{"_id":"38-204759","slug":"Kanpur-204759-38","type":"story","status":"publish","title_hn":"तीन सौ रु. महीना देकर करोड़ों की जमीन हड़पी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
तीन सौ रु. महीना देकर करोड़ों की जमीन हड़पी
Kanpur
Updated Thu, 06 Nov 2014 05:30 AM IST
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कानपुर। तीन सौ रुपये महीना ‘किराया’ देकर करोड़ों की जमीन पर कब्जा। अच्छे चाल-चलन के आधार पर रिहा हुए कैदियों के पुनर्वास के लिए निराला नगर में बनाए गए एशिया के इकलौते 20 बीघा जमीन में बने प्रोबेशन होम का यही हाल है। प्रोबेशन होम की जमीन पर बाहरी लोगों ने कब्जे करके फैक्ट्रियां बना ली हैं और शासन-प्रशासन को इसका पता ही नहीं। अवैध कब्जेदार फैक्ट्री मालिक जिला अपराध निरोधक कमेटी को कब्जे के बदले हर महीने तीन सौ रुपये भी देते हैं। सरकार की मंशा थी कि अच्छे-चालन वाले कैदियों को इस प्रोबेशन होम में बसाकर समाज की मुख्य धारा से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा लेकिन अब जो लोग यहां बस चुके हैं उनका उन कैदियों से कोई नाता नहीं जिनको यहां बसना था। यहां पर सिर्फ दो पूर्व कैदी डाकू जग्गा और फिल्म अभिनेता देवानंद के पीए रहे संतोष ही रह रहे हैं। अन्य 22 कैदी जिनको यहां बसना था, वे कहीं और रहने को मजबूर हैं। पेश है पूरे मामले पर सीनियर रिपोर्टर आशुतोष मिश्र और फोटो जर्नलिस्ट ओपी वाधवानी की रिपोर्ट।
उत्तर प्रदेश शासन द्वारा संरक्षित एवं जेल मैनुअल के अंतर्गत कार्यरत उत्तर प्रदेश अपराध निरोधक समिति की पहल पर निराला नगर में प्रोबेशन होम बसाया गया था। 25 मई 1969 को तत्कालीन डीएम शिवेंद्र सिंह सिद्धू ने जिला अपराध निरोधक कमेटी प्रोबेशन होम का लोकार्पण किया था। यहां पर करीब 20 बीघा जमीन बंदियों को पुनर्वासित करने के लिए दी गई थी। धीरे-धीरे इस जमीन पर बाहरी लोगों ने अवैध कब्जे कर लिए। तीन-चार कैदी जिन्हें यहां बसना था, वे अपने हिस्से की जमीन बाहरी लोगों को बेचकर चले गए। इसके बदले बिना रजिस्ट्री के उन्होंने एकमुश्त रकम ले ली। ‘अमर उजाला’ टीम बुधवार को प्रोबेशन होम पहुंची तो चारों तरफ अवैध फैक्ट्रियां ही दिखीं। करीब 80-85 फैक्ट्रियां चलती मिलीं। सभी के गेट बंद थे। गेट पर किसी फैक्ट्री मालिक का नाम नहीं लिखा था। एक-दो फैक्ट्रियों में खटखटा कर गेट खुलवा कर पूछा लेकिन किसी ने मालिक का नाम नहीं बताया। सभी फैक्ट्रियों में काम हो रहा था। कुछ जमीन पर दुकानें भी खुली मिलीं। इनमें बैठे लोगों से पूछा गया तो कोई जमीन का मालिकाना हक नहीं बता सका। सब बगले झांकने लगे।
333 साल कैद, तीन बार फांसी की सजा मिली थी
अब शराफत की जिंदगी जी रहा डाकू जग्गा
कानपुर। कभी चंबल का राजा कहा जाने वाला डाकू जग्गा उर्फ जय नारायण तिवारी प्रोबेशन होम से मिली जमीन पर मकान बनवाकर रहता है। डाकू जग्गा के खिलाफ राजस्थान, उत्तर प्रदेश और मध्यप्रदेश सरकार ने एक-एक लाख का इनाम घोषित कर रखा था। इन तीनों राज्यों में उसके खिलाफ लूट, डकैती और मर्डर के करीब चार सौ मुकदमे दर्ज थे। सरेंडर करने पर कई मुकदमों में कुल 333 साल कैद, तीन मुकदमों में अलग-अलग-फांसी और एक मुकदमे में आजीवन कैद की सजा सुनाई गई थी लेकिन अच्छे चाल-चलन के आधार पर उसे रिहा करके पुनर्वासित किया गया।
