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घरेलू हिंसा और जमीन से जुड़े मामलों को लेकर थाने पहुंच रहीं महिलाएं
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जौनपुर। महिलाओं से जुड़े मामले इस समय थानों पर खूब पहुंच रहे हैं। इनमें ज्यादातर मामले पारिवारिक, घरेलू हिंसा और जमीन से जुडे होते हैं। जपनद के 27 थानों के आंकड़ों को देखे तो पिछले तीन माह में औसतन 60-70 मामले हर थाने में आ रहे हैं। हालांकि इनके निस्तारण का न सिर्फ दावा किया जा रहा है, बल्कि मामलों का फीडबैक लेकर संबंधित शिकायतकर्ताओं की संस्तुति का भी रजिस्टर तैयार किया जा रहा है।
पीडि़त महिलाओं की सुरक्षा और फरियाद सुनने के लिए बनाया गया महिला हेल्प डेस्क मौजूदा समय में काफी मददगार साबित हो रहा है। 27 थानों में कुछ थाने पर बनाए गए महिला हेल्प डेस्क को छोड़ दें तो बाकी सभी जगह काफी मामलों को सुलह समझौते से निस्तारित किया गया है। आंकड़ों पर नजर करें तो जफराबाद महिला हेल्प डेस्क पर तीन महीने में 54 प्रार्थना पत्र पड़े थे। सबका निस्तारण हो गया है। ज्यादातर मामले पारिवारिक, घरेलू हिंसा तथा जमीन से संबंधित थे। गौराबादशाहपुर तीन माह में कुल 46 मामले आएं है, जिनमें सबसे अधिक पारिवारिक विवाद का है। रामपुर में तीन माह के अंदर 57 मामले आए। इसमें ज्यादातर मामले घरेलू हिंसा और बच्चों के आपसी विवाद संबंधित थे। मुंगराबादशाहपुर में तीन माह के अंदर 70 मामले आए, अधिकांश मामले घरेलू हिंसा व जमीन संबंधित विवाद थे। 9 मामलों में जांच की प्रक्रिया चल रही है।
मीरगंज में बीते तीन माह में महिलाओं से जुडे़ 47 मामले आए, 44 का निस्तारण कर दिया गया है। तीन मामले लंबित पड़े हैं। बदलापुर में तीन महीने में 60 शिकायती पत्र पीडि़तों द्वारा कोतवाली में महिला डेस्क पर दिया गया। डेस्क प्रभारी ऊषा ने बताया कि इनमें छेड़खानी, जमीन विवाद, किशोरी गुम आदि से संबंधित रहा। सरायख्वाजा थाने पर लगभग दो वर्ष पहले महिला हेल्प डेस्क की स्थापना की गई है। पिछले तीन माह में 130 मामले आए हैं। सभी का निस्तारण किया गया है। मडि़याहूं में महिला हेल्प डेस्क अंतर्गत पिछले तीन महीने में कुल 60 प्रार्थना पत्र आए, जिसमें 50 का निस्तारण हो चुका है। शेष 10 प्रार्थना पत्र लंबित हैं। शिकायतों में ज्यादा मामले जमीन से संबंधित और कुछ मामले पारिवारिक से संबंधित है। नेवढि़या थाने पर तीन माह में लगभग 50 मामला आया था, जो जमीन से जुड़े थे। इसमें 25 मामले निस्तारित हुए है। इसी तरह अन्य सभी थाने में मामले आ रहे हैं।
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जनपद में महिला हेल्प डेस्क काफी मददगार साबित हो रही है। महिलाएं आसानी से थाने पर आकर महिला सिपाहियों से अपनी बात रख लेती हैं। समस्या सुनने के बाद उतनी ही जिम्मेदारी से काम भी किया जाता है। साथ ही समस्या का समाधान होने पर फीडबैक भी लेकर उसे रजिस्टर में अंकित किया जाता है। हर माह इसकी समीक्षा भी की जाती है। - डा. संजय कुमार, एएसपी सिटी
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पीडि़त महिलाओं की सुरक्षा और फरियाद सुनने के लिए बनाया गया महिला हेल्प डेस्क मौजूदा समय में काफी मददगार साबित हो रहा है। 27 थानों में कुछ थाने पर बनाए गए महिला हेल्प डेस्क को छोड़ दें तो बाकी सभी जगह काफी मामलों को सुलह समझौते से निस्तारित किया गया है। आंकड़ों पर नजर करें तो जफराबाद महिला हेल्प डेस्क पर तीन महीने में 54 प्रार्थना पत्र पड़े थे। सबका निस्तारण हो गया है। ज्यादातर मामले पारिवारिक, घरेलू हिंसा तथा जमीन से संबंधित थे। गौराबादशाहपुर तीन माह में कुल 46 मामले आएं है, जिनमें सबसे अधिक पारिवारिक विवाद का है। रामपुर में तीन माह के अंदर 57 मामले आए। इसमें ज्यादातर मामले घरेलू हिंसा और बच्चों के आपसी विवाद संबंधित थे। मुंगराबादशाहपुर में तीन माह के अंदर 70 मामले आए, अधिकांश मामले घरेलू हिंसा व जमीन संबंधित विवाद थे। 9 मामलों में जांच की प्रक्रिया चल रही है।
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मीरगंज में बीते तीन माह में महिलाओं से जुडे़ 47 मामले आए, 44 का निस्तारण कर दिया गया है। तीन मामले लंबित पड़े हैं। बदलापुर में तीन महीने में 60 शिकायती पत्र पीडि़तों द्वारा कोतवाली में महिला डेस्क पर दिया गया। डेस्क प्रभारी ऊषा ने बताया कि इनमें छेड़खानी, जमीन विवाद, किशोरी गुम आदि से संबंधित रहा। सरायख्वाजा थाने पर लगभग दो वर्ष पहले महिला हेल्प डेस्क की स्थापना की गई है। पिछले तीन माह में 130 मामले आए हैं। सभी का निस्तारण किया गया है। मडि़याहूं में महिला हेल्प डेस्क अंतर्गत पिछले तीन महीने में कुल 60 प्रार्थना पत्र आए, जिसमें 50 का निस्तारण हो चुका है। शेष 10 प्रार्थना पत्र लंबित हैं। शिकायतों में ज्यादा मामले जमीन से संबंधित और कुछ मामले पारिवारिक से संबंधित है। नेवढि़या थाने पर तीन माह में लगभग 50 मामला आया था, जो जमीन से जुड़े थे। इसमें 25 मामले निस्तारित हुए है। इसी तरह अन्य सभी थाने में मामले आ रहे हैं।
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जनपद में महिला हेल्प डेस्क काफी मददगार साबित हो रही है। महिलाएं आसानी से थाने पर आकर महिला सिपाहियों से अपनी बात रख लेती हैं। समस्या सुनने के बाद उतनी ही जिम्मेदारी से काम भी किया जाता है। साथ ही समस्या का समाधान होने पर फीडबैक भी लेकर उसे रजिस्टर में अंकित किया जाता है। हर माह इसकी समीक्षा भी की जाती है। - डा. संजय कुमार, एएसपी सिटी