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Jaunpur News: ट्राॅमा सेंटर नाम का, रोज रेफर होते हैं इमरजेंसी के 20 मरीज
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ट्रामा सेंटर हौज। संवाद
जफराबाद। सड़क दुर्घटनाओं में घायलों के साथ आम मरीजों को इलाज की सुविधा मुहैया कराने के लिए स्थापित हौज ट्राॅमा सेंटर जफराबाद सफेद हाथी साबित हो रहा है। एक्स-रे की सुविधा नहीं है। सर्जन और हड्डी के डॉक्टर नहीं है। अल्ट्रासाउंड मशीन तो है लेकिन टेक्नीशियन नहीं होने की वजह इसका लाभ नहीं मिल पाता। यहां रोज इमरजेंसी के 25 से 30 मरीज आते हैं। इनमें से 20 को जिला अस्पताल रेफर कर दिया जाता है।
जौनपुर-वाराणसी राष्ट्रीय राज्यमार्ग पर हौज गांव स्थित ट्राॅमा सेंटर की स्थापना के बाद क्षेत्रीय लोगों को उम्मीद थी कि बेहतर इलाज की सुविधा मिलने लगेगी। सड़क हादसों में घायल लोगों का बेहतर उपचार किया जा सकेगा। लेकिन स्वास्थ्य विभाग ट्राॅमा सेंटर का बोर्ड लगाकर अस्पताल में सुविधाएं मुहैया कराना भूल गया। अस्पताल में आने वाले मरीजों का प्राथमिक उपचार करने के बाद जिला अस्पताल रेफर कर दिया जाता है। यहां सर्दी, जुकाम बुखार की दवा देकर मरीजों को घर भेज दिया जाता है। रविवार को तीन आउटसोर्सिंग कर्मचारियों के भरोसे ट्राॅमा सेंटर चलता है। सुविधा नहीं होने के कारण एक्सीडेंटल मरीजों को मरहम पट्टी कर जिला अस्पताल रेफर कर दिया जाता है।
सर्जन की नहीं है तैनाती
ट्राॅमा सेंटर में सर्जन की तैनाती नहीं है। कमरे के दरवाजे पर नेम प्लेट लगा है, कमरे में जांच मशीन है लेकिन टेक्नीशियन की नियुक्ति नहीं होने के कारण इसका लाभ नहीं मिल रहा है। आउटसोर्सिंग कर्मचारी रतन मौर्य ने बताया गया कि पहले एक्सरे मशीन थी। बाद में उसे भी जिला अस्पताल मंगा लिया गया। मशीन वापस नहीं आई। ऑपरेशन थियेटर शो पीस बन चुका है। कभी कभार किसी मरीज के भर्ती होने पर डॉक्टरों को अपने केबिन में ही रात गुजारनी पड़ती है। डॉक्टर के लिए आवास भी नहीं बना है।
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सीटी स्कैन के लिए यहां आते हैं लोग
क्रस्ना डायग्नोस्टिक लिमिटेड जौनपुर के द्वारा सीटी स्कैन की सुविधा दी गई है। सीटी स्कैन कराने के लिए लोग यहां आते हैं। हड्डी के डाॅक्टर की तैनाती भी नहीं है। लाखों रुपये की लागत से लगाई गई अल्ट्रासाउंड मशीन ऑपरेटर नहीं होने के कारण धूल फांक रही है। एक कबाड़ जनरेटर पड़ा है। बिजली जाने पर प्रकाश की वैकल्पिक व्यवस्था नहीं है। शौचालय तो लेकिन दरवाजे टूटे पड़े हैं।
चार बेड का है अस्पताल, होती है ओपीडी
ट्राॅमा सेंटर के नाम पर केवल चार बेड का अस्पताल बना है। पांच डॉक्टरों की तैनाती है। केवल ओपीडी होती है। सर्जन की तैनाती नहीं होने के कारण इमरजेंसी में घायलों का उपचार करने के बजाय मरहम पट्टी कर जिला अस्पताल रेफर कर दिया जाता है।
ट्राॅमा सेंटर में होनी चाहिए ये सुविधाएं
