शत्रु संपत्ति: हवाला के जरिये पाकिस्तान कैसे पहुंचा 150 करोड़, इंटेलीजेंस सक्रिय, कानपुर में की पड़ताल
कानपुर में वर्तमान में जिन शत्रु संपत्तियों का पता चल पाया है, उसकी कुल संख्या 89 है। सबसे ज्यादा 71 संपत्तियां रावतपुर में हैं। इसी तरह बेकनगंज, जाजमऊ, चमनगंज, स्वरूपनगर व आर्यनगर क्षेत्र में हैं।
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विस्तार
शत्रु संपत्तियाें की फर्जी तरीके से की गई खरीद-फरोख्त की जांच के लिए इंटेलीजेंस सक्रिय हो गई है। एक दिन पहले लखनऊ से शहर आई इंटेलीजेंस की टीम ने शत्रु संपत्तियों का पैसा हवाला के जरिये पाकिस्तान पहुंचाए जाने के मामले में कुछ लोगों से पूछताछ की है।
इंटेलीजेंस इस बात का पता लगा रही है कि शत्रु संपत्तियों का पैसा कैसे पाकिस्तान ले जाया गया। शत्रु संपत्तियों की चल रही जांच में यह बात सामने आई थी कि पिछले 20 वर्षों में सिर्फ कानपुर से ही शत्रु संपत्तियों को बेचकर करीब 150 करोड़ की रकम हवाला के जरिये पाकिस्तान पहुंचाई जा चुकी है। पता चला है कि भारत-पाक विभाजन के समय जिन लोगों की संपत्तियां यहां रह गई थीं, उनसे जुड़े लोग बीच-बीच में यहां अपनी संपत्तियां बेचने आते रहे हैं। यह बात भी सामने आई है कि शत्रु संपत्तियों को बेचने के लिए यहां आने वाले ज्यादातर पाक नागरिक पाकिस्तान से सीधे आने के बजाए इंग्लैंड या दूसरे देशों का वीजा लेकर आते रहे हैं।
बाहर से आने वाले ऐसे लोगों की सहायता के लिए कानपुर में एक टीम शुरू से काम कर रही है, जिसके कुछ लोग अभी भी यहां मौजूद हैं। इस मामले की जांच के लिए पिछले दिनों शत्रु संपत्ति संरक्षण संघर्ष समिति के मुख्य संयोजक शफीकुल्लाह गाजी की ओर से जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन को एक पत्र भी दिया गया था। अब इस मामले में जांच तेज हो गई है। इंटेलीजेंस की टीम ने समिति के सदस्यों से भी कई जानकारियां जुटाई हैं। पता चला है कि जल्द ही यह टीम दोबारा आकर उन स्थानों पर भी जाएगी, जहां पर बैठकर शत्रु संपत्तियों को बेचने की रणनीति बनाई जाती थी। इसमें जो लोग शामिल रहे हैं, उनका भी ब्योरा जुटाया जा रहा है।
89 शत्रु संपत्तियों की सूची तैयार
शहर में वर्तमान में जिन शत्रु संपत्तियों का पता चल पाया है, उसकी कुल संख्या 89 है। सबसे ज्यादा 71 संपत्तियां रावतपुर में हैं। इसी तरह बेकनगंज, जाजमऊ, चमनगंज, स्वरूपनगर व आर्यनगर क्षेत्र में हैं।