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अपने बच्चे के प्रति उदासीनता ठीक नहीं, रखें नजर

Tue, 05 Jan 2021 12:35 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Tue, 05 Jan 2021 12:35 AM IST
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Indifference towards your child is not right, keep an eye
जौनपुर। मासूमों के प्रति अभिभावक की उदासीनता घातक हो सकती है। पिछले एक पखवाड़े में अभिभावकों की नजर हटने मात्र से तीन मासूमों की अलग-अलग स्थिति में जान चली गई। समाजशास्त्रियों का कहना है कि समाज की बदलती स्थितियों में आंख मूंदकर भरोसा करना ठीक नहीं है।
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शाहगंज में सात वर्षीय अभिषेक की अपहरण कर हत्या कर दी गई। अभिषेक को अगवा करने वाला उसको ट्यूशन पढ़ाने ही वाला था। पहचाने जाने के डर से उसने बालक की हत्या कर दी। परिवार वालों को जरा भी शक नहीं था कि रोज उनके घर आने वाला ही एक दिन परिवार के लिए शोक का कारण बन जाएगा। रामपुर में मोबाइल पर कार्टून देखने के दौरान कंचा निगलने से चार वर्षीय प्रेम यादव की जान चली गई तो खेतासराय में दूध पीकर सो रही तीन माह की बच्ची को बिल्ली ने नोच डाला। इस मामलों में भी अभिभावक के विश्वास ने ही धोखा दिया। उन्होंने सोचा ही नहीं था कि घर की चहारदीवारी में ऐसी घटनाएं हो सकती हैं। मनोविज्ञान और समाजशास्त्र के विशेषज्ञ भी मानते हैं कि संयुक्त परिवार में बच्चों पर घर के किसी न किसी सदस्य की निगाह हमेशा रहती थी। मगर एकल परिवार का चलन बढ़ने से बच्चों पर निगरानी कम हुई है। उनका कहना है कि किसी भी हाल में शुरुआत के 7-8 वर्ष तक बच्चों को एकदम से अकेला छोड़ना ठीक नहीं है।
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संयुक्त परिवार खत्म हो रहे हैं। एकल परिवारों में माता-पिता के पास व्यस्तता के कारण बच्चे पर पर्याप्त ध्यान नहीं दे रहे हैं। इसके चलते कई बार बच्चे गलत राह पर चलने लगते हैं और कई बार लोग उनको बहका देते हैं। वर्तमान परिप्रेक्ष्य में किताबी ज्ञान के साथ व्यावहारिक शिक्षा भी देना जरूरी है। संस्कृति और संस्कार से बच्चों को जोड़े रखने का प्रयास अभिभावकों को करना चाहिए। -डॉ. हरिओम त्रिपाठी, एसोसिएट प्रोफेसर, समाजशास्त्र, टीडी कॉलेज।
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छह से सात वर्ष तक की आरंभिक अवस्था के बच्चों में अच्छे या बुरे का बोध नहीं होता है। संयुक्त परिवारों में बच्चा बहुत कुछ सीखता था। माता-पिता के अलावा भी दादा-दादी, चाचा, बुआ से उसे तमाम तरह की व्यावहारिक सीख मिलती थी। बच्चों की निगरानी भी होती रहती थी। एकल परिवार में अभिभावकों को प्रयास करके बच्चों पर नजर रखनी पड़ेगी। बच्चे को अच्छा है और बुरा में फर्क करना सिखाना होगा। बच्चे में ऐसी सामान्य समझ विकसित नहीं होने पर उसे अकेले छोड़ना ठीक नहीं। -डॉ. अजय प्रताप सिंह, प्राध्यापक, मनोविज्ञान, पूविवि।
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