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वसंत पंचमी: ये पूजन विधि बदलेगी जीवन की दिशा और दशा, ये गलतियां दुर्भाग्य को देंगी न्यौता
Sun, 10 Feb 2019 03:11 PM IST
शिखा पांडेय
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Sun, 10 Feb 2019 03:11 PM IST
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वसंत पंचमी (basant panchami) आज धूमधाम से मनाई जाएगी। बसंत उत्सव हर समाज अपने तरीके से मनाता है। कोई पूजा करता है तो कोई भोजन करवाता है। मान्यता है कि विद्या और संगीत की देवी माता सरस्वती का जन्म वसंत पंचमी के दिन हुआ था। इस दिन मां सरस्वती की पूजा-अर्चना की जाती है।
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माता सरस्वती को ज्ञान, संगीत, कला, विज्ञान और शिल्प कला की देवी माना जाता है। इस दिन को श्रीपंचमी और सरस्वती पूजा के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन गंगा स्नान का विशेष महत्व है। स्नान के बाद दानपुण्य किया जाता है। कुंभ में वसंत पंचमी का स्नान होगा। इस कारण इसका विशेष महत्व है।
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ज्योतिषीय महत्व
ज्योतिषाचार्य मनोज कुमार द्विवेदी ने बताया कि वसंत पंचमी का दिन सभी शुभ कार्यों के लिए शुभ है। यह दिन अबूझ मुहूर्त होता है और नवीन कार्यों की शुरुआत के लिए उत्तम माना जाता है। इस दिन पूजा का उपयुक्त समय दोपहर का माना जाता है।
ज्योतिषाचार्य मनोज कुमार द्विवेदी ने बताया कि वसंत पंचमी का दिन सभी शुभ कार्यों के लिए शुभ है। यह दिन अबूझ मुहूर्त होता है और नवीन कार्यों की शुरुआत के लिए उत्तम माना जाता है। इस दिन पूजा का उपयुक्त समय दोपहर का माना जाता है।
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ऐसे करें वसंत पंचमी की पूजा
सुबह स्नानादि कर पीले वस्त्र धारण करें। मां सरस्वती की प्रतिमा को सामने रखें। सबसे पहले कलश स्थापित कर भगवान गणेश व नवग्रह की विधिवत पूजा करें, फिर मां सरस्वती की पूजा करें। आचमन व स्नान कराएं, फिर माता का श्रृंगार कर उन्हें श्वेत वस्त्र धारण करें। प्रसाद के रूप में खीर अथवा दूध से बनी मिठाई अर्पित करें। श्वेत फूल माता को अर्पण करें। संगीत से जुड़े लोग अपने माथे पर तिलक लगाकर मां की आराधना कर सकते हैं व मां को बांसुरी भेंट करें।
सुबह स्नानादि कर पीले वस्त्र धारण करें। मां सरस्वती की प्रतिमा को सामने रखें। सबसे पहले कलश स्थापित कर भगवान गणेश व नवग्रह की विधिवत पूजा करें, फिर मां सरस्वती की पूजा करें। आचमन व स्नान कराएं, फिर माता का श्रृंगार कर उन्हें श्वेत वस्त्र धारण करें। प्रसाद के रूप में खीर अथवा दूध से बनी मिठाई अर्पित करें। श्वेत फूल माता को अर्पण करें। संगीत से जुड़े लोग अपने माथे पर तिलक लगाकर मां की आराधना कर सकते हैं व मां को बांसुरी भेंट करें।
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शुभ मुहूर्त
सुबह 6:52 से दोपहर 12:23 बजे तक
पंचमी तिथि प्रारंभ-शुक्ल पंचमी दोपहर 12:25 बजे से शुरू
पंचमी तिथि समाप्त-10 फरवरी को दोपहर 2:08 बजे तक
सुबह 6:52 से दोपहर 12:23 बजे तक
पंचमी तिथि प्रारंभ-शुक्ल पंचमी दोपहर 12:25 बजे से शुरू
पंचमी तिथि समाप्त-10 फरवरी को दोपहर 2:08 बजे तक