{"_id":"58b191274f1c1b3072b22efd","slug":"dm-bogus-letter-snatching-jobs-here","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"यूपी में एक फर्जी चिट्ठी का हड़कंप, उड़ा रखी है अफसरों की नींद ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
यूपी में एक फर्जी चिट्ठी का हड़कंप, उड़ा रखी है अफसरों की नींद
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
Updated Sun, 26 Feb 2017 09:57 AM IST
सार
-डीएम के फर्जी लेटर से दो बाबूओं पर गिरी गाज
-कार्रवाई के बाद डीएम से किया संपर्क तो हुआ खुलासा
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शिक्षा विभाग में कार्यरत्त कर्मी और शिक्षा विभाग को भेजी गई डीएम की फर्जी चिट्ठी
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
बस एक चिट्ठी आती है और बाबूओं की नींद हराम हो जाती है। ऐसा क्या है इस चिट्ठी में जो बाबूओं की परेशानी का सबब बनी है....
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डीएम के नाम से भेजी गई फर्जी चिट्ठी
- फोटो : अमर उजाला
अब तक एक नहीं बल्की यूपी में सिलसिलेवार ऐसी कई घटनाओं का खुलासा हो चुका है। हाल ही में इस चिट्ठी ने कानपुर के एक आला अफसर की नौकरी छीन ली थी। अधिकारी नगर निगम में तैनात था। ताजा प्रकरण तबादलों को लेकर है। वही चिट्ठी आती है और दो अफसर नप जाते हैं। इस चिट्ठी की असलियत से पर्दा बाद में उठता है।
कानपुर के माध्यमिक शिक्षा विभाग में दो बाबूओं के तबादले को लेकर डीएम की एक चिट्ठी मिली है। जिला विद्यालय निरिक्षक कार्यालय में कार्यरत्त इन दो बाबुओं के खिलाफ आचार संहिता के उल्लंघन को लेकर ट्रांसफर आर्डर मिला है। ट्रांसफर ऑर्डर को लेकर दोनों ने डीएम से सम्पर्क किया तो सच्चाई सामने आई। दरअसल, डीएम की तरफ से ऐसी कोई चिट्ठी नहीं भेजी गई थी बल्कि यह एक फर्जी खत था। फौरन दोनों के ट्रांसफर को रोकने के लिए लिखा गया। अब पूरे मामले में जांच बैठा दी गई है।
जिला विद्यालय निरिक्षक विनय मोहन ने शनिवार को बताया 15 फरवरी को प्रमुख सचिव माध्यमिक शिक्षा का आदेश आया था। जिसमें डीएम कौशलराज शर्मा के फर्जी लेटर का इस्तेमाल करके 9 फरवरी को प्रमुख सचिव माध्यमिक शिक्षा को रिपोर्ट भेजी गई थी। जिसमें लिखा था नगर मजिस्ट्रेट की जांच में पाया गया है कि कार्यालय जिला विद्यालय निरिक्षक कानपुर नगर में कार्यरत वरिष्ट सहायक सर्वेश तिवारी और प्रदीप कुमार सक्सेना द्वारा वर्तमान भाजपा विधायक एवं प्रत्याशी के समर्थन में प्रचार-प्रसार कर रहे हैं। इसके साथ ही स्कूल प्रबंधकों को दबाव में लेकर स्कूलों में भाजपा की गोष्टी कराने में दोषी पाए गए हैं।
इस रिपोर्ट पर प्रमुख सचिव के आदेश पर निदेशालय से दोनों बाबुओं का ट्रांसफर कर दिया गया। कार्रवाई के बाद दोनों बाबुओं ने पड़ताल की तो सच्चाई सामने आई। डीएम कौशलराज शर्मा ने बताया कि उन्होंने प्रमुख सचिव को कोई ऐसी रिपोर्ट ही नहीं भेजी है। मेरी फर्जी रिपोर्ट तैयार करके शासन को भेजी गई जिसपर ट्रांसफर का आदेश हुआ है। डीआईओएस विनय मोहन वन ने कहा कि मामले की रिपोर्ट शासन को भेज दी गई है।
कानपुर के माध्यमिक शिक्षा विभाग में दो बाबूओं के तबादले को लेकर डीएम की एक चिट्ठी मिली है। जिला विद्यालय निरिक्षक कार्यालय में कार्यरत्त इन दो बाबुओं के खिलाफ आचार संहिता के उल्लंघन को लेकर ट्रांसफर आर्डर मिला है। ट्रांसफर ऑर्डर को लेकर दोनों ने डीएम से सम्पर्क किया तो सच्चाई सामने आई। दरअसल, डीएम की तरफ से ऐसी कोई चिट्ठी नहीं भेजी गई थी बल्कि यह एक फर्जी खत था। फौरन दोनों के ट्रांसफर को रोकने के लिए लिखा गया। अब पूरे मामले में जांच बैठा दी गई है।
