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कानपुर: रेमडेसिविर इंजेक्शन इश्यू कराने में हुई थी गड़बड़ी, कमेटी ने हैलट में की जांच, ये किया गया बदलाव
Sat, 19 Jun 2021 10:18 AM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Sat, 19 Jun 2021 10:18 AM IST
सार
मौत के बाद भी रेमडेसिविर इंजेक्शन आवंटित कराने के मामले में कमेटी ने दस्तावेजों की जांच पड़ताल की। मामले में सिस्टर इंचार्ज और फार्मेसिस्ट को निलंबित किया गया है। नौ स्टाफ से स्पष्टीकरण मांगा गया है।
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रेमडेसिविर
- फोटो : social media
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विस्तार
कानपुर में सीडीओ के नेतृत्व में शुक्रवार को कमेटी ने हैलट में मौत के बाद भी रेमडेसिविर इंजेक्शन आवंटित कराने के मामले की जांच की। शुरुआती जांच में उन्होंने गड़बड़ी होने की पुष्टि की। प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक से कार्रवाई रिपोर्ट ली। प्राचार्य से भी इन इंजेक्शनों के आवंटन से लेकर मरीजों को लगाने तक की प्रक्रिया से लेकर इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों, कर्मियों के नाम मांगे हैं।
एक-दो दिन में जांच पूरी करने के संकेत दिए। सीडीओ डॉ. महेंद्र सिंह के नेतृत्व में जांच कमेटी गठित की गई है। कमेटी ने दस्तावेजों की जांच पड़ताल की। अस्पताल की प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डॉ. ज्योति सक्सेना ने उन्हें अब तक विभागीय स्तर पर की गई कार्रवाई की जानकारी दी।
बताया कि इस मामले में सिस्टर इंचार्ज और फार्मेसिस्ट को निलंबित किया गया है। नौ स्टाफ से स्पष्टीकरण मांगा गया है। न्यूरो अधीक्षक और सह अधीक्षक को भी नोटिस दी गई है। सीडीओ ने उनसे पूछा कि कोविड काल में महत्वपूर्ण बताए गए इस इंजेक्शन के आवंटन से लेकर एंट्री तक में कहां, किस तरह गड़बड़ी हुई तो वह सही जवाब नहीं दे पाईं।
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सीडीओ ने बताया कि मेडिकल कालेज प्राचार्य से पूछा है कि ड्रग इश्यू करने वाले कौन - कौन अधिकारी थे? आवंटन की क्या प्रक्रिया थी? इंटरनल जांच रिपोर्ट मिली है। अब तक की जांच से पता चला है कि इस इंजेक्शन के आवंटन में प्रक्रिया ढंग से नहीं अपनाई गई। रजिस्टर में इसकी रिसीविंग नहीं थी। बताया गया कि फोन पर ही रिसीविंग हो जाती थी। नर्सिंग सुप्रीनटेंडेंट के हस्ताक्षर के बिना दवा इश्यू नहीं होनी चाहिए थी।
हैलट में फार्मेसिस्टों को इधर से उधर किया
इस मामले के बाद शुक्रवार को हैलट की प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डॉ. ज्योति सक्सेना ने सभी फार्मेसिस्टों के पटल परिवर्तित कर दिए। उधर-उधर किए गए फार्मेसिस्टों को तुरंत कार्यभार संभालने और ठीक से काम करने के निर्देश दिए।
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एक-दो दिन में जांच पूरी करने के संकेत दिए। सीडीओ डॉ. महेंद्र सिंह के नेतृत्व में जांच कमेटी गठित की गई है। कमेटी ने दस्तावेजों की जांच पड़ताल की। अस्पताल की प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डॉ. ज्योति सक्सेना ने उन्हें अब तक विभागीय स्तर पर की गई कार्रवाई की जानकारी दी।
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बताया कि इस मामले में सिस्टर इंचार्ज और फार्मेसिस्ट को निलंबित किया गया है। नौ स्टाफ से स्पष्टीकरण मांगा गया है। न्यूरो अधीक्षक और सह अधीक्षक को भी नोटिस दी गई है। सीडीओ ने उनसे पूछा कि कोविड काल में महत्वपूर्ण बताए गए इस इंजेक्शन के आवंटन से लेकर एंट्री तक में कहां, किस तरह गड़बड़ी हुई तो वह सही जवाब नहीं दे पाईं।
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सीडीओ ने बताया कि मेडिकल कालेज प्राचार्य से पूछा है कि ड्रग इश्यू करने वाले कौन - कौन अधिकारी थे? आवंटन की क्या प्रक्रिया थी? इंटरनल जांच रिपोर्ट मिली है। अब तक की जांच से पता चला है कि इस इंजेक्शन के आवंटन में प्रक्रिया ढंग से नहीं अपनाई गई। रजिस्टर में इसकी रिसीविंग नहीं थी। बताया गया कि फोन पर ही रिसीविंग हो जाती थी। नर्सिंग सुप्रीनटेंडेंट के हस्ताक्षर के बिना दवा इश्यू नहीं होनी चाहिए थी।
हैलट में फार्मेसिस्टों को इधर से उधर किया
इस मामले के बाद शुक्रवार को हैलट की प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डॉ. ज्योति सक्सेना ने सभी फार्मेसिस्टों के पटल परिवर्तित कर दिए। उधर-उधर किए गए फार्मेसिस्टों को तुरंत कार्यभार संभालने और ठीक से काम करने के निर्देश दिए।