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अधिवक्ता हत्याकांड: दामन पर लगा दाग जल्द साफ करने में जुटी भाजपा, आनन-फानन में कराया समर्पण
Sun, 19 Dec 2021 12:43 AM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Sun, 19 Dec 2021 12:43 AM IST
सार
शताब्दी गेट के पास ही इस कांड के तीन आरोपियों के साथ बार एसोसिएशन का चुनाव लड़ रहे एक प्रत्याशी की फोटो भी चर्चा का विषय रही। वकीलों के चुनाव में अपराधियों की पैठ और अराजकतत्वों के सत्तासीन पार्टी से जुड़ाव के मामले को घटनाओं का राजनीतिकरण करके चुनावी लाभ कमाने वाले विधानसभा चुनाव के लिए एक अच्छा मौका मान रहे हैं।
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अधिवक्ता हत्याकांड
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
कानपुर में बार एसोसिएशन चुनाव में अधिवक्ता की हत्या का राजनीतिकरण करने की भी कोशिश शुरू हो गई है। मारे गए अधिवक्ता गौतम दत्त, जहां भाजपा विधि प्रकोष्ठ के मंडल सहसंयोजक थे, वहीं आरोपी तरु अग्रवाल भाजयुमो का जिला कोषाध्यक्ष है।
प्रदेश में चुनावी बयार के बीच हुई यह घटना और सत्ताधारी पार्टी से दोनों का जुड़ाव सियासी गलियारों में हलचल मचाने वाला है। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता गोटें बिछाकर आरोपी का समर्पण कराने के बाद मामले का पटाक्षेप कराने में जुटे हैं। वहीं, विपक्षी दल मामले को तूल देकर सियासी लाभ लेने की फिराक में हैं।
साफसुथरी छवि की दुहाई देने वाली भाजपा में ऐसे युवाओं को पद मिल गया है, जिन्हें अपराधी भले न माना जाए, लेकिन अराजक और उपद्रवी तत्वों के साथ उनकी बैठक जरूर है। हत्या के बाद कचहरी में पसरे सन्नाटे के बीच वकीलों के साथ ही नेताओं में भी यह चर्चा आम रही।
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इसके पहले भी नौबस्ता में एक भाजपा पदाधिकारी की जन्मदिन पार्टी में अपराधी को पकड़ने गई पुलिस से हुई झड़प और हिरासत से आरोपी को भगा देने के मामले में भी भाजपा काफी फजीहत झेल चुकी है। इस मामले में भी आरोपी अधिवक्ता भाजपा से जुड़े थे, जिन्हें जेल जाना पड़ा था।
शताब्दी गेट के पास ही इस कांड के तीन आरोपियों के साथ बार एसोसिएशन का चुनाव लड़ रहे एक प्रत्याशी की फोटो भी चर्चा का विषय रही। वकीलों के चुनाव में अपराधियों की पैठ और अराजकतत्वों के सत्तासीन पार्टी से जुड़ाव के मामले को घटनाओं का राजनीतिकरण करके चुनावी लाभ कमाने वाले विधानसभा चुनाव के लिए एक अच्छा मौका मान रहे हैं।
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प्रदेश में चुनावी बयार के बीच हुई यह घटना और सत्ताधारी पार्टी से दोनों का जुड़ाव सियासी गलियारों में हलचल मचाने वाला है। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता गोटें बिछाकर आरोपी का समर्पण कराने के बाद मामले का पटाक्षेप कराने में जुटे हैं। वहीं, विपक्षी दल मामले को तूल देकर सियासी लाभ लेने की फिराक में हैं।
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साफसुथरी छवि की दुहाई देने वाली भाजपा में ऐसे युवाओं को पद मिल गया है, जिन्हें अपराधी भले न माना जाए, लेकिन अराजक और उपद्रवी तत्वों के साथ उनकी बैठक जरूर है। हत्या के बाद कचहरी में पसरे सन्नाटे के बीच वकीलों के साथ ही नेताओं में भी यह चर्चा आम रही।
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इसके पहले भी नौबस्ता में एक भाजपा पदाधिकारी की जन्मदिन पार्टी में अपराधी को पकड़ने गई पुलिस से हुई झड़प और हिरासत से आरोपी को भगा देने के मामले में भी भाजपा काफी फजीहत झेल चुकी है। इस मामले में भी आरोपी अधिवक्ता भाजपा से जुड़े थे, जिन्हें जेल जाना पड़ा था।
शताब्दी गेट के पास ही इस कांड के तीन आरोपियों के साथ बार एसोसिएशन का चुनाव लड़ रहे एक प्रत्याशी की फोटो भी चर्चा का विषय रही। वकीलों के चुनाव में अपराधियों की पैठ और अराजकतत्वों के सत्तासीन पार्टी से जुड़ाव के मामले को घटनाओं का राजनीतिकरण करके चुनावी लाभ कमाने वाले विधानसभा चुनाव के लिए एक अच्छा मौका मान रहे हैं।