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किसान हंसिया, लाठी लेकर पहुंचे कलेक्ट्रेट
अमर उजाला ब्यूरो , जौनपुर
Updated Thu, 09 Apr 2015 11:42 PM IST
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भूमि अधिग्रहण बिल के खिलाफ भारतीय किसान यूनियन ने गुरुवार को कलेक्ट्रेट में धरना-प्रदर्शन किया। हाथ में हंसिया, और लाठी लेकर भारी संख्या में महिला और पुरुष किसान कलेक्ट्रेट पहुंचे थे।
किसानों ने कहा कि केंद्र सरकार ने मौजूदा भूमि अधिग्रहण बिल को वापस नहीं लिया तो वह सड़क पर उतरने को विवश होंगे। प्रदर्शन के बाद अपनी मांग से संबंधित पीएम को संबोधित 11 सूत्री पत्रक जिलाधिकारी को सौंपा।
धरना सभा में वक्ताओं ने कहा कि सरकार किसानों का हितैषी होने का दावा करती है लेकिन भूमि अधिग्रहण कानून में संशोधन ने सरकार का असली चेहरा उजागर कर दिया है। मौजूदा बिल किसानों को भूमिहीन बनाने वाला है।
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भूमि अधिग्रहण के लिए अभी तक अंग्रेजों के जमाने का कानून चला आ रहा था। पिछली सरकार ने कानून में संशोधन कर किसानों को कुछ राहत जरूर दी थी, लेकिन मौजूदा सरकार ने अध्यादेश के जरिए पिछली सरकार में किए गए सारे
संशोधनों को निष्प्रभावी कर दिया। इसके माध्यम से सरकार कार्पोरेट घरानों को लाभ दिलाना चाहती है। भारतीय किसान यूनियन के जिलाध्यक्ष राजनाथ यादव ने बेमौसम बारिश से कृषि की हुई क्षति के लिए 25 हजार रुपये प्रति
एकड़ की दर से मुआवजा निर्धारित किए जाने की मांग की। किसानों की लागत में पचास फीसदी मुनाफा जोड़कर समर्थन मूल्य निर्धारित करने के लिए स्वामीनाथन कमेटी की संस्तुतियों को लागू किया जाना चाहिए। किसानों ने
प्रत्येक गांव में सुलभ शौचालय बनवाए जाने की भी मांग की। प्रदर्शन में शिव प्रताप सिंह, धीरज पटेल, माता प्रसाद, अमरावती, किरन, लालती, सरोजा देवी, हिरावती, गीता, चिंता, सीता, मीनू, सुष्मा, हीरावती, चितबहाल, शैलेश वर्मा आदि मौजूद थे।
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किसानों ने कहा कि केंद्र सरकार ने मौजूदा भूमि अधिग्रहण बिल को वापस नहीं लिया तो वह सड़क पर उतरने को विवश होंगे। प्रदर्शन के बाद अपनी मांग से संबंधित पीएम को संबोधित 11 सूत्री पत्रक जिलाधिकारी को सौंपा।
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धरना सभा में वक्ताओं ने कहा कि सरकार किसानों का हितैषी होने का दावा करती है लेकिन भूमि अधिग्रहण कानून में संशोधन ने सरकार का असली चेहरा उजागर कर दिया है। मौजूदा बिल किसानों को भूमिहीन बनाने वाला है।
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भूमि अधिग्रहण के लिए अभी तक अंग्रेजों के जमाने का कानून चला आ रहा था। पिछली सरकार ने कानून में संशोधन कर किसानों को कुछ राहत जरूर दी थी, लेकिन मौजूदा सरकार ने अध्यादेश के जरिए पिछली सरकार में किए गए सारे
संशोधनों को निष्प्रभावी कर दिया। इसके माध्यम से सरकार कार्पोरेट घरानों को लाभ दिलाना चाहती है। भारतीय किसान यूनियन के जिलाध्यक्ष राजनाथ यादव ने बेमौसम बारिश से कृषि की हुई क्षति के लिए 25 हजार रुपये प्रति
एकड़ की दर से मुआवजा निर्धारित किए जाने की मांग की। किसानों की लागत में पचास फीसदी मुनाफा जोड़कर समर्थन मूल्य निर्धारित करने के लिए स्वामीनाथन कमेटी की संस्तुतियों को लागू किया जाना चाहिए। किसानों ने
प्रत्येक गांव में सुलभ शौचालय बनवाए जाने की भी मांग की। प्रदर्शन में शिव प्रताप सिंह, धीरज पटेल, माता प्रसाद, अमरावती, किरन, लालती, सरोजा देवी, हिरावती, गीता, चिंता, सीता, मीनू, सुष्मा, हीरावती, चितबहाल, शैलेश वर्मा आदि मौजूद थे।