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अंतिम दर्शन को उमड़ा हुजूम, गांव में डटे लोग
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जफराबाद। पुलवामा में आतंकियों से मुठभेड़ में शहीद हुए जिलाजीत यादव के अंतिम दर्शन के लिए बृहस्पतिवार को सुबह से ही उमड़ी भीड़ को देर शाम मायूसी हाथ लगी। श्रीनगर में खराब मौसम के कारण अपराह्न तक विशेष विमान शहीद का पार्थिव शरीर लेकर वहां से उड़ान नहीं भर सका था। अंधेरा होता देख परिजनों और उपस्थित लोगों की सहमति पर शुक्रवार को अंतिम संस्कार करने का फैसला लिया गया। सेना का विमान रात में ही वाराणसी पहुंच जाएगा। वहां से सुबह सात बजे सेना के जवान शहीद का पार्थिव शरीर लेकर जौनपुर पहुंचेंगे।
जलालपुर थाना क्षेत्र के इजरी गांव निवासी जिलाजीत यादव की शहादत की खबर मिलने के बाद से ही उनके गांव में प्रशासनिक हलचल तेज हो गई थी। एसडीएम ने बुधवार को गांव पहुंचकर शहीद के घर तक पहुंच मार्ग बनवाने का निर्देश दिया था। बृहस्पतिवार को पार्थिव शरीर गांव पहुंचने की संभावना थी। इसके मद्देनजर सुबह से ही लोगों का हुजूम इजरी पहुंचने लगा था। फिजाओं में हर तरफ शहीद जिलाजीत यादव अमर रहें... का नारा गूंजता रहा। जलालपुर बाजार से शहीद के घर तक जगह-जगह बैनर-होर्डिंग लगा दिए गए थे। शहीद के अंतिम दर्शन की आस लिए लोग पूरे दिन गांव व आसपास जुटे रहे। प्रशासनिक अफसरों व राजनेताओं का भी गांव में जमावड़ा लगा रहा।
सुबह डीएम दिनेश कुमार सिंह व एसपी अशोक कुमार ने गांव पहुंचकर पीड़ित परिवार का हाल जाना। प्रदेश सरकार की ओर से दी जा रही 50 लाख रुपये की आर्थिक मदद और एक सदस्य को नौकरी के बारे में जानकारी दी। उन्होंने शहीद की स्मृति में पार्क बनवाने व प्रतिमा लगवाने के लिए राजस्व कर्मचारियों को गांव में जमीन चिह्नित करने का निर्देश दिया। बताया कि परिवार की मंशानुसार एक सड़क का नामकरण भी शहीद जिलाजीत के नाम पर किया जाएगा। दोनों अफसर घंटों तक गांव में मौजूद रहे। प्रशासनिक हलचल के साथ ही पार्थिव शरीर शीघ्र पहुंचने की चर्चाएं भी शुरू हो गईं। फूल-माला लेकर लोग वीर सपूत को नमन करने के लिए तैयारी में जुटे थे, मगर अपराह्न तीन बजे तक शहीद का शव लेकर विमान के श्रीनगर से ही न उड़ने की खबर के बाद लोग मायूस हो गए। फोन पर सेना के अधिकारियों ने जब बताया कि शव वाराणसी पहुंचने में देर रात हो जाएगा, तब रिश्तेदारों और गणमान्य लोगों की मौजूदगी में परिजनों ने शुक्रवार की सुबह ही अंतिम संस्कार करने का निर्णय लिया। शहीद के चाचा जवाहर यादव ने बताया कि सेना के अफसरों से बात हुई है। रात में शव वाराणसी पहुंच जाएगा। इसके बाद उसे वाराणसी छावनी ले जाया जाएगा। वहां से सुबह सात बजे तक सेना के अफसर पार्थिव शरीर लेकर गांव पहुंचेंगे। जौनपुर के रामघाट पर अंतिम संस्कार किया जाएगा।
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श्रद्धांजलि देने वालों का लगा रहा तांता
जफराबाद। शहीद जिलाजीत के घर शोक संवेदना जताने और श्रद्धांजलि देने वालों का तांता लगा रहा। सपा जिलाध्यक्ष लाल बहादुर यादव, अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के जिलाध्यक्ष डॉ. सरफराज खान, जिला पंचायत अध्यक्ष राजबहादुर यादव, पूर्व सांसद मछलीशहर तूफानी सरोज, पूर्व मंत्री जगदीश नारायण राय, डॉ. केपी यादव, डॉ. अवधनाथ पाल, रत्नाकर चौबे, हिसामुद्दीन, पूर्व एमएलसी लल्लन प्रसाद यादव, जिला सचिव नंदलाल यादव, बसपा जिला प्रभारी डॉ. जेपी सिंह आदि शामिल रहे।
अफसरों की बेरुखी पर गुस्साए युवाओं ने लगाया जाम
