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धन के लिए दनादन

Sat, 06 Feb 2016 02:01 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ कानपुर
अमर उजाला ब्यूरो/ कानपुर Updated Sat, 06 Feb 2016 02:01 AM IST
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 block pramukh is the first choice

ब्लॉक प्रमुख चुनाव जीतने के लिए जिस तरह खुलेआम हिंसा-अराजकता की जा रही है, उससे सवाल उठता है कि आखिर इस चुनाव में ऐसा क्या है जिसके लिए जान की परवाह नहीं। ये वजह है पैसा। दरअसल, ब्लॉक प्रमुख अपने पांच साल के कार्यकाल में करोड़पति बन जाते हैं।

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इसके अलावा पुलिस-प्रशासन पर दबदबा रहता है। जनता से सीधे जुड़ने वाला जनप्रतिनिधि ब्लॉक प्रमुख ही होता है, इसलिए विधायक से लेकर सांसद तक की वह पहली पसंद होता है। प्रदेश सरकार की जितनी भी योजनाएं ग्रामीण स्तर पर संचालित होती हैं, वे सभी ब्लॉकों के जरिए ही पूरी कराई जाती हैं।
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पांच साल में एक ब्लॉक में कम से कम सात करोड़ रुपये का बजट होता है। सबको पता है कि बजट की बंदरबांट होती है, जिसमें ब्लॉक प्रमुख के हिस्से में भी बड़ा हिस्सा आता है। माना जाता है कि एक ब्लॉक प्रमुख यदि वह खुद भी ठेकेदारी करता है तो, उसके हिस्से में महीने की 25 से 30 लाख की कमाई आती है।
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आर्थिक पक्ष के बाद राजनीतिक करियर से जुड़े मसले की वजह से भी इस पद को पाने के लिए मारा मारी होती है। एक विधानसभा में दो से ढाई ब्लॉक का क्षेत्र होता है। जिससे जुड़े प्रधान, बीडीसी सदस्य सीधे ब्लॉक प्रमुख से जुड़ा होता है। साथ ही योजनाओं का लाभ पाने वाली ग्रामीण जनता के बीच भी ब्लॉक प्रमुख की सीधी बात होती रहती है।

इस लिहाज से हर विधायक और सांसद ब्लॉक प्रमुख को अपना प्रतिनिधि बनाकर रखना चाहता है। उधर, पत्नी को नामांकन दाखिल न करने देने और हमले का शिकार हुए सपा के बब्बन शर्मा देर शाम माती स्थित एसपी आवास पहुंचे। उन्होंने पूरे दिन हुए बवाल और पुलिस उत्पीड़न की जानकारी एसपी सभा राज को दी।


पुलिस अधीक्षक सभा राज बवाल की बात को शुरुआत से नकारते रहे। एसपी से मिलने के बाद सपा नेता ने कहा कि प्रदेश में अब कानून व्यवस्था नहीं रह गई है। लोकतांत्रिक तरीके से लोगों को नामांकन दाखिल नहीं करने दिया जा रहा है।  अफसर आचार संहिता का खुला उल्लंघन करवा रहे हैं।

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