कोई बेटियों के लिए तरस रहा, तो किसी ने बोझ समझकर छोड़ दिया, कुछ ऐसी है इन ‘बच्चियों की दास्तां’
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औरैया जिले के रेलवे स्टेशन फफूंद पर दो सगी बहनें संदिग्धावस्था में बैठी दिखीं। जी.आर.पी पुलिस दोनों को चौकी ले आई। यहां उनकी जेब से एक पर्ची मिली जिसमें दोनों लड़कियों को जिला कन्नौज बर्रा खानपुर निवासी बताया गया।
आशिया और ओमकार बच्चियों को अपनाने के लिए तैयार
एक लड़की लगभग 3 वर्ष एवं दूसरी डेढ़ वर्ष की है। लड़कियां अपने और अपने परिजनों के बारे में कुछ भी नहीं बता पा रहीं हैं। हालांकि कुछ यात्रियों का कहना है कि बेटियों को उनकी माँ ही सुबह 5 से 6 बजे के बीच स्टेशन पर छोड़ गयीं थी।
इधर, दो बेसहारा लड़कियों के रेलवे स्टेशन पर होने की सूचना पाते ही आशिया अपने पति ओमकार के साथ रेलवे स्टेशन जा पहुँचीं। ओमकार ने बताया कि उन दोनों का लगभग 11 वर्ष पहले प्रेम विवाह हुआ था। उसके दो बेटे हैं। बेटियाँ नहीं है, जिस कारण रक्षाबंधन पर उसके बेटों की कलाइयां सूनी रह जाती हैं जिसके कारण उनके मुंह लटक जाते हैं और वे अपने जीवन में बहनों की कमी, और उनकी एहमियत को महसूस करते हैं। वे दोनों बेटियों को पाने के लिए सभी कानूनी प्रक्रियाओंं से गुजरने के लिए और उन बेसहारा लड़कियों को मां-बाप का प्यार देलें को तैयार हैं। उधर, जी.आर.पी पुलिस लड़कियों के परिजनों की तलाश में जुटी हुई है।