जौनपुर। शहादत की खबर के 24 घंटे बाद भी गांव में जिले के आला अफसरों और जनप्रतिनिधियों के न पहुंचने पर आक्रोशित युवाओं ने सुबह गांव के सामने जौनपुर-वाराणसी मुख्य मार्ग पर जाम लगा दिया। युवाओं का कहना था कि शहीद के साथ भेदभावपूर्ण व्यवहार किया जा रहा है। चौबीस घंटे से अधिक समय बीतने के बाद भी न तो डीएम मौके पर पहुंचे हैं और न ही क्षेत्रीय सांसद-विधायक ही आए। गांव का लाल देश की सुरक्षा के लिए शहीद हुआ है, मगर ऐसा व्यवहार किया जाएगा तो फिर युवा फौज में क्यों जाएंगे। करीब 15-20 मिनट तक जाम के दौरान हाईवे पर वाहनों की कतार लग गई। सूचना पाते ही शहीद के परिवार के लोग मौके पर पहुंचे और जाम समाप्त कराया। शहीद के चाचा ने कहा कि बेटे ने अपना फर्ज निभाया है, अब सरकार और नेताओं का जो फर्ज है वो निभाएं। जाम लगाना उचित नहीं होगा। हालांकि कुछ देर बाद ही डीएम भी मौके पर पहुंच गए।
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पति की शहादत पर फख्र, बेटे को भी बनाऊंगी फौजी
मातृभूमि की सुरक्षा के लिए अपने प्राणों की आहूति देने वालेे जिलाजीत यादव की पत्नी पूनम ने अपने एकलौते बेटे को भी फौज में भेजने की इच्छा जताई है। उन्होंने कहा कि पति की शहादत पर फख्र है। उन्होंने देश के लिए जान देकर गौरवान्वित किया है। पति चाहते थे कि बेटा पढ़-लिखकर बड़ा अफसर बने, मगर अब मैं बेटे को फौज में ही भेजूंगी। सेना में जाकर बेटा अपने पिता के अधूरे काम को पूरा करेगा। आतंकियों का खात्मा कर उनका बदला लेगा।
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रुंधे गले से मां बोली, सेना में ही जाएगा पोता
एकलौते बेटे के गम में मां उर्मिला देवी बेसुध हैं। वह बार-बार अपने बेटे का नाम लेकर विलाप कर रही हैं। उनका कहना था कि पति की मौत के बाद बेटा ही परिवार का एकलौता सहारा था। वह भी देश के लिए शहीद हो गया। शहादत पर फख्र करते हुए कहा कि मेरा तो एक ही बेटा था, अगर कोई और होता तो उसे भी फौज में ही भेजती। एकलौते बेटे के बाद अब एकलौते पोते को देश सेवा के लिए भेजने की इच्छा है।
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जलालपुर थाना क्षेत्र के इजरी गांव निवासी जिलाजीत यादव की शहादत की खबर मिलने के बाद से ही उनके गांव में प्रशासनिक हलचल तेज हो गई थी। एसडीएम ने बुधवार को गांव पहुंचकर शहीद के घर तक पहुंच मार्ग बनवाने का निर्देश दिया था। बृहस्पतिवार को पार्थिव शरीर गांव पहुंचने की संभावना थी। इसके मद्देनजर सुबह से ही लोगों का हुजूम इजरी पहुंचने लगा था। फिजाओं में हर तरफ शहीद जिलाजीत यादव अमर रहें... का नारा गूंजता रहा। जलालपुर बाजार से शहीद के घर तक जगह-जगह बैनर-होर्डिंग लगा दिए गए थे। शहीद के अंतिम दर्शन की आस लिए लोग पूरे दिन गांव व आसपास जुटे रहे। प्रशासनिक अफसरों व राजनेताओं का भी गांव में जमावड़ा लगा रहा।
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सुबह डीएम दिनेश कुमार सिंह व एसपी अशोक कुमार ने गांव पहुंचकर पीड़ित परिवार का हाल जाना। प्रदेश सरकार की ओर से दी जा रही 50 लाख रुपये की आर्थिक मदद और एक सदस्य को नौकरी के बारे में जानकारी दी। उन्होंने शहीद की स्मृति में पार्क बनवाने व प्रतिमा लगवाने के लिए राजस्व कर्मचारियों को गांव में जमीन चिह्नित करने का निर्देश दिया। बताया कि परिवार की मंशानुसार एक सड़क का नामकरण भी शहीद जिलाजीत के नाम पर किया जाएगा। दोनों अफसर घंटों तक गांव में मौजूद रहे। प्रशासनिक हलचल के साथ ही पार्थिव शरीर शीघ्र पहुंचने की चर्चाएं भी शुरू हो गईं। फूल-माला लेकर लोग वीर सपूत को