{"_id":"6ac14e320081cfd086066264","slug":"one-should-not-abandon-faith-and-religion-even-in-times-of-poverty-and-adversity-jaunpur-news-c-193-1-svns1025-164143-2026-10-04","type":"story","status":"publish","title_hn":"Jaunpur News: गरीबी और विपत्ति के समय भी ईमान और धर्म नहीं छोड़ना चाहिए","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Jaunpur News: गरीबी और विपत्ति के समय भी ईमान और धर्म नहीं छोड़ना चाहिए
विज्ञापन
सिगरामऊ। क्षेत्र के जमऊपट्टी में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में अयोध्या धाम से पधारे कथा व्यास कौशल किशोर महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता का वर्णन कर श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। उन्होंने कहा कि व्यक्ति को गरीबी और विपत्ति के समय भी ईमान और धर्म नहीं छोड़ना चाहिए।
कथा व्यास ने बताया कि सुदामा अत्यंत निर्धन थे। उनके परिवार की स्थिति दयनीय थी और बच्चे भूख से तड़पते थे, फिर भी उन्होंने आत्मसम्मान और धर्म से समझौता नहीं किया। कई दिनों तक जल पीकर जीवन यापन किया। पत्नी के आग्रह पर वह बालसखा श्रीकृष्ण से मिलने चावल की पोटली लेकर द्वारका पहुंचे। सुदामा की द्वारका यात्रा का प्रसंग उन्होंने भावुक शैली में प्रस्तुत किया। बताया कि मार्ग में अनेक कठिनाइयों और बाधाओं के बावजूद उनके मन में न लोभ था और न कोई अपेक्षा।
भगवान श्रीकृष्ण के दरबार में पहुंचते ही प्रभु ने सुदामा को स्नेहपूर्वक गले लगा लिया। इस प्रसंग का वर्णन सुनकर पंडाल में मौजूद श्रोता भावविभोर हो उठे और श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं।
विज्ञापन
परीक्षित मोक्ष की कथा सुनाते हुए महाराज ने कहा कि जो श्रद्धालु श्रद्धा और एकाग्र मन से भगवान की कथा का श्रवण करता है, उसे भगवान सद्गति प्रदान करते हैं। जिस प्रकार राजा परीक्षित और धुंधकारी को मोक्ष प्राप्त हुआ, उसी प्रकार भागवत श्रवण मनुष्य के जीवन को पवित्र बनाता है।
इस अवसर पर चिंतामणि मिश्र, शिवनारायण मिश्र, रमापति मिश्र, दिनेश कुमार मिश्र, प्रेमचंद्र मिश्र, भानु कुमार मिश्र, अरुण कुमार मिश्र, अनिल मिश्र, सुभाष मिश्र, सुनील कुमार मिश्र, वीरेंद्र मिश्र और राजेश मिश्र उपस्थित रहे।
विज्ञापन
कथा व्यास ने बताया कि सुदामा अत्यंत निर्धन थे। उनके परिवार की स्थिति दयनीय थी और बच्चे भूख से तड़पते थे, फिर भी उन्होंने आत्मसम्मान और धर्म से समझौता नहीं किया। कई दिनों तक जल पीकर जीवन यापन किया। पत्नी के आग्रह पर वह बालसखा श्रीकृष्ण से मिलने चावल की पोटली लेकर द्वारका पहुंचे। सुदामा की द्वारका यात्रा का प्रसंग उन्होंने भावुक शैली में प्रस्तुत किया। बताया कि मार्ग में अनेक कठिनाइयों और बाधाओं के बावजूद उनके मन में न लोभ था और न कोई अपेक्षा।
विज्ञापन
भगवान श्रीकृष्ण के दरबार में पहुंचते ही प्रभु ने सुदामा को स्नेहपूर्वक गले लगा लिया। इस प्रसंग का वर्णन सुनकर पंडाल में मौजूद श्रोता भावविभोर हो उठे और श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं।
विज्ञापन
परीक्षित मोक्ष की कथा सुनाते हुए महाराज ने कहा कि जो श्रद्धालु श्रद्धा और एकाग्र मन से भगवान की कथा का श्रवण करता है, उसे भगवान सद्गति प्रदान करते हैं। जिस प्रकार राजा परीक्षित और धुंधकारी को मोक्ष प्राप्त हुआ, उसी प्रकार भागवत श्रवण मनुष्य के जीवन को पवित्र बनाता है।
इस अवसर पर चिंतामणि मिश्र, शिवनारायण मिश्र, रमापति मिश्र, दिनेश कुमार मिश्र, प्रेमचंद्र मिश्र, भानु कुमार मिश्र, अरुण कुमार मिश्र, अनिल मिश्र, सुभाष मिश्र, सुनील कुमार मिश्र, वीरेंद्र मिश्र और राजेश मिश्र उपस्थित रहे।