एक सुसज्जित ट्राॅमा सेंटर में गंभीर मरीजों के चोट का इलाज करने के लिए 24 घंटे विशेषज्ञ सर्जन, न्यूरोसर्जन, ऑर्थोपेडिक की टीम, आधुनिक डायग्नोस्टिक उपकरण जरूरी है। इसके अलावा सीटी स्कैन, एक्स-रे, 24 घंटे ब्लड बैंक की सुविधा, आईसीयू, ऑपरेशन थियेटर और आपातकालीन चिकित्सा सहायता के लिए एंबंलेंस व हेलिपैड की सुविधा जरूरी है। ताकि मरीज की जान गोल्डन ऑवर में बचाई जा सके।
नहीं हैं डाक्टर और जांच की सुविधाएं
ट्राॅमा सेंटर में विशेषज्ञ सर्जन, न्यूरोसर्जन, ऑर्थोपेडिक की टीम नहीं है। एक्स-रे, 24 घंटे ब्लड बैंक की सुविधा, आईसीयू, ऑपरेशन थियेटर की सुविधाएं नहीं है।
मनोज कुमार (38) निवासी शिवपुर जौनपुर सड़क हादसे में घायल होकर 8 फरवरी को आए थे। उनका कहना है कि प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें बेहतर इलाज के लिए जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया।
रंजीत चौहान (45) निवासी कुतुलपुर जफराबाद पांच फरवरी को घायल होकर ट्राॅमा सेंटर आए थे। उनका कहना है कि मरहम पट्टी करने के बाद उन्हें जिला चिकित्सालय भेज दिया गया।
अन्नू सिंह ( 24) निवासी कोइरी गुतवन जौनपुर के 14 जनवरी को घायल होने पर परिवार के लोग इलाज के लिए लेकर आए थे लेकिन परिवार वालों का कहना है कि प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें जिला अस्पताल भेज दिया गया।
ट्राॅमा सेंटर के लिए कोई बजट नहीं आता है। अल्ट्रासाउंड मशीन तो है, लेकिन टेक्नीशियन नहीं होने की वजह से मरीजों को यह सुविधा नहीं मिल पाती है। एक्सरे मशीन नहीं है। सामान्य बीमारी वाले मरीजों का इलाज किया जाता है शेष मरीजों को जिला अस्पताल रेफर कर दिया जाता है। -डॉ. देवेंद्र सिंह, चिकित्साधिकारी।
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जौनपुर-वाराणसी राष्ट्रीय राज्यमार्ग पर हौज गांव स्थित ट्राॅमा सेंटर की स्थापना के बाद क्षेत्रीय लोगों को उम्मीद थी कि बेहतर इलाज की सुविधा मिलने लगेगी। सड़क हादसों में घायल लोगों का बेहतर उपचार किया जा सकेगा। लेकिन स्वास्थ्य विभाग ट्राॅमा सेंटर का बोर्ड लगाकर अस्पताल में सुविधाएं मुहैया कराना भूल गया। अस्पताल में आने वाले मरीजों का प्राथमिक उपचार करने के बाद जिला अस्पताल रेफर कर दिया जाता है। यहां सर्दी, जुकाम बुखार की दवा देकर मरीजों को घर भेज दिया जाता है। रविवार को तीन आउटसोर्सिंग कर्मचारियों के भरोसे ट्राॅमा सेंटर चलता है। सुविधा नहीं होने के कारण एक्सीडेंटल मरीजों को मरहम पट्टी कर जिला अस्पताल रेफर कर दिया जाता है।
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सर्जन की नहीं है तैनाती