नमन करने के लिए तैयारी में जुटे थे, मगर अपराह्न तीन बजे तक शहीद का शव लेकर विमान के श्रीनगर से ही न उड़ने की खबर के बाद लोग मायूस हो गए। फोन पर सेना के अधिकारियों ने जब बताया कि शव वाराणसी पहुंचने में देर रात हो जाएगा, तब रिश्तेदारों और गणमान्य लोगों की मौजूदगी में परिजनों ने शुक्रवार की सुबह ही अंतिम संस्कार करने का निर्णय लिया। शहीद के चाचा जवाहर यादव ने बताया कि सेना के अफसरों से बात हुई है। रात में शव वाराणसी पहुंच जाएगा। इसके बाद उसे वाराणसी छावनी ले जाया जाएगा। वहां से सुबह सात बजे तक सेना के अफसर पार्थिव शरीर लेकर गांव पहुंचेंगे। जौनपुर के रामघाट पर अंतिम संस्कार किया जाएगा।
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श्रद्धांजलि देने वालों का लगा रहा तांता
जफराबाद। शहीद जिलाजीत के घर शोक संवेदना जताने और श्रद्धांजलि देने वालों का तांता लगा रहा। सपा जिलाध्यक्ष लाल बहादुर यादव, अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के जिलाध्यक्ष डॉ. सरफराज खान, जिला पंचायत अध्यक्ष राजबहादुर यादव, पूर्व सांसद मछलीशहर तूफानी सरोज, पूर्व मंत्री जगदीश नारायण राय, डॉ. केपी यादव, डॉ. अवधनाथ पाल, रत्नाकर चौबे, हिसामुद्दीन, पूर्व एमएलसी लल्लन प्रसाद यादव, जिला सचिव नंदलाल यादव, बसपा जिला प्रभारी डॉ. जेपी सिंह आदि शामिल रहे।
अफसरों की बेरुखी पर गुस्साए युवाओं ने लगाया जाम
जौनपुर। शहादत की खबर के 24 घंटे बाद भी गांव में जिले के आला अफसरों और जनप्रतिनिधियों के न पहुंचने पर आक्रोशित युवाओं ने सुबह गांव के सामने जौनपुर-वाराणसी मुख्य मार्ग पर जाम लगा दिया। युवाओं का कहना था कि शहीद के साथ भेदभावपूर्ण व्यवहार किया जा रहा है। चौबीस घंटे से अधिक समय बीतने के बाद भी न तो डीएम मौके पर पहुंचे हैं और न ही क्षेत्रीय सांसद-विधायक ही आए। गांव का लाल देश की सुरक्षा के लिए शहीद हुआ है, मगर ऐसा व्यवहार किया जाएगा तो फिर युवा फौज में क्यों जाएंगे। करीब 15-20 मिनट तक जाम के दौरान हाईवे पर वाहनों की कतार लग गई। सूचना पाते ही शहीद के परिवार के लोग मौके पर पहुंचे और जाम समाप्त कराया। शहीद के चाचा ने कहा कि बेटे ने अपना फर्ज निभाया है, अब सरकार और नेताओं का जो फर्ज है वो निभाएं। जाम लगाना उचित नहीं होगा। हालांकि कुछ देर बाद ही डीएम भी मौके पर पहुंच गए।
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पति की शहादत पर फख्र, बेटे को भी बनाऊंगी फौजी
मातृभूमि की सुरक्षा के लिए अपने प्राणों की आहूति देने वालेे जिलाजीत यादव की पत्नी पूनम ने अपने एकलौते बेटे को भी फौज में भेजने की इच्छा जताई है। उन्होंने कहा कि पति की शहादत पर फख्र है। उन्होंने देश के लिए जान देकर गौरवान्वित किया है। पति चाहते थे कि बेटा पढ़-लिखकर बड़ा अफसर बने, मगर अब मैं बेटे को फौज में ही भेजूंगी। सेना में जाकर बेटा अपने पिता के अधूरे काम को पूरा करेगा। आतंकियों का खात्मा कर उनका बदला लेगा।
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रुंधे गले से मां बोली, सेना में ही जाएगा पोता
एकलौते बेटे के गम में मां उर्मिला देवी बेसुध हैं। वह बार-बार अपने बेटे का नाम लेकर विलाप कर रही हैं। उनका कहना था कि पति की मौत के बाद बेटा ही परिवार का एकलौता सहारा था। वह भी देश के लिए शहीद हो गया। शहादत पर फख्र करते हुए कहा कि मेरा तो एक ही बेटा था, अगर कोई और होता तो उसे भी फौज में ही भेजती। एकलौते बेटे के बाद अब एकलौते पोते को देश सेवा के लिए भेजने की इच्छा है।
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