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यूपी के बांदा में जिला प्रशासन और नेताओं से नहीं मिली मदद तो आगे आए अन्नदाता, खुद खोली गोशाला
Sun, 10 Jan 2021 03:56 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बांदा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बांदा
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Sun, 10 Jan 2021 03:56 PM IST
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बांदा के अफसरों ने नहीं सुनी तो ग्रामीणों ने बनवाई गोशाला
- फोटो : amar ujala
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बांदा में प्रशासन के पास अन्ना मवेशियों के लिए बजट नहीं है। उधर, खेतों में फसलें लहलहाने की अवस्था में हैं। इन्हें अन्ना पशुओं से बचाने की किसानों ने खुद कोशिशें शुरू कर दी हैं। आपसी सहयोग से अन्ना प्रथा से निजात पाने का नायाब उदाहरण महुआ ब्लाक का जरर गांव है। यहां के किसानों ने आपस में चंदा जुटाकर गोशाला तैयार की है।
इसमें तीन माह के लिए चारे और भूसे का भंडार कर लिया है। लगभग दो सैकड़ा गोवंशों को भी यहां रखा गया है। न सिर्फ जरर गांव, बल्कि आसपास के गांवों की फसलें सुरक्षित हो रही हैँ। जरर गांव के किसान अन्ना पशुओं से हलाकान हैं। प्रशासन, नेताओं और जनप्रतिनिधियों से अनेकों बार अपनी यह फरियाद बयां की, लेकिन कोई हल नहीं निकला।
बारिश ठीकठाक होने से अबकी फसल भी अच्छी होने की उम्मीद है। गेहूं, चना, सरसों, ज्वार सभी कुछ लहलहा रही है। अन्ना पशु इसे सफाचट कर देते हैं। ठंडी रातों में जान जोखिम में डालकर खेतों में फसल ताकी जा रही थी। हाल ही में गांव के कुछ किसानों ने खुद ही गोशाला बनाने और उसमें अन्ना गायों को रखने का फैसला लिया। आपस में चंदा जुटाया।
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करीब 23 हजार रुपये की लागत से गायों के लिए तिरपाल आदि डालकर छाये का इंतजाम किया। लगभग पांच हजार रुपये का पयार खरीदा है। गांव के ओमप्रकाश मिश्रा, रामआसरे, बाबू शुक्ला, देवीदयाल आदि बताते हैं कि अस्थायी गोशाला में भूसा बैंक भी बना है। अगले तीन माह के लिए चारे का भंडार किया गया है। गड्ढे में बोरवेल से पानी भरा गया है। उन्होंने बताया कि लगभग दो सैकड़ा से ज्यादा गायें यहां रखी गई हैं। गांव के किसान नियमित रूप से इनकी देखभाल भी कर रहे हैं।
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इसमें तीन माह के लिए चारे और भूसे का भंडार कर लिया है। लगभग दो सैकड़ा गोवंशों को भी यहां रखा गया है। न सिर्फ जरर गांव, बल्कि आसपास के गांवों की फसलें सुरक्षित हो रही हैँ। जरर गांव के किसान अन्ना पशुओं से हलाकान हैं। प्रशासन, नेताओं और जनप्रतिनिधियों से अनेकों बार अपनी यह फरियाद बयां की, लेकिन कोई हल नहीं निकला।
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बारिश ठीकठाक होने से अबकी फसल भी अच्छी होने की उम्मीद है। गेहूं, चना, सरसों, ज्वार सभी कुछ लहलहा रही है। अन्ना पशु इसे सफाचट कर देते हैं। ठंडी रातों में जान जोखिम में डालकर खेतों में फसल ताकी जा रही थी। हाल ही में गांव के कुछ किसानों ने खुद ही गोशाला बनाने और उसमें अन्ना गायों को रखने का फैसला लिया। आपस में चंदा जुटाया।
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करीब 23 हजार रुपये की लागत से गायों के लिए तिरपाल आदि डालकर छाये का इंतजाम किया। लगभग पांच हजार रुपये का पयार खरीदा है। गांव के ओमप्रकाश मिश्रा, रामआसरे, बाबू शुक्ला, देवीदयाल आदि बताते हैं कि अस्थायी गोशाला में भूसा बैंक भी बना है। अगले तीन माह के लिए चारे का भंडार किया गया है। गड्ढे में बोरवेल से पानी भरा गया है। उन्होंने बताया कि लगभग दो सैकड़ा से ज्यादा गायें यहां रखी गई हैं। गांव के किसान नियमित रूप से इनकी देखभाल भी कर रहे हैं।