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मध्याह्न भोजन करने से इनकार
ब्यूरो, अमर उजाला, जौनपुर
Updated Fri, 05 Aug 2016 02:25 AM IST
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स्थानीय विकास खंड के प्राथमिक विद्यालय सुकर्णा कला में गुरुवार को बच्चों ने एमडीएम का भोजन करने से इनकार कर दिया। मंगलवार को दाल में छिपकली गिरने की वजह से खाना खाने के बाद कई बच्चे बीमार पड़ गए थे। इससे भयभीत बच्चों ने विद्यालय में खाना खाने से इनकार कर दिया।
दोपहर में विद्यालय पहुंचे कुछ बच्चों के अभिभावकों ने भी विरोध करते हुए मामले की जांच की मांग की। मालूम हो कि मंगलवार को प्राथमिक विद्यालय सुईथाकलां में मिड डे मिल के दाल में छिपकली पायी गयी थी।
भोजन करते ही कक्षा पांचवीं के आंशू, अभिषेक, बबली, नीरज, और कक्षा दो को छात्र धीरज समेत कई बच्चों को उल्टियां होने लगी थीं। बच्चों का इलाज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर कराया गया था। विद्यालय में तैनात रसोइयों का आरोप है कि पिछले दो महीने से ग्राम प्रधान उन्हें हटाने की धमकी दे रहे थे।
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खाना में छिपकली मिलने के पीछे भी कोई साजिश हो सकती है। इसकी जांच होनी चाहिए। विद्यालय पहुंचे अभिभावकों ने कहा कि नियम है कि प्रधानाध्यापक भोजन चखेंगे। उसके बाद बच्चों को खिलाया जाएगा।
आखिर उन्होंने भोजन क्यों नहीं चखा। इस पूरे मामले की जांच होने और संबंधित के खिलाफ कार्रवाई होने के पहले उनके बच्चे विद्यालय में खाना नहीं खाएंगे। इस संबंध में खंड शिक्षा अधिकारी शिवशंकर मिश्रा का कहना है कि मामला संज्ञान में आया है।
बेहद गंभीर मामला है। जांच कराकर संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। ग्राम प्रधान बचई राम का कहना है कि भोजन की जिम्मेदारी प्रधानाध्यापक की है। वह इलाहाबाद रहते हैं और कभी आते नहीं हैं। रसोइयों का आरोप गलत है।
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दोपहर में विद्यालय पहुंचे कुछ बच्चों के अभिभावकों ने भी विरोध करते हुए मामले की जांच की मांग की। मालूम हो कि मंगलवार को प्राथमिक विद्यालय सुईथाकलां में मिड डे मिल के दाल में छिपकली पायी गयी थी।
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भोजन करते ही कक्षा पांचवीं के आंशू, अभिषेक, बबली, नीरज, और कक्षा दो को छात्र धीरज समेत कई बच्चों को उल्टियां होने लगी थीं। बच्चों का इलाज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर कराया गया था। विद्यालय में तैनात रसोइयों का आरोप है कि पिछले दो महीने से ग्राम प्रधान उन्हें हटाने की धमकी दे रहे थे।
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खाना में छिपकली मिलने के पीछे भी कोई साजिश हो सकती है। इसकी जांच होनी चाहिए। विद्यालय पहुंचे अभिभावकों ने कहा कि नियम है कि प्रधानाध्यापक भोजन चखेंगे। उसके बाद बच्चों को खिलाया जाएगा।
आखिर उन्होंने भोजन क्यों नहीं चखा। इस पूरे मामले की जांच होने और संबंधित के खिलाफ कार्रवाई होने के पहले उनके बच्चे विद्यालय में खाना नहीं खाएंगे। इस संबंध में खंड शिक्षा अधिकारी शिवशंकर मिश्रा का कहना है कि मामला संज्ञान में आया है।
बेहद गंभीर मामला है। जांच कराकर संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। ग्राम प्रधान बचई राम का कहना है कि भोजन की जिम्मेदारी प्रधानाध्यापक की है। वह इलाहाबाद रहते हैं और कभी आते नहीं हैं। रसोइयों का आरोप गलत है।