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Kanpur News: बेटियों घर छोड़ने से पहले रुको, एक बार सोचो, बात करो, समाधान निकलेगा
Sat, 17 Oct 2026 01:06 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
Updated Sat, 17 Oct 2026 01:06 AM IST
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कानपुर देहात। घर छोड़ने का फैसला मतलब, पूर्ण रूप से जीवन में बदलाव होता है। इसलिए रुको, घर छोड़ने से पहले एक बार विचार करो, परिजन या पुलिस से बात करो, इससे मुसीबत में नहीं पड़ोगी और ना ही परिजन परेशान होंगे। ये बातें एसपी श्रद्धा नरेंद्र पांडेय ने शुक्रवार को पुलिस लाइन में आयोजित मिशन शक्ति फेज-6.0 कार्यक्रम के दौरान स्कूली छात्राओं से कहीं।
कार्यक्रम में राज्य स्तरीय तीरंदाजी प्रतियोगिता की स्वर्ण पदक विजेता व मिशन शक्ति अभियान की शुभंकर अनन्या, काजल, खुशी और रजनी ने भी प्रतिभाग किया। एसपी ने चारों को सम्मानित कर उनकी उपलब्धियों एवं प्रेरणादायी व्यक्तित्व के माध्यम से जनपद की अन्य बालिकाओं को आत्मविश्वास, आत्मनिर्भरता तथा अपने लक्ष्य के प्रति समर्पण की प्रेरणा देने का संदेश दिया गया। साथ ही छात्राओं को उनके कॅरिअर से जुड़े प्रश्नों के जवाब दिए।
एसपी ने बताया कि जिले से जनवरी माह से लेकर अबतक घर छोड़कर गईं बालिकाओं में से 278 बालिकाएं घर वापस लौट आईं। इनमें कुछ नाबालिग भी शामिल थीं। जिले की पुलिस व आईआईटी कानपुर ने पूर्व में एक एमओयू साइन किया था। उसके तहत इन बालिकाओं की काउंसिलिंग की गई। साथ ही उनसे कुछ प्रश्नों के जवाब लिए गए। इसमें बालिकाओं के घर छोड़ने की पीछे क्षणिक गुस्सा, भावनात्मक आवेग और तनाव आदि सामने आया है।
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एसपी ने बालिकाओं को जागरूक किया कि किसी भी समस्या, पारिवारिक तनाव अथवा भावनात्मक परेशानी की स्थिति में जल्दबाजी में कोई निर्णय न लें। ऐसी परिस्थितियों में धैर्यपूर्वक अपने अभिभावकों, शिक्षकों अथवा निकटतम मिशन शक्ति केंद्र पर तैनात महिला पुलिसकर्मियों से अपनी बात साझा करें तथा उचित मार्गदर्शन एवं सहायता प्राप्त करें। पुलिस आपकी समस्या का समाधान करवाने का हर संभव प्रयास करेगी। बालिग होने तक सिर्फ मन पढ़ाई में लगाएं और भविष्य संवारने के लिए मेहनत करें।
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कार्यक्रम में राज्य स्तरीय तीरंदाजी प्रतियोगिता की स्वर्ण पदक विजेता व मिशन शक्ति अभियान की शुभंकर अनन्या, काजल, खुशी और रजनी ने भी प्रतिभाग किया। एसपी ने चारों को सम्मानित कर उनकी उपलब्धियों एवं प्रेरणादायी व्यक्तित्व के माध्यम से जनपद की अन्य बालिकाओं को आत्मविश्वास, आत्मनिर्भरता तथा अपने लक्ष्य के प्रति समर्पण की प्रेरणा देने का संदेश दिया गया। साथ ही छात्राओं को उनके कॅरिअर से जुड़े प्रश्नों के जवाब दिए।
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एसपी ने बताया कि जिले से जनवरी माह से लेकर अबतक घर छोड़कर गईं बालिकाओं में से 278 बालिकाएं घर वापस लौट आईं। इनमें कुछ नाबालिग भी शामिल थीं। जिले की पुलिस व आईआईटी कानपुर ने पूर्व में एक एमओयू साइन किया था। उसके तहत इन बालिकाओं की काउंसिलिंग की गई। साथ ही उनसे कुछ प्रश्नों के जवाब लिए गए। इसमें बालिकाओं के घर छोड़ने की पीछे क्षणिक गुस्सा, भावनात्मक आवेग और तनाव आदि सामने आया है।
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एसपी ने बालिकाओं को जागरूक किया कि किसी भी समस्या, पारिवारिक तनाव अथवा भावनात्मक परेशानी की स्थिति में जल्दबाजी में कोई निर्णय न लें। ऐसी परिस्थितियों में धैर्यपूर्वक अपने अभिभावकों, शिक्षकों अथवा निकटतम मिशन शक्ति केंद्र पर तैनात महिला पुलिसकर्मियों से अपनी बात साझा करें तथा उचित मार्गदर्शन एवं सहायता प्राप्त करें। पुलिस आपकी समस्या का समाधान करवाने का हर संभव प्रयास करेगी। बालिग होने तक सिर्फ मन पढ़ाई में लगाएं और भविष्य संवारने के लिए मेहनत करें।