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इस डाकू पर फिल्म डाकू जग्गा, चंबल की कसम, चंबल के शेर, दिलरुबा तांगेवाली, डाकू हसीना बन चुकी है। 68 साल का डाकू जग्गा इस प्रोबेशन होम में अपने परिवार के साथ शराफत की जिंदगी जी रहा है। उसे इस प्रोबेशन होम में चार बिस्वा जमीन मिली थी। इसमें उसने अपना मकान बनवा रखा है। जग्गा के अनुसार 16 साल की उम्र में 1966 में जमीन के विवाद में इंदौर के तत्कालीन डीएम के चार भाइयों की हत्या करने वाले उसने अपराध की दुनिया में कदम रखा था। राजस्थान के करौली मंदिर पर पहले से घोषणा कर पचास किलो का घंटा चढ़ाने पहुंचा तो मुठभेड़ में सीओ प्रेम सिंह का मर्डर कर दिया था। तीन जून 1976 में मुख्यमंत्री एनडी तिवारी के सामने सरेंडर किया था। उस पर 156 लोगों के मर्डर के केस लगे थे। 11 जुलाई 1980 में फतेहगढ़ जेल में बंद जग्गा कानपुर पीरोड निवासी ममता से ब्याह रचाने आया तो करीब दस हजार की भीड़ जुट गई थी। बाद में अच्छे चाल-चलन पर उसकी फांसी और अन्य सजा माफ कर निराला नगर में पुनर्वास कराया गया। वह यहां पर 1983 से रह रहा है। अब जग्गा को उत्तर प्रदेश अपराध निरोधक समिति ने प्रोबेशन होम का अधीक्षक बना दिया है।
देवानंद के पीए रहे संतोष भी सुधरे
प्रोबेशन होम में शराफत की जिंदगी जी रहे 73 साल के संतोष आनंद चार साल तक फिल्म अभिनेता देव आनंद के पीए रहे हैं। 20 मई 1966 को मुंबई में संतोष आनंद ने अब्दुल करीम की हत्या कर दी थी। संतोष आनंद बताते हैं कि वह उनसे वसूली करना चाहता था। इसी चक्कर में उसने चाकू मार दिया था। उसे उम्र कैद की सजा सुनाई गई थी। उसका मुकदमा मुंबई से यूपी ट्रांसफर हो गया था। बाद में अच्छे चाल-चलन को लेकर नैनी जेल में रहने के दौरान उसने 1980 में इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका लगाई। इस पर 14 साल 26 दिन की सजा काटने के बाद उसकी रिहाई का आदेश हो गया था। प्रोबेशन होम में मिली जमीन पर कब्जा होने के बाद उसने दूसरी जमीन कब्जा ली। अब वह यहीं परिवार के साथ रह रहे हैं।
कोट्स-
पहले चेयरमैन को लेकर विवाद चल रहा था। मुझे कोर्ट के आदेश पर एक साल पहले ही चेयरमैन बनाया गया है। मैं अलीगढ़ में रहता हूं। चेयरमैन बनने के बाद मैंने सबसे पहले प्रोबेशन होम का निरीक्षण किया था। किदवई नगर पुलिस से अवैध कब्जों की शिकायत की थी। अब डीएम और एसएसपी से शिकायत कर अवैध कब्जे हटवाकर अच्छे चाल-चलन पर छूटे बंदियों को जमीन आंवटित की जाएगी।
-वेद प्रकाश अग्रवाल, चेयरमैन उत्तर प्रदेश अपराध निरोधक समिति
यहां लगी फैक्ट्रियों में ही अच्छे चाल-चलन पर छूटे 22 कैदी काम करते हैं। कुछ फैक्ट्री मालिक अनुदान के रूप में कमेटी को हर माह तीन सौ रुपये देते हैं। इस राशि से हर माह तीन-तीन सौ रुपये 22 कैदियों को दिए जाते हैं।
नवनीत शुक्ला, जिला सचिव, कमेटी, अपराध निरोधक कमेटी
उत्तर प्रदेश शासन द्वारा संरक्षित एवं जेल मैनुअल के अंतर्गत कार्यरत उत्तर प्रदेश अपराध निरोधक समिति की पहल पर निराला नगर में प्रोबेशन होम बसाया गया था। 25 मई 1969 को तत्कालीन डीएम शिवेंद्र सिंह सिद्धू ने जिला अपराध निरोधक कमेटी प्रोबेशन होम का लोकार्पण किया था। यहां पर करीब 20 बीघा जमीन बंदियों को पुनर्वासित करने के लिए दी गई थी। धीरे-धीरे इस जमीन पर बाहरी लोगों ने अवैध कब्जे कर लिए। तीन-चार कैदी जिन्हें यहां बसना था, वे अपने हिस्से की जमीन बाहरी लोगों को बेचकर चले गए। इसके बदले बिना रजिस्ट्री के उन्होंने एकमुश्त रकम ले ली। ‘अमर उजाला’ टीम बुधवार को प्रोबेशन होम पहुंची तो चारों तरफ अवैध फैक्ट्रियां ही दिखीं। करीब 80-85 फैक्ट्रियां चलती मिलीं। सभी के गेट बंद थे। गेट पर किसी फैक्ट्री मालिक का नाम नहीं लिखा था। एक-दो फैक्ट्रियों में खटखटा कर गेट खुलवा कर पूछा लेकिन किसी ने मालिक का नाम नहीं बताया। सभी फैक्ट्रियों में काम हो रहा था। कुछ जमीन पर दुकानें भी खुली मिलीं। इनमें बैठे लोगों से पूछा गया तो कोई जमीन का मालिकाना हक नहीं बता सका। सब बगले झांकने लगे।
