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मेट्रो टीम ने तलाशी ‘ऑपरेशन असीम’ की असफलता की वजह, सीमा को यादकर रो पड़े बच्चे
Tue, 09 Apr 2019 12:36 AM IST
प्रशांत कुमार
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रशांत कुमार
Updated Tue, 09 Apr 2019 12:36 AM IST
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मेट्रो टीम ने तलाशी ऑपरेशन असीम की असफलता की वजह (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
फर्रुखाबाद जिले में थाना कमालगंज क्षेत्र के गांव रसीदापुर में बोरवेल में गिरी सीमा को निकालने में ‘ऑपरेशन असीम’ फेल होने को लेकर प्रशासन गंभीर है। सेना, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ व पैरा इंजीनियर ब्रिगेड की तमाम कोशिशों के बावजूद मासूम को बाहर नहीं निकाला जा सका। शासन के निर्देश पर सोमवार को लखनऊ मेट्रो की टीम ने गांव पहुंच कर ऑपरेशन की असफलता की वजह तलाशी। इसके लिए ड्रोन कैमरे का सहारा लिया गया।
गांव रसीदापुर में तीन अप्रैल को दोपहर स्व. नरेश चंद्र की 8 वर्षीय पुत्री सीमा 60 फीट गहरे बोरवेल में गिर गई थी। प्रशासनिक अधिकारियों ने सेना की सिखलाई रेजिमेंट, आगरा से पैरा ब्रिग्रेड इंजीनियर, लखनऊ से एनडीआरएफ व एसडीआरएफ बुलाकर ऑपरेशन असीम नाम से रेस्क्यू चलाया। तीन दिन के लगातार प्रयास के बाद भी बच्ची को बचाया नहीं जा सका। अंतत: आसपास बने पक्के मकानों को खतरा बताकर सेना ने ऑपरेशन रोक दिया। इस असफलता से अधिकारी भी विचलित हुए।
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गांव रसीदापुर में तीन अप्रैल को दोपहर स्व. नरेश चंद्र की 8 वर्षीय पुत्री सीमा 60 फीट गहरे बोरवेल में गिर गई थी। प्रशासनिक अधिकारियों ने सेना की सिखलाई रेजिमेंट, आगरा से पैरा ब्रिग्रेड इंजीनियर, लखनऊ से एनडीआरएफ व एसडीआरएफ बुलाकर ऑपरेशन असीम नाम से रेस्क्यू चलाया। तीन दिन के लगातार प्रयास के बाद भी बच्ची को बचाया नहीं जा सका। अंतत: आसपास बने पक्के मकानों को खतरा बताकर सेना ने ऑपरेशन रोक दिया। इस असफलता से अधिकारी भी विचलित हुए।
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तीन दिन तक चली खुदाई से कई मकानों में दरार आ गई
इसके बाद भविष्य में होने वाले ऐसे हादसों पर संभावित उपायों को लेकर शासन की ओर से पहुंची लखनऊ मेट्रो की टीम ने सोमवार को मौके का निरीक्षण किया। अधिकारियों व गांववालों से जानकारी ली। साथ ही ड्रोन कैमरे को 50-60 मीटर की ऊंचाई पर उड़ाया।
कैमरे से घटनास्थल वाले गांव के 25 चक्कर लगवाकर ऊपर से फुटेज लिए गए। लखनऊ मेट्रो के उप मुख्य अभियंता एससी कनौजिया, विशेषज्ञ जनरल कंस्ट्रक्शन वीडी शर्मा व उप प्रबंधक जीटीजीएल ईशान मल्होत्रा ने बोरवेल के निकट की मिट्टी को हाथ में लेकर जांचा।
कैमरे से घटनास्थल वाले गांव के 25 चक्कर लगवाकर ऊपर से फुटेज लिए गए। लखनऊ मेट्रो के उप मुख्य अभियंता एससी कनौजिया, विशेषज्ञ जनरल कंस्ट्रक्शन वीडी शर्मा व उप प्रबंधक जीटीजीएल ईशान मल्होत्रा ने बोरवेल के निकट की मिट्टी को हाथ में लेकर जांचा।
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तीन दिन तक चली खुदाई से कई मकानों में दरार आ गई
उन्होंने कहा कि मिट्टी गंगा की रेत की तरह बलुई है। इसी कारण बचाव में दिक्कत आई होगी। मौके पर ग्रामीणों ने कहा कि रेतीली मिट्टी के कारण ही मकानों को खतरा है। एसडीएम सदर अमित असेरी ने बताया कि टीम अपनी रिपोर्ट शीघ्र ही देगी। इसकी प्रति शासन को भी भेजी जाएगी। इससे भविष्य के ऐसे हादसों में नए उपायों का खाका भी खींचा जा सकेगा।
तीन दिन तक चली खुदाई से कई मकानों में दरार आ गई। कुछ की नींव भी कमजोर हो गई। पानी बरसने पर कोई भी अप्रिय घटना से इनकार नहीं किया जा सकता। इसलिए मकानों के नुकसान की स्थिति भी तकनीकी टीम ने देखी। उधर, गांव के परिषदीय प्राथमिक विद्यालय व आंगनबाड़ी केंद्र में सोमवार को सन्नाटा पसरा था। बच्चों ने बताया कि सीमा जब स्कूल आती थी तो कभी आंगनबाड़ी वाले कमरे में और कुछ देर कक्षा एक में बैठ जाती थी। वह साथ में खेलती थी। इस दौरान बच्चों की आंखें भर आईं। बुधवार को वह स्कूल से ही घर पहुंची थी। इसके बाद हादसा हो गया।
तीन दिन तक चली खुदाई से कई मकानों में दरार आ गई। कुछ की नींव भी कमजोर हो गई। पानी बरसने पर कोई भी अप्रिय घटना से इनकार नहीं किया जा सकता। इसलिए मकानों के नुकसान की स्थिति भी तकनीकी टीम ने देखी। उधर, गांव के परिषदीय प्राथमिक विद्यालय व आंगनबाड़ी केंद्र में सोमवार को सन्नाटा पसरा था। बच्चों ने बताया कि सीमा जब स्कूल आती थी तो कभी आंगनबाड़ी वाले कमरे में और कुछ देर कक्षा एक में बैठ जाती थी। वह साथ में खेलती थी। इस दौरान बच्चों की आंखें भर आईं। बुधवार को वह स्कूल से ही घर पहुंची थी। इसके बाद हादसा हो गया।