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बाइकों की भिडंत में मोटर मैकेनिक की मौत
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रसूलाबाद (कानपुर देहात)। कस्बे के तरौली गांव के पास विषधन रोड पर शुक्रवार को दो बाइकों में भिड़ंत हो गई। हादसे में बाइक सवार मां-बेटा व पिता पुत्र गंभीर रूप से घायल हो गए। घायलों को अस्पताल ले जाया गया। नैला गांव के युवक को डॉक्टर ने मृत घोषित कर दिया। वहीं अन्य तीन घायलों को रेफर कर दिया गया। बाइक सवार हेलमेट नहीं लगाए थे।
रसूलाबाद कस्बे के नैला गांव में रहने वाले संतोष सिंह (40) शुक्रवार को पिता दिवारी लाल (65) की दवा लेने बाइक से लालू गांव जा रहे थे। अलीपुर रामहार गांव चंद्रभान (38) मां जावित्री देवी (55) को लेकर बाइक से दवा लेने लालू गांव जा रहा था। तरौली गांव स्थित पानी की टंकी के पास दोनों की बाइकें आपस में टकरा गईं। हादसे में बाइक सवार महिला समेत चार लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। पुलिस ने घायलों को रसूलाबाद सीएचसी में भर्ती कराया।
वहां डॉ. लोकेश शर्मा ने बाइक सवार संतोष को मृत घोषित कर दिया। जबकि, अन्य तीनों घायलों का प्राथमिक उपचार के बाद हैलट रेफर कर दिया। हादसे में संतोष की मौत के बाद पत्नी सुमन देवी, बेटा सौरभ सिंह, बेटी गौरवी, भाई बलराम, बलवीर आदि का रो-रो कर बुरा हाल है। प्रभारी निरीक्षक शशि भूषण मिश्रा ने बताया कि शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है। जांच कर कार्रवाई की जाएगी।
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बीस दिन पहले रोहतक से घर आया था संतोष
कानपुर देहात। नैला गांव के संतोष हरियाणा के रोहतक में मोटर मैकेनिक का काम करता था। खेत में खड़ी फसल की कटाई को लेकर बीस दिन पहले वह छुट्टी लेकर गांव आ गया। शुक्रवार को पिता के साथ दवा लेने लालू गांव जाने के दौरान हादसे में मौत हो गई। मौत के बाद परिजनों में कोहराम मच गया।
पिता को दवा दिलाकर आते हैं, तुम तैयार रहना
कानपुर देहात। नैला गांव के संतोष बीस दिन पहले ही रोहतक से गांव लौटा था। पत्नी ने कृपालपुर स्थित मायके जाने की बात कही। संतोष ने शुक्रवार को जाने का भरोसा दिया। सुबह पत्नी के कहने पर संतोष ने कहा कि हम पिता जी की दवा लेकर आते हैं। तुम तैयार रहना। किसे पता था कि संतोष अब घर अब नहीं लौटेगा। मौत की जानकारी के बाद परिजनों व ससुरालीजनों में कोहराम मच गया।
तीन घंटे तक तड़पते रहे घायल
रसूलाबाद। विषधन रोड पर तरौली गांव के पास हुए सड़क हादसे में घायल दिवारी लाल, अलीपुर रामहार के चंद्रभान व मां जावित्री देवी एंबुलेंस के न आने से करीब दो घंटे तड़पते रहे। घायलों को पुलिस ने गाड़ी से अस्पताल पहुंचाया। रेफर होने के एक घंटे बाद अस्पताल से एंबुलेंस नहीं मिली। समय पर एंबुलेंस व उपचार मिल जाता तो शायद संतोष की जान बच जाती। अधीक्षक डॉ. लोकेश शर्मा ने बताया कि एक एंबुलेंस एक माह पहले लखनऊ चली गई थी। दो एंबुलेंसों को कोविड में लगाया गया।
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रसूलाबाद कस्बे के नैला गांव में रहने वाले संतोष सिंह (40) शुक्रवार को पिता दिवारी लाल (65) की दवा लेने बाइक से लालू गांव जा रहे थे। अलीपुर रामहार गांव चंद्रभान (38) मां जावित्री देवी (55) को लेकर बाइक से दवा लेने लालू गांव जा रहा था। तरौली गांव स्थित पानी की टंकी के पास दोनों की बाइकें आपस में टकरा गईं। हादसे में बाइक सवार महिला समेत चार लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। पुलिस ने घायलों को रसूलाबाद सीएचसी में भर्ती कराया।
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वहां डॉ. लोकेश शर्मा ने बाइक सवार संतोष को मृत घोषित कर दिया। जबकि, अन्य तीनों घायलों का प्राथमिक उपचार के बाद हैलट रेफर कर दिया। हादसे में संतोष की मौत के बाद पत्नी सुमन देवी, बेटा सौरभ सिंह, बेटी गौरवी, भाई बलराम, बलवीर आदि का रो-रो कर बुरा हाल है। प्रभारी निरीक्षक शशि भूषण मिश्रा ने बताया कि शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है। जांच कर कार्रवाई की जाएगी।
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बीस दिन पहले रोहतक से घर आया था संतोष
कानपुर देहात। नैला गांव के संतोष हरियाणा के रोहतक में मोटर मैकेनिक का काम करता था। खेत में खड़ी फसल की कटाई को लेकर बीस दिन पहले वह छुट्टी लेकर गांव आ गया। शुक्रवार को पिता के साथ दवा लेने लालू गांव जाने के दौरान हादसे में मौत हो गई। मौत के बाद परिजनों में कोहराम मच गया।
पिता को दवा दिलाकर आते हैं, तुम तैयार रहना
कानपुर देहात। नैला गांव के संतोष बीस दिन पहले ही रोहतक से गांव लौटा था। पत्नी ने कृपालपुर स्थित मायके जाने की बात कही। संतोष ने शुक्रवार को जाने का भरोसा दिया। सुबह पत्नी के कहने पर संतोष ने कहा कि हम पिता जी की दवा लेकर आते हैं। तुम तैयार रहना। किसे पता था कि संतोष अब घर अब नहीं लौटेगा। मौत की जानकारी के बाद परिजनों व ससुरालीजनों में कोहराम मच गया।
तीन घंटे तक तड़पते रहे घायल
रसूलाबाद। विषधन रोड पर तरौली गांव के पास हुए सड़क हादसे में घायल दिवारी लाल, अलीपुर रामहार के चंद्रभान व मां जावित्री देवी एंबुलेंस के न आने से करीब दो घंटे तड़पते रहे। घायलों को पुलिस ने गाड़ी से अस्पताल पहुंचाया। रेफर होने के एक घंटे बाद अस्पताल से एंबुलेंस नहीं मिली। समय पर एंबुलेंस व उपचार मिल जाता तो शायद संतोष की जान बच जाती। अधीक्षक डॉ. लोकेश शर्मा ने बताया कि एक एंबुलेंस एक माह पहले लखनऊ चली गई थी। दो एंबुलेंसों को कोविड में लगाया गया।