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अटल की गंगा तीरे कहानी
ब्यूरो, अमर उजाला कानपुर
Updated Thu, 25 Dec 2014 04:06 AM IST
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भारत रत्न पाने वाले पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने वर्ष 1946, 1947 में डीएवी पीजी कॉलेज में एडमिशन लिया और टॉपर बनकर निकले थे। डीएवी से ही उन्होंने एलएलबी का रिफ्रेशर कोर्स किया।
भारत रत्न पाने वाले पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने वर्ष 1946, 1947 में डीएवी पीजी कॉलेज में एडमिशन लिया और टॉपर बनकर निकले थे। डीएवी से ही उन्होंने एलएलबी का रिफ्रेशर कोर्स किया।
खास बात यह रही कि अटल और उनके पिता कृष्ण बिहारी वाजपेयी ने एलएलबी के रिफ्रेशर कोर्स की कक्षाएं एक साथ पढ़ी थीं। पिता-बेटे डीएवी हॉस्टल के 104 नंबर कमरे में सादगी से रहते और खुद खाना बनाकर खाते थे।
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अपने कपड़े खुद धोते थे। डीएवी में पढ़ाई के दौरान ही अटल जी आरएसएस के संपर्क में आए और राजनीति से जुड़ गए। पांचजन्य में उनका लेख भी प्रकाशित होता था।
बुधवार को डीएवी पीजी कॉलेज में जश्न का माहौल रहा। प्रिंसिपल डॉ. रेखा शर्मा की मौजूदगी में राजनीति विज्ञान की विभागाध्यक्ष डॉ. दीपशिखा चतुर्वेदी ने मिठाई बांटी। विभाग में लगी उस मेरिट लिस्ट को सबको दिखाया, जिस पर अटल बिहारी वाजपेयी का नाम लिखा हुआ है।
विभागाध्यक्ष ने बताया कि वर्ष 1947 में एमए राजनीति विज्ञान की पढ़ाई करने वाले अटल जी ने कॉलेज टॉप किया था। तब डीएवी कॉलेज आगरा यूनिवर्सिटी से संबद्ध था। अटल जी का नाम आगरा यूनिवर्सिटी की मेरिट लिस्ट में भी था।
उनकी यूनिवर्सिटी रैंक दो थी। पहले स्थान पर अटल जी के ही मित्र त्रिलोकनाथ श्रीवास्तव का नाम है। तीसरी रैंक गिरिराज किशोर गहराना और चौथी रैंक ऊषा गुजराल की थी। राजनीति विज्ञान विभाग में आज भी अटल बिहारी वाजपेयी की यादें ताजा हैं।
यहां मेरिट लिस्ट के अलावा फोटोग्राफ लगाकर अटल जी को डीएवी का पूर्व स्टूडेंट बताया गया है। जब अटल जी ने एडमिशन लिया था, तब राजनीति विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. शांति नारायण वर्मा थे।
प्रिंसिपल डॉ. केपी भटनागर थे, जिनके पास आगरा यूनिवर्सिटी का कार्यभार भी था। अटल जी के मित्र रहे डॉ. राम मोहन सिंह बताते हैं कि अटल जी और उनके पिता जी कृृष्ण बिहारी बाजपेयी ने एक साथ एलएलबी का रिफ्रेशर कोर्स किया था।
बाप-बेटे एक साथ क्लास लेने में शर्माते थे। इसी वजह से जिस क्लास में अटल जी जाते थे, उसमें उनके पिता नहीं जाते थे। डीएवी के डॉ. कपिल बाजपेयी, डॉ. पुष्कर पांडेय, डॉ. मनोरमा गुप्ता, डॉ. मंजू श्रीवास्तव, डॉ. विजय प्रताप सिंह, डॉ. राजश्री चतुर्वेदी, डॉ. नलिनी सचना, डॉ. अर्चना गुप्ता, डॉ. मनोज मिश्र और डॉ. एके सिंह आदि ने मुंह मीठा किया।
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भारत रत्न पाने वाले पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने वर्ष 1946, 1947 में डीएवी पीजी कॉलेज में एडमिशन लिया और टॉपर बनकर निकले थे। डीएवी से ही उन्होंने एलएलबी का रिफ्रेशर कोर्स किया।
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खास बात यह रही कि अटल और उनके पिता कृष्ण बिहारी वाजपेयी ने एलएलबी के रिफ्रेशर कोर्स की कक्षाएं एक साथ पढ़ी थीं। पिता-बेटे डीएवी हॉस्टल के 104 नंबर कमरे में सादगी से रहते और खुद खाना बनाकर खाते थे।
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अपने कपड़े खुद धोते थे। डीएवी में पढ़ाई के दौरान ही अटल जी आरएसएस के संपर्क में आए और राजनीति से जुड़ गए। पांचजन्य में उनका लेख भी प्रकाशित होता था।
बुधवार को डीएवी पीजी कॉलेज में जश्न का माहौल रहा। प्रिंसिपल डॉ. रेखा शर्मा की मौजूदगी में राजनीति विज्ञान की विभागाध्यक्ष डॉ. दीपशिखा चतुर्वेदी ने मिठाई बांटी। विभाग में लगी उस मेरिट लिस्ट को सबको दिखाया, जिस पर अटल बिहारी वाजपेयी का नाम लिखा हुआ है।
विभागाध्यक्ष ने बताया कि वर्ष 1947 में एमए राजनीति विज्ञान की पढ़ाई करने वाले अटल जी ने कॉलेज टॉप किया था। तब डीएवी कॉलेज आगरा यूनिवर्सिटी से संबद्ध था। अटल जी का नाम आगरा यूनिवर्सिटी की मेरिट लिस्ट में भी था।
उनकी यूनिवर्सिटी रैंक दो थी। पहले स्थान पर अटल जी के ही मित्र त्रिलोकनाथ श्रीवास्तव का नाम है। तीसरी रैंक गिरिराज किशोर गहराना और चौथी रैंक ऊषा गुजराल की थी। राजनीति विज्ञान विभाग में आज भी अटल बिहारी वाजपेयी की यादें ताजा हैं।
यहां मेरिट लिस्ट के अलावा फोटोग्राफ लगाकर अटल जी को डीएवी का पूर्व स्टूडेंट बताया गया है। जब अटल जी ने एडमिशन लिया था, तब राजनीति विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. शांति नारायण वर्मा थे।
प्रिंसिपल डॉ. केपी भटनागर थे, जिनके पास आगरा यूनिवर्सिटी का कार्यभार भी था। अटल जी के मित्र रहे डॉ. राम मोहन सिंह बताते हैं कि अटल जी और उनके पिता जी कृृष्ण बिहारी बाजपेयी ने एक साथ एलएलबी का रिफ्रेशर कोर्स किया था।
बाप-बेटे एक साथ क्लास लेने में शर्माते थे। इसी वजह से जिस क्लास में अटल जी जाते थे, उसमें उनके पिता नहीं जाते थे। डीएवी के डॉ. कपिल बाजपेयी, डॉ. पुष्कर पांडेय, डॉ. मनोरमा गुप्ता, डॉ. मंजू श्रीवास्तव, डॉ. विजय प्रताप सिंह, डॉ. राजश्री चतुर्वेदी, डॉ. नलिनी सचना, डॉ. अर्चना गुप्ता, डॉ. मनोज मिश्र और डॉ. एके सिंह आदि ने मुंह मीठा किया।