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333 साल कैद, तीन बार फांसी की सजा मिली थी
अब शराफत की जिंदगी जी रहा डाकू जग्गा
कानपुर। कभी चंबल का राजा कहा जाने वाला डाकू जग्गा उर्फ जय नारायण तिवारी प्रोबेशन होम से मिली जमीन पर मकान बनवाकर रहता है। डाकू जग्गा के खिलाफ राजस्थान, उत्तर प्रदेश और मध्यप्रदेश सरकार ने एक-एक लाख का इनाम घोषित कर रखा था। इन तीनों राज्यों में उसके खिलाफ लूट, डकैती और मर्डर के करीब चार सौ मुकदमे दर्ज थे। सरेंडर करने पर कई मुकदमों में कुल 333 साल कैद, तीन मुकदमों में अलग-अलग-फांसी और एक मुकदमे में आजीवन कैद की सजा सुनाई गई थी लेकिन अच्छे चाल-चलन के आधार पर उसे रिहा करके पुनर्वासित किया गया।
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इस डाकू पर फिल्म डाकू जग्गा, चंबल की कसम, चंबल के शेर, दिलरुबा तांगेवाली, डाकू हसीना बन चुकी है। 68 साल का डाकू जग्गा इस प्रोबेशन होम में अपने परिवार के साथ शराफत की जिंदगी जी रहा है। उसे इस प्रोबेशन होम में चार बिस्वा जमीन मिली थी। इसमें उसने अपना मकान बनवा रखा है। जग्गा के अनुसार 16 साल की उम्र में 1966 में जमीन के विवाद में इंदौर के तत्कालीन डीएम के चार भाइयों की हत्या करने वाले उसने अपराध की दुनिया में कदम रखा था। राजस्थान के करौली मंदिर पर पहले से घोषणा कर पचास किलो का घंटा चढ़ाने पहुंचा तो मुठभेड़ में सीओ प्रेम सिंह का मर्डर कर दिया था। तीन जून 1976 में मुख्यमंत्री एनडी तिवारी के सामने सरेंडर किया था। उस पर 156 लोगों के मर्डर के केस लगे थे। 11 जुलाई 1980 में फतेहगढ़ जेल में बंद जग्गा कानपुर पीरोड निवासी ममता से ब्याह रचाने आया तो करीब दस हजार की भीड़ जुट गई थी। बाद में अच्छे चाल-चलन पर उसकी फांसी और अन्य सजा माफ कर निराला नगर में पुनर्वास कराया गया। वह यहां पर 1983 से रह रहा है। अब जग्गा को उत्तर प्रदेश अपराध निरोधक समिति ने प्रोबेशन होम का अधीक्षक बना दिया है।
देवानंद के पीए रहे संतोष भी सुधरे
प्रोबेशन होम में शराफत की जिंदगी जी रहे 73 साल के संतोष आनंद चार साल तक फिल्म अभिनेता देव आनंद के पीए रहे हैं। 20 मई 1966 को मुंबई में संतोष आनंद ने अब्दुल करीम की हत्या कर दी थी। संतोष आनंद बताते हैं कि वह उनसे वसूली करना चाहता था। इसी चक्कर में उसने चाकू मार दिया था। उसे उम्र कैद की सजा सुनाई गई थी। उसका मुकदमा मुंबई से यूपी ट्रांसफर हो गया था। बाद में अच्छे चाल-चलन को लेकर नैनी जेल में रहने के दौरान उसने 1980 में इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका लगाई। इस पर 14 साल 26 दिन की सजा काटने के बाद उसकी रिहाई का आदेश हो गया था। प्रोबेशन होम में मिली जमीन पर कब्जा होने के बाद उसने दूसरी जमीन कब्जा ली। अब वह यहीं परिवार के साथ रह रहे हैं।
कोट्स-
पहले चेयरमैन को लेकर विवाद चल रहा था। मुझे कोर्ट के आदेश पर एक साल पहले ही चेयरमैन बनाया गया है। मैं अलीगढ़ में रहता हूं। चेयरमैन बनने के बाद मैंने सबसे पहले प्रोबेशन होम का निरीक्षण किया था। किदवई नगर पुलिस से अवैध कब्जों की शिकायत की थी। अब डीएम और एसएसपी से शिकायत कर अवैध कब्जे हटवाकर अच्छे चाल-चलन पर छूटे बंदियों को जमीन आंवटित की जाएगी।
-वेद प्रकाश अग्रवाल, चेयरमैन उत्तर प्रदेश अपराध निरोधक समिति
यहां लगी फैक्ट्रियों में ही अच्छे चाल-चलन पर छूटे 22 कैदी काम करते हैं। कुछ फैक्ट्री मालिक अनुदान के रूप में कमेटी को हर माह तीन सौ रुपये देते हैं। इस राशि से हर माह तीन-तीन सौ रुपये 22 कैदियों को दिए जाते हैं।
नवनीत शुक्ला, जिला सचिव, कमेटी, अपराध निरोधक कमेटी