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बसपा में 'कद्दावरों पर कार्रवाई' की घड़ी, मायावती ‘एक्शन’ में

Sat, 22 Apr 2017 11:28 PM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर Updated Sat, 22 Apr 2017 11:28 PM IST
सार

करारी पराजय के बाद उलटफेर का खेल
नसीमुद्दीन लखनऊ मंडल और एमपी के प्रभारी
दो जोन बनाए, मुनकाद और राजभर को कमान

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action on bsp big leader
बसपा सुप्रीमो मायावती (फाइल फोटो)

विस्तार

विधान सभा चुनाव में करारी पराजय के बाद बसपा मुखिया मायावती ‘एक्शन’ में हैं। इसकी शुरुआत अपने सलाहकारों से की है। कुछ का कद बढ़ाया है तो कुछ कद्दावरों के दायरे सीमित कर दिए हैं। उन पुराने पुरोधाओं की ‘घर वापसी’ भी शुरू कर दी है जो पिछले कुछ वर्षों में पार्टी से जुदा हो गए थे। बसपा ने पूरे उत्तर प्रदेश को दो जोन में बांट कर अलग-अलग प्रभारी तैनात किए हैं।
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चुनाव नतीजों के लगभग एक माह बाद बसपा में उलटफेर शुरू हो गया है। बसपा में अपना खास मुकाम बना चुके नसीमुद्दीन सिद्दीकी भी इससे अछूते नहीं रहे। पार्टी मुखिया मायावती ने उत्तर प्रदेश में उनका दायरा सीमित कर दिया है। अब वह यहां सिर्फ लखनऊ मंडल के प्रभारी रहेंगे। अलबत्ता उन्हें पड़ोसी बड़े सूबे मध्य प्रदेश का भी प्रभारी बना दिया है। उनका राष्ट्रीय महासचिव का पद बरकरार रहेगा। सपा सरकार में पूरे समय वह विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष रहे। बांदा के ही बसपा विधायक और पार्टी के वरिष्ठ नेता जीसी दिनकर भी कई महीनों तक विधानसभा में नेता विरोधी दल रहे। अबकी श्री दिनकर अपनी नरैनी सीट से चुनाव नहीं जीत सके।
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माना जा रहा है कि विधान सभा चुनाव में अपने चंद गिने-चुने दिग्गज सलाहकारों की राय से मायावती ने टिकट दिए थे। लेकिन नतीजे बेहद निराशाजनक रहे। बसपा को महज 14 सीटें हाथ लगीं। इस बड़ी पराजय से पार्टी मुखिया मायावती का परेशान होना लाजमी है। ऐसे में उन्होंने इन्हीं सलाहकारों से ही पार्टी की ‘ओवर हार्लिंग’ शुरू की है।
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पार्टी के कई कोआर्डिनेटरों के क्षेत्रों को भी बदला गया है। इनमें कुछ का कद बढ़ा है और कुछ हाशिए पर आए हैं। पार्टी के सांसद (राज्यसभा) मुनकाद अली का कद बढ़ाते हुए उन्हें पूर्वी उत्तर प्रदेश का जिम्मा सौंपा गया है। इसमें 9 मंडल शामिल हैं। शेष अन्य मंडलों का दायित्व बसपा प्रदेशाध्यक्ष रामअचल राजभर संभालेंगे। सूत्रों के मुताबिक जल्द ही कई और वरिष्ठ नेताओं को महत्वपूर्ण काम दिए जा सकते हैं। मंडल और जिला स्तर पर भी उलटफेर के आसार हैं।


पुरानों की घर वापसी, दद्दू को एमपी में लगाया
बुरे दिनों में पुराने साथी ही याद आते हैं। यह कहावत बसपा में लागू हो गई है। बीते सालों में पार्टी से जुदा हुए पुराने नेताओं की ‘घर वापसी’ होने लगी है। पार्टी के संस्थापक नेताओं में शामिल पूर्व मंत्री दद्दू प्रसाद इसकी बानगी हैं। हाल ही में उन्हें 26 माह बाद बसपा में वापस लिए जाने के बाद उन्हें मध्य प्रदेश के दो जनपदों छतरपुर और टीकमगढ़ का प्रभारी नियुक्त किया गया है। दद्दू प्रसाद ने वहां डेरा डालकर अपना काम शुरू कर दिया है। वह पार्टी के गठन के समय से सक्रिय रहे हैं। कई राज्यों और मंडलों को कोआर्डिनेटर व प्रभारी रहे। बसपा सरकार में काबीना मंत्री रहे। 28 जनवरी 2015 को बसपा सुप्रीमो ने उन्हें अनुशासनहीनता के आरोप में पार्टी से निकाल दिया था। दद्दू प्रसाद ने बहुजन मुक्ति पार्टी गठित करके उसी के बैनर तले राजनीति करते रहे। विधान सभा चुनाव में करारी शिकस्त के बाद इसी माह के पहले हफ्ते में दद्दू प्रसाद को पुन: बसपा में शामिल किया गया है। उन्हें दिल्ली में पार्टी मुखिया मायावती ने शामिल किया। दद्दू प्रसाद भी बांदा जनपद के बाशिंदे हैं। नसीमुद्दीन सिद्दीकी और जीसी दिनकर भी इसी जिले के हैं।
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