जिला विद्यालय निरिक्षक विनय मोहन ने शनिवार को बताया 15 फरवरी को प्रमुख सचिव माध्यमिक शिक्षा का आदेश आया था। जिसमें डीएम कौशलराज शर्मा के फर्जी लेटर का इस्तेमाल करके 9 फरवरी को प्रमुख सचिव माध्यमिक शिक्षा को रिपोर्ट भेजी गई थी। जिसमें लिखा था नगर मजिस्ट्रेट की जांच में पाया गया है कि कार्यालय जिला विद्यालय निरिक्षक कानपुर नगर में कार्यरत वरिष्ट सहायक सर्वेश तिवारी और प्रदीप कुमार सक्सेना द्वारा वर्तमान भाजपा विधायक एवं प्रत्याशी के समर्थन में प्रचार-प्रसार कर रहे हैं। इसके साथ ही स्कूल प्रबंधकों को दबाव में लेकर स्कूलों में भाजपा की गोष्टी कराने में दोषी पाए गए हैं।
इस रिपोर्ट पर प्रमुख सचिव के आदेश पर निदेशालय से दोनों बाबुओं का ट्रांसफर कर दिया गया। कार्रवाई के बाद दोनों बाबुओं ने पड़ताल की तो सच्चाई सामने आई। डीएम कौशलराज शर्मा ने बताया कि उन्होंने प्रमुख सचिव को कोई ऐसी रिपोर्ट ही नहीं भेजी है। मेरी फर्जी रिपोर्ट तैयार करके शासन को भेजी गई जिसपर ट्रांसफर का आदेश हुआ है। डीआईओएस विनय मोहन वन ने कहा कि मामले की रिपोर्ट शासन को भेज दी गई है।
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डीएम ने लिखित में दिया कि मेरी फर्जी रिपोर्ट बनाई गई
शिक्षा विभाग में कार्यरत्त इस कर्मी के तबादले के आर्डर हुए थे जारी
डीएम ने लिखित में दिया कि मेरी फर्जी रिपोर्ट बनाई गई
डीएम ने फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद डीआईओएस को लिखित दिया है कि यह पत्र पूरी तरह से फर्जी है। इसमें उनके हस्ताक्षर भी फर्जी तरीके से किए गए हैं। डीआईओएस विनय मोहन वन डीएम की रिपोर्ट के साथ शासन को दोनों का ट्रांसफर रोकने और मामले की गंभरता से जांच कराने के लिए पत्र लिखा है।
विभाग में नहीं होने के बाद भी हो गई कार्रवाई
माध्यमिक शिक्षा निदेशालय ने डीएम की फर्जी रिपोर्ट पर आंख बंद करके कार्रवाई कर दी। जबकि इनमें से एक वरिष्ट सहायक प्रदीप कुमार सक्सेना का तीन महीने पहले प्रधान सहायक के पद पर प्रमोशन होने के बाद बीएसए दफ्तर में ट्रांसफर हो गया था। जबकि शिकायत पत्र में लिखा है कि डीआईओएस कार्यालय में कार्यरत प्रदीप कुमार सक्सेना भी दोषी पाए गए हैं। पत्र आने के बाद डीआईओएस विनय मोहन वन ने भी आंख बंद करके दोनों को रिलीव कर दिया। जबकि शासन को एक रिपोर्ट भेजनी चाहिए थी कि वह उनके विभाग में ही नहीं है।
डीएम ने फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद डीआईओएस को लिखित दिया है कि यह पत्र पूरी तरह से फर्जी है। इसमें उनके हस्ताक्षर भी फर्जी तरीके से किए गए हैं। डीआईओएस विनय मोहन वन डीएम की रिपोर्ट के साथ शासन को दोनों का ट्रांसफर रोकने और मामले की गंभरता से जांच कराने के लिए पत्र लिखा है।
विभाग में नहीं होने के बाद भी हो गई कार्रवाई
माध्यमिक शिक्षा निदेशालय ने डीएम की फर्जी रिपोर्ट पर आंख बंद करके कार्रवाई कर दी। जबकि इनमें से एक वरिष्ट सहायक प्रदीप कुमार सक्सेना का तीन महीने पहले प्रधान सहायक के पद पर प्रमोशन होने के बाद बीएसए दफ्तर में ट्रांसफर हो गया था। जबकि शिकायत पत्र में लिखा है कि डीआईओएस कार्यालय में कार्यरत प्रदीप कुमार सक्सेना भी दोषी पाए गए हैं। पत्र आने के बाद डीआईओएस विनय मोहन वन ने भी आंख बंद करके दोनों को रिलीव कर दिया। जबकि शासन को एक रिपोर्ट भेजनी चाहिए थी कि वह उनके विभाग में ही नहीं है।