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एक खानदान, दो मजहब : कुल मिलन कार्यक्रम में जुटे हिंदू-मुस्लिम परिवार

Sun, 04 Oct 2026 12:04 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sun, 04 Oct 2026 12:04 AM IST
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One family, two religions: Hindu and Muslim families gather for a Kul Milan event
नौशाद अहमद दूबे के घर केराकत डेहरी में ब्राह्मण भोज-भात में पहुंचे काशी और जौनपुर के ब्राह्मण।
केराकत (जाैनपुर)। औरंगजेब के शासन काल में करीब 357 साल पहले इस्लाम धर्म अपनाने वाले पूर्वज के वंशजों के लिए शनिवार को सालाना कुल मिलन कार्यक्रम हुआ। केराकत क्षेत्र के डेहरी गांव में नौशाद अहमद दूबे के घर पर हुए इस आयोजन में एक ही खानदान के दो मजहबों के परिवारों को आमंत्रित किया गया। इसमें काशी और जौनपुर जिले से ब्राह्मण समाज के लोग भोज-भात में पहुंचे। कुल मिलन कार्यक्रम के साक्षी नई दिल्ली से पहुंचे आरएसएस के वरिष्ठ प्रचारक एवं केंद्रीय अधिकारी विजय शर्मा रहे।
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विशाल भारत संस्थान के प्रदेश अध्यक्ष व कार्यक्रम संयोजक नौशाद अहमद दूबे के गोत्र के नाम पर स्थापित वत्स गोशाला को संघ के वरिष्ठ प्रचारक विजय शर्मा ने उद्घाटन किया। संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. राजीव श्रीगुरुजी ने कहा कि अपनी जड़ों से जुड़ने पर बिछड़े रिश्तेदारों का पता चलता है। कुटुंब प्रबोधन के संयोजक डॉ. शुकदेव त्रिपाठी ने कहा कि इतिहास की घटनाओं से परिवार अलग हो सकते हैं, लेकिन पूर्वजों के स्तर पर जुड़ाव बना रहता है। इस दौरान मो. आजम दूबे, अलाउद्दीन तिवारी, अशरफ दूबे, उमर दूबे, अब्दुल्ला दूबे, अंसार तिवारी, विवेक मिश्र, अखिलेश शुक्ला, सुधीर मिश्रा, आकाश मिश्रा, प्रमोद त्रिपाठी समेत अन्य लोग मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन डॉ. अर्चना भारतवंशी और धन्यवाद ज्ञापन नौशाद अहमद दूबे ने किया।
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ये है वंशावली
आयोजकों के अनुसार, नौशाद अहमद दूबे की आठवीं पीढ़ी के पूर्वज लाल बहादुर दूबे आजमगढ़ जिले के रानी की सराय के निवासी थे। औरंगजेब के शासन काल में परिस्थितिवश लाल बहादुर ने इस्लाम धर्म स्वीकार कर लिया था। रानी की सराय छोड़कर डेहरी गांव में आकर बस गए थे। पूर्वजों की वंशावली की खोजबीन के दाैरान नाैशाद अहमद के परिवार के संबंध कई ब्राह्मण परिवारों से मिले। इसके बाद नाैशाद अमहद ने अपने उपनाम में दूबे शब्द को जोड़ लिया है।
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