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फर्जी प्रमाण पत्रों के सहारे 12 साल तक की नौकरी
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फर्जी प्रमाण पत्रों के सहारे परिषदीय विद्यालय में शिक्षक बनी साधना चतुर्वेदी 12 साल तक नौकरी करती रही और इस दौरान उन्होंने वेतन के तौर पर 60 लाख से अधिक रुपये लिए। अब उसके खिलाफ एफ आई आर दर्ज कराकर वेतन की रिकवरी की तैयारी की जा रही है।
लाइनबाजार थाना क्षेत्र के भारतीय नगर गोपालगंज निवासी विनोद चतुर्वेदी की पुत्री साधना चतुर्वेदी की नियुक्ति प्राथमिक विद्यालय में एक फरवरी 2009 को हुई थी। पहली तैनाती खुटहन ब्लाक में हुई बाद में सोंधी विकास खंड में अस्थाई ट्रांसफर कराकर काफी दिनों तक वहीं से वेतन भी लेती रहीं। आम तौर शिक्षकों की नियुक्ति के बाद वेतन जारी करने से पहले शैक्षिक प्रमाण पत्रों का सत्यापन होता है लेकिन हाईस्कूल से लेकर स्नातक तक के शैक्षिक प्रमाण पत्रों में खामी होने के बाद भी उस दौरान साधना चतुर्वेदी को वेतन जारी कर दिया गया। बीएसए कार्यालय के सूत्रों की माने तो साधना चतुर्वेदी के पिता विनोद मिश्रा इसी कार्यालय में वरिष्ठ लिपिक के पद पर तैनात रहे। जिसके चलते फर्जी अभिलेखों के बाद भी वेतन जारी करने में कोई अड़चन नहीं आ सकी। वर्ष 2020 में हुई शिकायत के बाद हुई जांच में साधना की स्नातक की डिग्री भी फर्जी पाई गई है। उन्होंने दो पैन कार्ड बनवाया और दोनों पर जन्मतिथि भी अलग अलग दर्ज है। लेखाधिकारी नंदराम कुरील का कहना है कि नियुक्ति के बाद से साधना चतुर्वेदी अलग अलग कई ब्लाकों में नौकरी की हैं। अलग अलग वेतन मान रहा इस नाते उन्होंने अभीतक कितना वेतन लिया है इसका लेखा जोखा संबंधित ब्लाकों से तैयार कराया जा रहा है। बीएसए प्रवीण कुमार तिवारी का कहना है कि फर्जी शैक्षिक प्रमाण पत्रों के सहारे नौकरी करने वाली प्रधानाध्यापिका का की सेवा समाप्ति के बाद एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश बीईओ सिरकोनी को दिए गए हैं।
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लाइनबाजार थाना क्षेत्र के भारतीय नगर गोपालगंज निवासी विनोद चतुर्वेदी की पुत्री साधना चतुर्वेदी की नियुक्ति प्राथमिक विद्यालय में एक फरवरी 2009 को हुई थी। पहली तैनाती खुटहन ब्लाक में हुई बाद में सोंधी विकास खंड में अस्थाई ट्रांसफर कराकर काफी दिनों तक वहीं से वेतन भी लेती रहीं। आम तौर शिक्षकों की नियुक्ति के बाद वेतन जारी करने से पहले शैक्षिक प्रमाण पत्रों का सत्यापन होता है लेकिन हाईस्कूल से लेकर स्नातक तक के शैक्षिक प्रमाण पत्रों में खामी होने के बाद भी उस दौरान साधना चतुर्वेदी को वेतन जारी कर दिया गया। बीएसए कार्यालय के सूत्रों की माने तो साधना चतुर्वेदी के पिता विनोद मिश्रा इसी कार्यालय में वरिष्ठ लिपिक के पद पर तैनात रहे। जिसके चलते फर्जी अभिलेखों के बाद भी वेतन जारी करने में कोई अड़चन नहीं आ सकी। वर्ष 2020 में हुई शिकायत के बाद हुई जांच में साधना की स्नातक की डिग्री भी फर्जी पाई गई है। उन्होंने दो पैन कार्ड बनवाया और दोनों पर जन्मतिथि भी अलग अलग दर्ज है। लेखाधिकारी नंदराम कुरील का कहना है कि नियुक्ति के बाद से साधना चतुर्वेदी अलग अलग कई ब्लाकों में नौकरी की हैं। अलग अलग वेतन मान रहा इस नाते उन्होंने अभीतक कितना वेतन लिया है इसका लेखा जोखा संबंधित ब्लाकों से तैयार कराया जा रहा है। बीएसए प्रवीण कुमार तिवारी का कहना है कि फर्जी शैक्षिक प्रमाण पत्रों के सहारे नौकरी करने वाली प्रधानाध्यापिका का की सेवा समाप्ति के बाद एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश बीईओ सिरकोनी को दिए गए हैं।
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