ट्राॅमा सेंटर में सर्जन की तैनाती नहीं है। कमरे के दरवाजे पर नेम प्लेट लगा है, कमरे में जांच मशीन है लेकिन टेक्नीशियन की नियुक्ति नहीं होने के कारण इसका लाभ नहीं मिल रहा है। आउटसोर्सिंग कर्मचारी रतन मौर्य ने बताया गया कि पहले एक्सरे मशीन थी। बाद में उसे भी जिला अस्पताल मंगा लिया गया। मशीन वापस नहीं आई। ऑपरेशन थियेटर शो पीस बन चुका है। कभी कभार किसी मरीज के भर्ती होने पर डॉक्टरों को अपने केबिन में ही रात गुजारनी पड़ती है। डॉक्टर के लिए आवास भी नहीं बना है।
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सीटी स्कैन के लिए यहां आते हैं लोग
क्रस्ना डायग्नोस्टिक लिमिटेड जौनपुर के द्वारा सीटी स्कैन की सुविधा दी गई है। सीटी स्कैन कराने के लिए लोग यहां आते हैं। हड्डी के डाॅक्टर की तैनाती भी नहीं है। लाखों रुपये की लागत से लगाई गई अल्ट्रासाउंड मशीन ऑपरेटर नहीं होने के कारण धूल फांक रही है। एक कबाड़ जनरेटर पड़ा है। बिजली जाने पर प्रकाश की वैकल्पिक व्यवस्था नहीं है। शौचालय तो लेकिन दरवाजे टूटे पड़े हैं।
चार बेड का है अस्पताल, होती है ओपीडी
ट्राॅमा सेंटर के नाम पर केवल चार बेड का अस्पताल बना है। पांच डॉक्टरों की तैनाती है। केवल ओपीडी होती है। सर्जन की तैनाती नहीं होने के कारण इमरजेंसी में घायलों का उपचार करने के बजाय मरहम पट्टी कर जिला अस्पताल रेफर कर दिया जाता है।
ट्राॅमा सेंटर में होनी चाहिए ये सुविधाएं
एक सुसज्जित ट्राॅमा सेंटर में गंभीर मरीजों के चोट का इलाज करने के लिए 24 घंटे विशेषज्ञ सर्जन, न्यूरोसर्जन, ऑर्थोपेडिक की टीम, आधुनिक डायग्नोस्टिक उपकरण जरूरी है। इसके अलावा सीटी स्कैन, एक्स-रे, 24 घंटे ब्लड बैंक की सुविधा, आईसीयू, ऑपरेशन थियेटर और आपातकालीन चिकित्सा सहायता के लिए एंबंलेंस व हेलिपैड की सुविधा जरूरी है। ताकि मरीज की जान गोल्डन ऑवर में बचाई जा सके।
नहीं हैं डाक्टर और जांच की सुविधाएं
ट्राॅमा सेंटर में विशेषज्ञ सर्जन, न्यूरोसर्जन, ऑर्थोपेडिक की टीम नहीं है। एक्स-रे, 24 घंटे ब्लड बैंक की सुविधा, आईसीयू, ऑपरेशन थियेटर की सुविधाएं नहीं है।
मनोज कुमार (38) निवासी शिवपुर जौनपुर सड़क हादसे में घायल होकर 8 फरवरी को आए थे। उनका कहना है कि प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें बेहतर इलाज के लिए जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया।
रंजीत चौहान (45) निवासी कुतुलपुर जफराबाद पांच फरवरी को घायल होकर ट्राॅमा सेंटर आए थे। उनका कहना है कि मरहम पट्टी करने के बाद उन्हें जिला चिकित्सालय भेज दिया गया।
अन्नू सिंह ( 24) निवासी कोइरी गुतवन जौनपुर के 14 जनवरी को घायल होने पर परिवार के लोग इलाज के लिए लेकर आए थे लेकिन परिवार वालों का कहना है कि प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें जिला अस्पताल भेज दिया गया।
ट्राॅमा सेंटर के लिए कोई बजट नहीं आता है। अल्ट्रासाउंड मशीन तो है, लेकिन टेक्नीशियन नहीं होने की वजह से मरीजों को यह सुविधा नहीं मिल पाती है। एक्सरे मशीन नहीं है। सामान्य बीमारी वाले मरीजों का इलाज किया जाता है शेष मरीजों को जिला अस्पताल रेफर कर दिया जाता है। -डॉ. देवेंद्र सिंह, चिकित्साधिकारी।