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जौनपुर: बाढ़ से निपटने की मुकम्मल है तैयारी, प्रशासन सर्तक
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जौनपुर। बारिश शुरू होते ही नदियों का जल स्तर बढ़ने लगा है, जिससे निपटने के लिए मुकम्मल तैयारी हो गई है। वहीं इसको लेकर प्रशासन भी पूरी तरह सर्तकता बरत रहा है। इस दौरान बाढ़ आने पर लोगों को राहत पहुंचाने और उसकी विभीषिका से बचाने के लिए तहसीलवार गोताखोरों, नाविकों व बाढ़ चौकी आदि बना दी गई है।
जिले से होकर गोमती, सई, पीली, बसुई व वरूणा नदियां गुजरी हैं, जो विभिन्न इलाकों से होते हुए अन्य जनपदों से गुजर रही हैं। बारिश के दिनों में इन नदियों का जलस्तर बढ़ जाता है, जिससे नदी के समीप निचले गांवों में बाढ़ का खतरा मंडराने लगता है। अगर बाढ़ आई तो तकरीबन 6326 हेक्टेयर क्षेत्रफल का भाग प्रभावित होगा। वर्ष 1980 में आई बाढ़ में करीब इतना ही क्षेत्रफल प्रभावित हुआ था, जिसे आज भी लक्ष्य बनाकर बाढ़ से निपटने की तैयारी प्रशासन ने किया है। बाढ़ आने पर सबसे पहले केराकत, चंदवक और बदलापुर क्षेत्र में खतरा मंडराने लगता है। इन क्षेत्रों के तकरीबन 144 गांव ऐसे हैं, जो बाढ़ से प्रभावित होते हैं। कारण यह गांव नदियों के किनारे व आस-पास बसे हैं। बाढ़ आने पर सबसे पहले चंदवक, बंबावन, हरिहरपुर, भैंसा, बरहपुर, बलरामपुर, घुड़दौर, पोखरा, केवटली, तुरकौली, देवरहा, सराय पड़री, फत्तुपुर व मोलनापुर आदि गांव ज्यादा प्रभावित होते हैं। हालांकि इस बार जिला प्रशासन ने इन गांवों में बाढ़ से निबटने के लिए 47 गोताखोर व 127 नाविकों को तैनात किया है। वहीं 88 स्थानों पर बाढ़ चौकी बनाया है, ताकि बाढ़ आने पर प्रभावित इलाकों के लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया जा सके।
खतरे के निशान से 28 मीटर नीचे है गोमती का जल स्तर
जौनपुर। बारिश होने के बाद भी बृहस्पतिवार को गोमती नदी का जल स्तर खतरे के निशान से 28 मीटर नीचे हैं। इस समय छह मीटर पर गोमती का जल स्तर है, जबकि खतरे का निशान 34 मीटर पर है।
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खुल गया है कंट्रोल रूम
जौनपुर। बाढ़ से निपटने के लिए जिला मुख्यालय पर कलेक्ट्रेट में कंट्रोल रूम खुल गया है, जिसका नंबर 05452- 260666 है। इस नंबर पर बाढ़ आने पर प्रभावित लोगों की सहायता करने का कार्य किया जाएगा।
बाढ़ से निबटने की मुकम्मल व्यवस्था कर ली गई है। गोताखोरों व नाविकों को तैनात करने के साथ ही बाढ़ चौकी बना दिया गया है। कंट्रोल रूम भी खोल दिया गया है, ताकि बाढ़ आने पर लोगों के जान माल की सुरक्षा की जा सके। - राम प्रकाश, अपर जिलाधिकारी(वित्त व राजस्व)
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जिले से होकर गोमती, सई, पीली, बसुई व वरूणा नदियां गुजरी हैं, जो विभिन्न इलाकों से होते हुए अन्य जनपदों से गुजर रही हैं। बारिश के दिनों में इन नदियों का जलस्तर बढ़ जाता है, जिससे नदी के समीप निचले गांवों में बाढ़ का खतरा मंडराने लगता है। अगर बाढ़ आई तो तकरीबन 6326 हेक्टेयर क्षेत्रफल का भाग प्रभावित होगा। वर्ष 1980 में आई बाढ़ में करीब इतना ही क्षेत्रफल प्रभावित हुआ था, जिसे आज भी लक्ष्य बनाकर बाढ़ से निपटने की तैयारी प्रशासन ने किया है। बाढ़ आने पर सबसे पहले केराकत, चंदवक और बदलापुर क्षेत्र में खतरा मंडराने लगता है। इन क्षेत्रों के तकरीबन 144 गांव ऐसे हैं, जो बाढ़ से प्रभावित होते हैं। कारण यह गांव नदियों के किनारे व आस-पास बसे हैं। बाढ़ आने पर सबसे पहले चंदवक, बंबावन, हरिहरपुर, भैंसा, बरहपुर, बलरामपुर, घुड़दौर, पोखरा, केवटली, तुरकौली, देवरहा, सराय पड़री, फत्तुपुर व मोलनापुर आदि गांव ज्यादा प्रभावित होते हैं। हालांकि इस बार जिला प्रशासन ने इन गांवों में बाढ़ से निबटने के लिए 47 गोताखोर व 127 नाविकों को तैनात किया है। वहीं 88 स्थानों पर बाढ़ चौकी बनाया है, ताकि बाढ़ आने पर प्रभावित इलाकों के लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया जा सके।
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खतरे के निशान से 28 मीटर नीचे है गोमती का जल स्तर
जौनपुर। बारिश होने के बाद भी बृहस्पतिवार को गोमती नदी का जल स्तर खतरे के निशान से 28 मीटर नीचे हैं। इस समय छह मीटर पर गोमती का जल स्तर है, जबकि खतरे का निशान 34 मीटर पर है।
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खुल गया है कंट्रोल रूम
जौनपुर। बाढ़ से निपटने के लिए जिला मुख्यालय पर कलेक्ट्रेट में कंट्रोल रूम खुल गया है, जिसका नंबर 05452- 260666 है। इस नंबर पर बाढ़ आने पर प्रभावित लोगों की सहायता करने का कार्य किया जाएगा।
बाढ़ से निबटने की मुकम्मल व्यवस्था कर ली गई है। गोताखोरों व नाविकों को तैनात करने के साथ ही बाढ़ चौकी बना दिया गया है। कंट्रोल रूम भी खोल दिया गया है, ताकि बाढ़ आने पर लोगों के जान माल की सुरक्षा की जा सके। - राम प्रकाश, अपर जिलाधिकारी(वित्त व राजस्व)