फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Jaunpur News ›   In the combination of Saturn and Mars, you will get the boon of the desired accomplishment from the mother.

शनि और मंगल की युति में मिलेगा मां से अभीष्ट सिद्धि का वरदान

Mon, 28 Mar 2022 12:00 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Mon, 28 Mar 2022 12:00 AM IST
विज्ञापन
In the combination of Saturn and Mars, you will get the boon of the desired accomplishment from the mother.
मछलीशहर। वासंतिक नवरात्र के दौरान शनि और मंगल की युति बन रही हैं। इस योग में की गई उपासना से मां अभीष्ट सिद्धि का वरदान देती है। दो अप्रैल शनिवार के दिन से नवरात्र आरंभ हो रहा है। शनिवार से वासंतिक नवरात्र प्रारंभ हो रहा है। इसी के साथ हिंदू नववर्ष भी शुरू हो जाएगा।
विज्ञापन

ज्योतिष एवं तंत्र आचार्य डा. शैलेश मोदनवाल के मुताबिक आठ अप्रैल को महानिशा पूजा, नौ को महाष्टमी व्रत और 10 अप्रैल को रामनवमी है। इस बार यह नवरात्र पूरे नौ दिन का है। न तो किसी तिथि की वृद्धि है और न ही क्षय। ज्योतिषीय दृष्टि से यह नवरात्र संतुलन और सौम्यता प्रदान करने वाला है। दो अप्रैल को सूर्योदय 5:50 बजे और प्रतिपदा तिथि दिन में 11:28 बजे तक है। रेवती नक्षत्र दिन में 11 बजे तक, इसके बाद अश्विनी नक्षत्र है। ऐंद्र योग सुबह 8:22 बजे तक, इसके बाद वैधृति योग है। इस दिन धाता नामक औदायिक योग भी है। ये सभी योग इस नवरात्र को अत्यधिक शुभ बना रहे हैं। कलश स्थापना मुहूर्त दो अप्रैल दिन प्रतिपदा तिथि दिन में 11:28 बजे तक है। इसलिए कलश स्थापना सूर्योदय से दिन में 11:28 बजे तक करना ज्यादा श्रेष्ठ है, वैसे पूरे दिन भर किसी भी समय कलश स्थापना कर सकते हैं।
विज्ञापन

चैत्र नवरात्रि में मकर राशि में शनि देव, मंगल के साथ रहेंगे, जो पराक्रम में वृद्धि करेंगे। इस बार के चैत्र नवरात्रि में रविपुष्य नक्षत्र के साथ सर्वार्थसिद्धि योग, रवि योग नवरात्रि को स्वयं सिद्ध बनाएंगे। शनिवार से नवरात्रि का प्रारंभ शनिदेव का स्वयं की राशि मकर में मंगल के साथ रहना निश्चित ही सिद्धिकारक है। इससे कार्य में सफलता, मनोकामना की पूर्ति, साधना में सिद्धि मिलेगी। चैत्र नवरात्रि के दौरान कुंभ राशि में गुरु, शुक्र के साथ रहेगा। मीन में सूर्य, बुध के साथ, मेष में चंद्रमा, वृषभ में राहु, वृश्चिक में केतु विराजमान रहेंगे।
विज्ञापन
विज्ञापन

इसलिए है वासंतिक नवरात्र का विशेष महत्व
मोदनवाल बताते हैं कि देवी के प्राकट्य और सृष्टि निर्माण की शुरुआत ब्रह्मपुराण के अनुसार नवरात्रि का धार्मिक महत्व इसलिए भी है कि नवरात्रि के पहले दिन आद्य शक्ति प्रकट हुई थी। देवी के कहने पर चैत्र शुक्ल पक्ष प्रतिपदा को सूर्योदय के समय ही ब्रह्माजी ने सृष्टि के निर्माण की शुरुआत की थी। इसीलिए चैत्र नवरात्रि को सृष्टि के निर्माण का उत्सव भी कहा जाता है। इसी तिथि से हिंदू नव वर्ष शुरू होता है। चैत्र नवरात्रि के तीसरे दिन भगवान विष्णु ने मत्स्य अवतार भी लिया था। इसके बाद, भगवान विष्णु का सातवां अवतार भगवान राम का है। वह भी चैत्र नवरात्रि में हुआ था। इसीलिए चैत्र नवरात्रि का ज्यादा बड़ा महत्व है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed