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खराब रैंकिंग से भी बेअसर, स्वच्छता सर्वेक्षण को लेकर फिर बेपरवाही

Thu, 11 Mar 2021 10:16 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Thu, 11 Mar 2021 10:16 PM IST
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Neutralized even by poor ranking, inattention to cleanliness survey again
जौनपुर। लगातार कई वर्षों से खराब प्रदर्शन के बाद भी नगर पालिका प्रशासन शहर को स्वच्छता में अग्रणी बनाने पर गंभीर नहीं है। साफ-सफाई के नाम पर यहां बस कागजी घोड़े ही दौड़ाए जा रहे हैं। वर्ष 2021 के लिए स्वच्छता सर्वेक्षण शुरू हो चुका है, मगर अब तक शहर में इसकी कोई तैयारी ही नहीं है। न तो नियमित कूड़ा उठान की व्यवस्था में सुधार हुआ है और न ही शहर को गंदगी से मुक्त बनाने के अन्य इंतजामों का। इस बार रैकिंग में लोगों के फीडबैक के अंक सबसे ज्यादा अहम होंगे, मगर यहां ज्यादातर लोग सर्वेक्षण की प्रक्रिया से ही अनभिज्ञ हैं। सर्वेक्षण मार्च तक चलेगा।
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शहरों को स्वच्छ बनाने पर सरकार का विशेष जोर है। इसके लिए निकायों को पर्याप्त बजट भी दिया जा रहा है। जगह-जगह डस्टबिन लगवाने, शौचालय बनवाने से लेकर अन्य संसाधनों की उपलब्धता के लिए बजट की कमी नहीं है। इस बजट का उपयोग कर अपने क्षेत्र को स्वच्छ बनाने में निकाय कितना बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं, इसका आकलन प्रतिवर्ष स्वच्छता सर्वेक्षण के माध्यम से होता है। इसके लिए अलग-अलग मानक तय किए गए हैं। निकाय क्षेत्र में साफ-सफाई की स्थिति, उपलब्ध संसाधन, जागरुकता कार्यक्रम सहित निकाय स्तर पर की जा रही अन्य कोशिशों के अलावा आम लोगों की राय को भी इसमें शामिल किया गया है। इस सर्वेक्षण में जौनपुर शहर हमेशा से फिसड्डी रहा है। पिछले तीन वर्षों से लगातार शहर की रैंकिंग सवा तीन सौ के पार रह रही है। इसके लिए जिम्मेदारों को फटकार भी सुननी पड़ रही है, बावजूद वह इसमें सुधार के लिए कोई पहल नहीं कर रहे। लापरवाही का यह हाल तब है, जब जिले के आला अधिकारियों के आवास और कार्यालय यहां है। यही नहीं मछलीशहर, बदलापुर सहित जिले के अन्य निकाय भी इस रैंकिंग में जौनपुर से काफी आगे हैं। फिर भी यहां के जिम्मेदारों को कोई फर्क नहीं है।
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सिटीजन वायस के अंक होंगे अहम
पिछले सर्वे में 1500 अंक डायरेक्ट ऑब्जरवेशन का था और इतने ही जनता के फीडबैक का। कुल 6000 अंकों के सर्वे में 50 फीसदी अंक इन दोनों श्रेणियों के थे। इसमें कई जगह दोहराव था। इस बार इन दोनों को जोड़कर एक श्रेणी बनाई गई है। इस श्रेणी का नाम है सिटीजन वॉइस। कुल 6000 अंकों के सर्वे में इसके लिए इस बार 1800 अंक तय किए गए हैं। पहले कई शहर अक्सर इसमें गड़बड़ी किया करते थे। ऐसे में इस बार इस व्यवस्था के तहत ज्यादा पारदर्शिता होगी और गड़बड़ी की आशंका कम रहेगी।
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स्वच्छता में यह हैं चुनौतियां::
* नियमित कूड़ा उठान नहीं: साफ-सफाई पर सरकार के लगातार जोर के बाद भी नगर पालिका प्रशासन फिसड्डी है। सड़कों पर झाड़ू तो लग जाता है, लेकिन मोहल्लों से कूड़ा उठने में कई-कई दिन बीत जाते हैं। डस्टबिन से बाहर कूड़ा बिखरने पर जब लोग शोरगुल मचाते हैं तब कूड़ा उठाने पर ध्यान जाता है। पिछले माह नोडल अधिकारी भी निरीक्षण के दौरान इन खामी पर फटकार लगा चुके है।
* पर्याप्त डस्टबिन का अभाव: नगर पालिका के कई मोहल्लों में डस्टबिन ही नहीं है। यह समस्या उन इलाकों में अधिक है, जो कुछ वर्ष पहले ही शहरी क्षेत्र में शामिल हुए हैं। नए आवासीय इन इलाकों में कूड़ा खाली प्लाटों में फेंका जा रहा है। नाली का पानी रास्ते में बहता है। यह अव्यवस्था भी शहर को स्वच्छ बनाने में बाधा है।
* सामुदायिक शौचालयों पर ताला: कहने के लिए तो शहर में 16 सामुदायिक शौचालय बने हुए हैं। पांच नए शौचालयों का भी प्रस्ताव है। मगर इनमें से कई शौचालय वर्षों से बंद है। छह शौचालयों का अब तक ताला ही नहीं खुल पाया है। ऐसे में शौचालय विहीन परिवारों के लिए दिक्कतें रहती हैं। शहर के घाटों पर भी सार्वजनिक शौचालय का अभाव है।
* कूड़ा निस्तारण का इंतजाम नहीं: शहर की सबसे बड़ी समस्या कूड़ा निस्तारण की है। इसके लिए कुल्हनामऊ में कूड़ा निस्तारण संयत्र बनकर तैयार तो हो चुका है, लेकिन दो माह से उसके उद्घाटन का इंतजार है। समय से उद्घाटन होता तो कूड़ा निस्तारण की समस्या के समाधान के साथ शहर की सफाई भी कुछ बेहतर नजर आती।
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पिछले तीन वर्षों में शहर की रैंकिंग::
वर्ष 2018: 369
वर्ष 2019: 373
वर्ष 2020: 334
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इस बार दो नई पहल
केंद्र सरकार ने इस बार दो नई पहल भी की है। इस बार वाटर प्लस यानी पानी की बचत के लिए क्या इंतजाम किए गए हैं यह भी ब्योरा देना होगा। संबंधित बिंदु पर केंद्रीय टीम सर्टिफिकेशन श्रेणी के तहत जांच करेगी। इसके लिए कुल 1800 अंक होंगे। इसमें गारबेज फ्री सिटी के लिए 1100 अंक और ओडीएफ प्लस या फिर ओडीएफ प्लस-प्लस या फिर वाटर प्लस श्रेणियों के लिए कुल 700 अंक होंगे। इन श्रेणियों में बेहतर कार्य करने वाले शहरों को ही बेहतर रैंक पाने में मदद मिलेगी। अव्वल रैंक पाने के लिए उच्च श्रेणी में आना जरूरी है। नई पहल के लिए नगर पालिका की कोई तैयारी अब तक नहीं है।
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साफ-सफाई की व्यवस्था बदहाल है। कई दिनों तक खुले में कचरा पड़ा रहता है। सफाई कर्मचारी इसे उठाते नहीं। शिकायत करने पर सुनवाई भी नहीं होती। जलनिकासी व्यवस्था का तो और बुरा हाल है। -गुड्डू मौर्य, वाजिदपुर।
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स्वच्छता सर्वेक्षण कब से चल रहा है और कब तक चलेगा इसकी कोई जानकारी नहीं है। वैसे इस शहर में सफाई व्यवस्था का बुरा हाल है। सिर्फ मुख्य सड़कों पर ही झाड़ू लगता है। मोहल्लों में सफाई कर्मचारी झांकने नहीं आते। -गोलू गुप्ता, वाजिदपुर।

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स्वच्छता सर्वेक्षण में शहर को अव्वल लाने के लिए लगातार प्रयास चल रहा है। सफाई व्यवस्था में काफी सुधार हुआ है। डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन की व्यवस्था शीघ्र अमल में लाई जाएगी। कूड़ा निस्तारण संयत्र को चालू कराने के लिए पत्राचार किया जा रहा है। पूरी उम्मीद है कि इस बार शहर की रैंकिंग में बेहतर सुधार होगा। -संतोष मिश्रा, ईओ, नगर पालिका।
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