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जिले के 317 स्कूलों में पूरा नहीं हुआ कायाकल्प अभियान
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जिले के 11 स्कूलों में कायाकल्प अभियान अभी पूरा नहीं हो पाया है। 2490 परिषदीय स्कूलों में कायाकल्प का कार्य पूरा हो चुका है। परिषदीय विद्यालयों में सुविधाएं बढ़ाने और और उन्हें सुसज्जित करने के लिए चलाए जा रहे कायाकल्प योजना से विद्यालयों की सूरत बदल रही है। कायाकल्प के लिए 19 पैरामीटर तय किए गए हैं। जिससे छात्रों के लिए न केवल पढ़ाई के संसाधन बढ़ रहे हैं बल्कि छात्रों के लिए पुस्तकालय, खेल मैदान, प्रयोगशाला, मनोरंजन की सुविधा भी बढ़ रही है।
जिले में कुल 2807 परिषदीय विद्यालय हैं, जिनमें कायाकल्प कार्य कराया जाना है। विभागीय अधिकारियों की माने तो 2490 विद्यालयों में कायाकल्प का कार्य पूरा हो चुका है। शेष 317 विद्यालयों में नया सत्र शुरू होने से पहले में कायाकल्प का कार्यकाल पूरा कराने की तैयारी है। परिषदीय विद्यालयों में व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने के लिए 2018 से कायाकल्प योजना शुरू की गई। कायाकल्प कराने की जिम्मेदारी बेसिक शिक्षा विभाग व ग्राम पंचायतों को दे दी गई है। अब इन विद्यालयों के नौनिहालों के लिए पढ़ने की सभी सुविधाएं मौजूद हो गई हैं। वह स्कूल में आकर ब्लैक बोर्ड के साथ प्रोजेक्टर पर भी पढ़ सकते हैं। इससे यहां पढ़ने वाले नौनिहालों को फायदा मिलेगा। कायाकल्प योजना के तहत विद्यालयों में तेजी से कार्य कराया जा रहा हैं। इससे विद्यालयों में पढ़ाई का बेहतर माहौल मिल रहा है। इससे शिक्षा व्यवस्था में गुणात्मक सुधार आएगा।
19 पैरा मीटर पर कराया जा रहा कार्य
परिषदीय विद्यालयों में कायाकल्प के लिए 19 बिंदुओं का चयन किया गया है। जिसमें शुद्ध एवं सुरक्षित पेयजल, बालक-बालिका शौचालय, नल-जल आपूर्ति , यूरीनल का टाइलीकरण, शौचालय ,दिव्यांग सुलभ शौचालय, मल्टीपल हैंड वाशिंग यूनिट, रसोई घर, कक्ष के फर्श का टायलीकरण, श्याम पट्ट, विद्यालयों का समुचित रंग पुताई, विद्यालय परिसर में दिव्यांग-सुलभ रैम्प, कक्ष में उपयुक्त वायरिंग एवं विद्युत उपकरण, विद्यालयों का बिजली संयोजन, पाइप वॉटर सप्लाई, फर्नीचर डेस्क आदि शामिल हैं।
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जिले 89 प्रतिशत विद्यालयों में कायाकल्प का कार्य पूरा हो चुका है। शेष 11 प्रतिशत विद्यालयों में जून के अंत तक कार्य पूरा करा लिया जाएगा। विद्यालयों में छात्रों के लिए सुविधाएं बढ़ाने के लिए पूरा प्रयास किया जा रहा है। - डा. गोरखनाथ पटेल, बीएसए जौनपुर
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जिले में कुल 2807 परिषदीय विद्यालय हैं, जिनमें कायाकल्प कार्य कराया जाना है। विभागीय अधिकारियों की माने तो 2490 विद्यालयों में कायाकल्प का कार्य पूरा हो चुका है। शेष 317 विद्यालयों में नया सत्र शुरू होने से पहले में कायाकल्प का कार्यकाल पूरा कराने की तैयारी है। परिषदीय विद्यालयों में व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने के लिए 2018 से कायाकल्प योजना शुरू की गई। कायाकल्प कराने की जिम्मेदारी बेसिक शिक्षा विभाग व ग्राम पंचायतों को दे दी गई है। अब इन विद्यालयों के नौनिहालों के लिए पढ़ने की सभी सुविधाएं मौजूद हो गई हैं। वह स्कूल में आकर ब्लैक बोर्ड के साथ प्रोजेक्टर पर भी पढ़ सकते हैं। इससे यहां पढ़ने वाले नौनिहालों को फायदा मिलेगा। कायाकल्प योजना के तहत विद्यालयों में तेजी से कार्य कराया जा रहा हैं। इससे विद्यालयों में पढ़ाई का बेहतर माहौल मिल रहा है। इससे शिक्षा व्यवस्था में गुणात्मक सुधार आएगा।
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19 पैरा मीटर पर कराया जा रहा कार्य
परिषदीय विद्यालयों में कायाकल्प के लिए 19 बिंदुओं का चयन किया गया है। जिसमें शुद्ध एवं सुरक्षित पेयजल, बालक-बालिका शौचालय, नल-जल आपूर्ति , यूरीनल का टाइलीकरण, शौचालय ,दिव्यांग सुलभ शौचालय, मल्टीपल हैंड वाशिंग यूनिट, रसोई घर, कक्ष के फर्श का टायलीकरण, श्याम पट्ट, विद्यालयों का समुचित रंग पुताई, विद्यालय परिसर में दिव्यांग-सुलभ रैम्प, कक्ष में उपयुक्त वायरिंग एवं विद्युत उपकरण, विद्यालयों का बिजली संयोजन, पाइप वॉटर सप्लाई, फर्नीचर डेस्क आदि शामिल हैं।
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जिले 89 प्रतिशत विद्यालयों में कायाकल्प का कार्य पूरा हो चुका है। शेष 11 प्रतिशत विद्यालयों में जून के अंत तक कार्य पूरा करा लिया जाएगा। विद्यालयों में छात्रों के लिए सुविधाएं बढ़ाने के लिए पूरा प्रयास किया जा रहा है। - डा. गोरखनाथ पटेल, बीएसए जौनपुर