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पौधे तो लगे, पेड़ बनने से पहले ही सूख गए

Fri, 08 Jan 2021 11:41 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Fri, 08 Jan 2021 11:41 PM IST
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Plants were planted, dried before the trees became
सिद्दीकपुर स्थित शाहगंज रोड के किनारे लगे पेड़ का टूटा पड़ा घेरा व सूखा पेड़। - फोटो : JAUNPUR
जौनपुर/करंजाकला। वन विभाग का दावा है कि पिछले दो वर्षों में सघन पौधरोपण अभियान के दौरान जिले में 40 लाख से अधिक पौधे लगाए गए हैं। इस पौधरोपण अभियान के चलते ही 50 हेक्टेयर वन क्षेत्रफल में वृद्धि हुई है, मगर विभाग का हरियाली बढ़ने का दावा बस कागजी है। मौके पर अधिकांश स्थानों पर लगे पौधे देख-रेख के अभाव में सूख गए या पशुओं का निवाला बन गए। हरियाली के नाम पर कागजी खेल का असर है कि प्रदूषण का स्तर लगातार खतरे के ऊपर बना हुआ है।
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विभिन्न हाइवे के निर्माण के दौरान जिले में बड़ी संख्या में पेड़ काटे गए हैं। सिर्फ जौनपुर-सुल्तानपुर हाइवे के निर्माण में ही 19 हजार पेड़ काटे गए थे। आजमगढ़ और प्रयागराज मार्ग के चौड़ीकरण में भी हजारों पेड़ विकास की भेंट चढ़े हैं। काटे गए इन पेड़ों के सापेक्ष चार गुना पौधे लगाने का मानक है। वन विभाग के आंकड़ों में पिछले दो वर्षों में वन महोत्सव और विभिन्न अभियान के दौरान करीब 40 लाख से अधिक पौधे लगाए गए हैं। ग्राम पंचायतों में मनरेगा के माध्यम से पौधरोपण हुआ तो हाइवे के किनारे भी बड़ी संख्या में पौधे रोपे गए। लेकिन इनकी सुरक्षा और देखभाल का समुचित इंतजाम नहीं किया गया। नतीजा ज्यादातर स्थानों पर पौधे नष्ट हो गए हैं। जौनपुर-शाहगंज मार्ग पर कुत्तुपुर तिराहा से पूर्वांचल विवि के बीच 500 पौधे लगाए गए थे। सुरक्षा के लिए ट्री गार्ड भी लगे थे, लेकिन अब न तो ट्री गार्ड हैं और न ही पौधों का पता है। सीमेंट-बालू से बनाए गए यह ट्री गार्ड खराब कार्य के चलते गिर गए, जिसकी ईंट भी लोग उठा ले गए। यही हाल चौकिया धाम से आरा रोड पर लगाए गए पौधों का भी है। इस रोड पर पौधे लगाए गए लेकिन उनकी सुरक्षा के लिए ट्रीगार्ड तक नहीं बनाया गया था, जिसके चलते पूरे पौधे नष्ट हो गए। वन रक्षक राजकुमार सिंह ने बताया कि सारे सभी ट्रीगार्ड और पौधे भी सुरक्षित हैं। उनकी देखभाल की जा रही है।
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प्रधानों को मिले थे पौधे, उन्होंने गांव में बांट दिए
बदलापुर। विकासखंड के 76 गांवों में पौधरोपण के लिए वर्ष 20-21 में 161500 का लक्ष्य आवंटित था। इसके सापेक्ष तियरा और मरगूपुर पौधशाला से 1.19 लाख पौधों का उठान भी हुआ। इन पौधों को ग्राम पंचायतों में प्रधानों के माध्यम से लगाए जाने थे। प्रधान पौधे ले गए और उसे ग्रामीणों में बांट दिया। किसी ने भी यह जानने की जरुरत नहीं समझी कि पौधे लगाए जा रहे हैं और उनकी सुरक्षा हो रही है या नहीं। आहोपुर, अर्जुनपुर, बछाड़ी, बछुआर आदि गांवों में आवंटित ज्यादातर पौधे नहीं है।
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वर्ष 2018 तक जिले का वन क्षेत्रफल 500 हेक्टेयर था, जो सघन पौधरोपण अभियान के बाद बढ़कर 550 हेक्टेयर हो गया है। जहां भी पौधे लगाए जा रहे हैं, उनकी निगरानी संबंधित संस्था के माध्यम से होती है। उसका सत्यापन भी कराया जाता है। ग्राम पंचायतों में मनरेगा के माध्यम से पौधे लगाने के बाद देखभाल के लिए राशि दी जाती है। अगर पौधे मौके पर नहीं हैं तो उनका सत्यापन कर कार्रवाई की जाएगी। -जीसी तिवारी, डीएफओ, वन विभाग।

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हरियाली घटने से खराब हो रही हवा
निर्माण कार्यों के लिए पेड़ों की लगातार कटाई का असर प्रदूषण के रूप में नजर आ रहा है। पिछले कुछ महीनों से जिले का प्रदूषण स्तर लगातार खतरनाक श्रेणी में रहा है। बीते शनिवार और मंगलवार की रात जौनपुर की वायु गुणवत्ता पूरे देश में सबसे खराब थी। यह साढ़े पांच सौ से ज्यादा पहुंच गया था। इसके लिए पेड़-पौधे कम होने को भी अहम कारण माना जा रहा है। शुक्रवार की सुबह साढ़े नौ बजे भी शहर की वायु गुणवत्ता 319 तक पहुंच गया। हालांकि दोपहर में धूप के बाद यह 200 के नीचे आ गया था।
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