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चित्रकूट: व्हाइट सफारी में एक और बाघ की मौत, एक सफेद समेत दो बाघ भी गंभीर बीमार
Fri, 01 Jan 2021 09:26 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चित्रकूट
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चित्रकूट
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Fri, 01 Jan 2021 09:26 PM IST
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : amar ujala
चित्रकूट में मानिकपुर की सीमा से सटे मप्र के रीवा जिले की मुकुंदपुर व्हाइट सफारी में गुरुवार को एक और बाघ की मौत हो गई। नकुल नामक बाघ बीमार चल रहा था। साथ ही सफारी में दो और बाघ बीमार हैं।
सफारी के प्रबंधक संजय राय खेरे ने बताया कि नकुल नाम का बाघ ने समय पर इलाज न मिलने के कारण 31 दिसंबर को दम तोड़ दिया। मामले की जानकारी मिलते ही वन विभाग का अमला मौके पर पहुंच गया है। सभी बाघों के स्वास्थ्य की जांच कराई गई है। दो और बाघों की हालत गंभीर बताई जा रही है। सफारी के डॉक्टर राजेश तोमर 15 दिनों से नहीं आए हैं। इसलिए अन्य डॉक्टरों से बाघों का इलाज कराया जा रहा है।
2020 में छह बाघों और तीन शावकों की हुई मौत
गुजरे साल 2020 में जिले की सीमा क्षेत्र में छह बाघों और तीन शावकों की मौत हो चुकी है। 23 दिसंबर को गोपी नामक व्हाइट बाघ की इसी क्षेत्र में मौत हुई थी। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों की लापरवाही से बाघों की मौत हो रही है।
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सफारी के प्रबंधक संजय राय खेरे ने बताया कि नकुल नाम का बाघ ने समय पर इलाज न मिलने के कारण 31 दिसंबर को दम तोड़ दिया। मामले की जानकारी मिलते ही वन विभाग का अमला मौके पर पहुंच गया है। सभी बाघों के स्वास्थ्य की जांच कराई गई है। दो और बाघों की हालत गंभीर बताई जा रही है। सफारी के डॉक्टर राजेश तोमर 15 दिनों से नहीं आए हैं। इसलिए अन्य डॉक्टरों से बाघों का इलाज कराया जा रहा है।
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2020 में छह बाघों और तीन शावकों की हुई मौत
गुजरे साल 2020 में जिले की सीमा क्षेत्र में छह बाघों और तीन शावकों की मौत हो चुकी है। 23 दिसंबर को गोपी नामक व्हाइट बाघ की इसी क्षेत्र में मौत हुई थी। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों की लापरवाही से बाघों की मौत हो रही है।
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