुवार को यही पारा 8.1 डिग्री था।
उत्तराखंड की बर्फीली पहाड़ियोें से होकर आने वाली उत्तर-पश्चिमी हवाओं की दिशा शुक्रवार को नहीं बदली। इससे कानपुर नगर और कानपुर देहात सहित सेंट्रल यूपी के अधिकतर जिलों में वातावरण की नमी बढ़ गई। सुबह की नमी 92 फीसदी और दोपहर की नमी 42 फीसदी है। इससे पृथ्वी के ऊपरी और निचली सतह पर वाष्प बनने के आसार हैं।
वाष्प ही कोेहरा बढ़ाते हैं। नमी की वजह से ही अधिकतम पारा 3 डिग्री सेल्सियस लुढ़का है। यह पारा 24.2 डिग्री रिकार्ड किया गया, जो गत गुरुवार को 27.2 डिग्री था। चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के वरिष्ठ मौसम विज्ञानी डॉ. अनिरुद्ध दुबे ने बताया कि मौसम सामान्य है। अब नमी बढ़ी है। इसका असर शीत लहर और कोहरे के रूप में देखने को मिल सकता है।
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खेतों में नमी बरकरार रखें
तेज धूप और पारा चढ़ने से गेहूं की फसलों को नुकसान संभव है। ऐसे में खेतों में नमी बनाए रखने की जरूरत है। जिन किसानोें ने नवंबर में गेहूं की बुआई की थी, वह 18-21 दिन के बीच खेतों में हल्की सिंचाई जरूर कर दें। इससे फसल के किल्ले मजबूत होंगे। जर्मिनेशन (बीज का उगना) अच्छा रहेगा। इसका सीधा असर प्रोडक्शन पर पड़ेगा।
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उत्तराखंड की बर्फीली पहाड़ियोें से होकर आने वाली उत्तर-पश्चिमी हवाओं की दिशा शुक्रवार को नहीं बदली। इससे कानपुर नगर और कानपुर देहात सहित सेंट्रल यूपी के अधिकतर जिलों में वातावरण की नमी बढ़ गई। सुबह की नमी 92 फीसदी और दोपहर की नमी 42 फीसदी है। इससे पृथ्वी के ऊपरी और निचली सतह पर वाष्प बनने के आसार हैं।
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वाष्प ही कोेहरा बढ़ाते हैं। नमी की वजह से ही अधिकतम पारा 3 डिग्री सेल्सियस लुढ़का है। यह पारा 24.2 डिग्री रिकार्ड किया गया, जो गत गुरुवार को 27.2 डिग्री था। चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के वरिष्ठ मौसम विज्ञानी डॉ. अनिरुद्ध दुबे ने बताया कि मौसम सामान्य है। अब नमी बढ़ी है। इसका असर शीत लहर और कोहरे के रूप में देखने को मिल सकता है।
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खेतों में नमी बरकरार रखें
तेज धूप और पारा चढ़ने से गेहूं की फसलों को नुकसान संभव है। ऐसे में खेतों में नमी बनाए रखने की जरूरत है। जिन किसानोें ने नवंबर में गेहूं की बुआई की थी, वह 18-21 दिन के बीच खेतों में हल्की सिंचाई जरूर कर दें। इससे फसल के किल्ले मजबूत होंगे। जर्मिनेशन (बीज का उगना) अच्छा रहेगा। इसका सीधा असर प्रोडक्शन पर पड़ेगा।