{"_id":"5f0e0b578ebc3e63ba635b66","slug":"crime-akbarpur-news-knp5712166141","type":"story","status":"publish","title_hn":"शिवली कोतवाली में तैनात रहे 600 पुलिस कर्मियों का पुलिंदा तैयार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
शिवली कोतवाली में तैनात रहे 600 पुलिस कर्मियों का पुलिंदा तैयार
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कानपुर देहात/शिवली। शिवली कोतवाली में पिछले सात सालों के दौरान तैनात रहे छह सौ आरक्षी, एचसी व एचसीपी का ब्योरा जुटा लिया गया है। हालांकि कुख्यात विकास दुबे प्रकरण की जांच कर रही एसआईटी ने 1995 से लेकर अब तक कुल 25 साल में तैनात रहे पुलिस कर्मियों का ब्योरा मांगा है। पुलिस महकमा अब अन्य पुलिस कर्मियों की तैनाती की जानकारी जुटा रहा है।
दो जुलाई की रात कानपुर नगर के बिकरू में कुख्यात विकास दुबे को पकड़ने गई पुलिस टीम पर गोलियां बरसा दी गई थीं। इसमें सीओ समेत आठ पुलिस कर्मी शहीद हो गए थे। मध्य प्रदेश के उज्जैन महाकालेश्वर मंदिर से पकड़ने के बाद कानपुर पुलिस विकास को आठ जुलाई को वापस ला रही थी। तभी सचेंडी थाने के पास गाड़ी पलटने के बाद भागते समय पुलिस ने विकास का एनकाउंटर कर दिया था। इसको लेकर कई सवाल उठाए गए थे। शासन से एसआईटी को जांच दी गई थी। एसआईटी ने वर्ष 1995 से अब तक शिवली कोतवाली मेें तैनात रहे कांस्टेबल, हेड कांस्टेबल व एचसीपी का नाम, तैनाती की अवधि व मोबाइल नंबर मांगा है। मंगलवार को वर्ष 2013 से लेकर अब तक शिवली कोतवाली में तैनात रहे छह सौ कांस्टेबल, हेड कांस्टेबल व एचसीपी की जानकारी तैयार कर ली गई है।
मैथा में विकास की जमीनों का ब्योरा मांगा
कानपुर देहात। कुख्यात विकास दुबे प्रकरण मेें एसआईटी सभी बिंदुओं की बारीकी से पड़ताल कर रही है। विकास के मुठभेड़ में मारे जाने के बाद अब बिकरू गांव में भी लोग खुलकर सामने आ रहे हैं। जुल्म की दास्तां बयां कर रहे हैं। ऐसे मेें एसआईटी ने मैथा तहसील से विकास दुबे की जमीनों का ब्योरा मांगा है। ताकि पता चल सके कि उसने किन-किन जमीनों पर अवैध कब्जा किया, किसकी जमीन खरीदी या हथियाई है। पूर्व में बिकरू गांव भी जिले में शामिल था, लेकिन बाद में उसे कानपुर नगर में जोड़ दिया गया । फिलहाल पुराने अभिलेख खंगाले जाने लगे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
दो जुलाई की रात कानपुर नगर के बिकरू में कुख्यात विकास दुबे को पकड़ने गई पुलिस टीम पर गोलियां बरसा दी गई थीं। इसमें सीओ समेत आठ पुलिस कर्मी शहीद हो गए थे। मध्य प्रदेश के उज्जैन महाकालेश्वर मंदिर से पकड़ने के बाद कानपुर पुलिस विकास को आठ जुलाई को वापस ला रही थी। तभी सचेंडी थाने के पास गाड़ी पलटने के बाद भागते समय पुलिस ने विकास का एनकाउंटर कर दिया था। इसको लेकर कई सवाल उठाए गए थे। शासन से एसआईटी को जांच दी गई थी। एसआईटी ने वर्ष 1995 से अब तक शिवली कोतवाली मेें तैनात रहे कांस्टेबल, हेड कांस्टेबल व एचसीपी का नाम, तैनाती की अवधि व मोबाइल नंबर मांगा है। मंगलवार को वर्ष 2013 से लेकर अब तक शिवली कोतवाली में तैनात रहे छह सौ कांस्टेबल, हेड कांस्टेबल व एचसीपी की जानकारी तैयार कर ली गई है।
विज्ञापन
मैथा में विकास की जमीनों का ब्योरा मांगा
कानपुर देहात। कुख्यात विकास दुबे प्रकरण मेें एसआईटी सभी बिंदुओं की बारीकी से पड़ताल कर रही है। विकास के मुठभेड़ में मारे जाने के बाद अब बिकरू गांव में भी लोग खुलकर सामने आ रहे हैं। जुल्म की दास्तां बयां कर रहे हैं। ऐसे मेें एसआईटी ने मैथा तहसील से विकास दुबे की जमीनों का ब्योरा मांगा है। ताकि पता चल सके कि उसने किन-किन जमीनों पर अवैध कब्जा किया, किसकी जमीन खरीदी या हथियाई है। पूर्व में बिकरू गांव भी जिले में शामिल था, लेकिन बाद में उसे कानपुर नगर में जोड़ दिया गया । फिलहाल पुराने अभिलेख खंगाले जाने लगे हैं।
विज्ञापन