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पंचायत सचिवालय अधूरे तो कहीं सुविधाएं नहीं
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जौनपुर। ग्रामीणों को आय, जाति, निवास प्रमाण पत्र से लेकर खसरा-खतौनी निकालने जैसे कार्यों के लिए तहसीलों का चक्कर न लगाना पड़े। इसके लिए हर ग्राम पंचायत में मिनी सचिवालय तैयार किए जा रहे हैं। सचिवालय का कहीं काम अधूरा पड़ा तो कहीं सुविधाओं का अभाव है। जिससे ग्रामीणों को काफी परेशानी हो रही है।
पंचायत भवनों को आवश्यक सुविधाओं से सुसज्जित करने को लेकर शासन गंभीर है। ग्रामीणों को आय, जाति, निवास प्रमाण पत्र से लेकर खसरा-खतौनी निकालने जैसे कार्यों के लिए तहसीलों का चक्कर न लगाना पड़े, साथ ही उन्हें जन्म व मृत्यु का पंजीकरण कराने के लिए भी परेशान न होना पड़े, इसके लिए प्रत्येक गांव में पंचायत भवनों को डिजिटल कर यह सुविधा दिए जाने की योजना है। लेकिन यह योजना अभी ठंडे बस्ते में पड़ी दिख रही है। डोभी क्षेत्र के खलिया खास, ग्राम सभा में मिनी सचिवालय में ताला लटका रहता है। अभी तक चहारदीवारी का निर्माण भी नहीं कराया गया है। गांव निवासी राम प्रकाश पांडेय ने बताया है कि यदि सचिवालय में काम शुरू हो गया होता तो ब्लॉक मुख्यालय का चक्कर नहीं काटना पड़ता।
बदलापुर ब्लॉक में 95 ग्राम पंचायतों के सापेक्ष 47 ग्राम सचिवालय निर्माण हो चुका है। जिसमें 22 अभी निर्माणाधीन है। जो सचिवालय पूरी तरह से तैयार हो गए उनमें अभी कंप्यूटर आदि उपकरणों के अभाव में काम शुरू नहीं हो सका है। जबकि पंचायत सचिव तैनात किए गए हैं। इसी ब्लॉक में मदापुर विरपालपुर ग्रामपंचायत में करीब चार महीने से पंचायत भवन का कार्य रुका हुआ है। गांव निवासी अशोक कुमार ने बताया है कि पंचायत भवन नहीं तैयार होने से हम लोगों को जरूरी कार्यो के लिए आठ किलोमीटर दूर बदलापुर जाना पड़ता है।
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पंचायतों में कुल 56 मिनी सचिवालय तैयार हो गए हैं। जबकि 23 निर्माणाधीन हैं और 10 ग्राम पंचायतों में जगह नहीं मिलने से निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका है। विकास खंड रामपुर के सुरेरी थाना क्षेत्र में कुल 12 पंचायत भवन तैयार हो गए हैं जबकि 10 ग्राम पंचायतों में जगह नहीं मिलने से निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका है जहां पंचायत भवन तैयार हो गए वहां पंचायत सहायक की नियुक्ति भी की जा चुकी है। उसके बाद भी स्थिति यह है कि अभी तक ग्राम पंचायत में पंचायत भवन को डिजिटल नहीं किया जा सका है। कई जगह भवन निर्माण अधूरा हो तो कहीं बनने के बाद से ताला लटक रहा है। लाखों रुपये खर्च होने के बाद भी कोई लाभ नहीं मिल रहा है। ऐसे में ये सचिवालय ग्रामीणों की उम्मीदों पर खरे नहीं उतर पा रहे हैं। इस कारण लोगों को सरकारी कामकाज के लिए विकास खंड व तहसील कार्यालयों सहित अन्य विभागों में चक्कर काटने पर मजबूर होना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि ग्राम सचिवालय बनाने का क्या फायदा जब यहां सुविधाएं ही नहीं मिल पा रही।
मनरेगा का पैसा नहीं आने से कुछ पंचायत भवन का कार्य अधूरा है अब पैसा आ गया जल्द ही पंचायत भवन का निर्माण कराकर कामकाज शुरू करा दिया जाएगा। पंचायत सहायकों को सख्त हिदायत दिया गया है कि वह समय से पंचायत भवन में बैठकर ग्रामीणों की समस्या को दूर करें।
- संतोष कुमार, डीपीआरओ
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पंचायत भवनों को आवश्यक सुविधाओं से सुसज्जित करने को लेकर शासन गंभीर है। ग्रामीणों को आय, जाति, निवास प्रमाण पत्र से लेकर खसरा-खतौनी निकालने जैसे कार्यों के लिए तहसीलों का चक्कर न लगाना पड़े, साथ ही उन्हें जन्म व मृत्यु का पंजीकरण कराने के लिए भी परेशान न होना पड़े, इसके लिए प्रत्येक गांव में पंचायत भवनों को डिजिटल कर यह सुविधा दिए जाने की योजना है। लेकिन यह योजना अभी ठंडे बस्ते में पड़ी दिख रही है। डोभी क्षेत्र के खलिया खास, ग्राम सभा में मिनी सचिवालय में ताला लटका रहता है। अभी तक चहारदीवारी का निर्माण भी नहीं कराया गया है। गांव निवासी राम प्रकाश पांडेय ने बताया है कि यदि सचिवालय में काम शुरू हो गया होता तो ब्लॉक मुख्यालय का चक्कर नहीं काटना पड़ता।
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बदलापुर ब्लॉक में 95 ग्राम पंचायतों के सापेक्ष 47 ग्राम सचिवालय निर्माण हो चुका है। जिसमें 22 अभी निर्माणाधीन है। जो सचिवालय पूरी तरह से तैयार हो गए उनमें अभी कंप्यूटर आदि उपकरणों के अभाव में काम शुरू नहीं हो सका है। जबकि पंचायत सचिव तैनात किए गए हैं। इसी ब्लॉक में मदापुर विरपालपुर ग्रामपंचायत में करीब चार महीने से पंचायत भवन का कार्य रुका हुआ है। गांव निवासी अशोक कुमार ने बताया है कि पंचायत भवन नहीं तैयार होने से हम लोगों को जरूरी कार्यो के लिए आठ किलोमीटर दूर बदलापुर जाना पड़ता है।
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पंचायतों में कुल 56 मिनी सचिवालय तैयार हो गए हैं। जबकि 23 निर्माणाधीन हैं और 10 ग्राम पंचायतों में जगह नहीं मिलने से निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका है। विकास खंड रामपुर के सुरेरी थाना क्षेत्र में कुल 12 पंचायत भवन तैयार हो गए हैं जबकि 10 ग्राम पंचायतों में जगह नहीं मिलने से निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका है जहां पंचायत भवन तैयार हो गए वहां पंचायत सहायक की नियुक्ति भी की जा चुकी है। उसके बाद भी स्थिति यह है कि अभी तक ग्राम पंचायत में पंचायत भवन को डिजिटल नहीं किया जा सका है। कई जगह भवन निर्माण अधूरा हो तो कहीं बनने के बाद से ताला लटक रहा है। लाखों रुपये खर्च होने के बाद भी कोई लाभ नहीं मिल रहा है। ऐसे में ये सचिवालय ग्रामीणों की उम्मीदों पर खरे नहीं उतर पा रहे हैं। इस कारण लोगों को सरकारी कामकाज के लिए विकास खंड व तहसील कार्यालयों सहित अन्य विभागों में चक्कर काटने पर मजबूर होना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि ग्राम सचिवालय बनाने का क्या फायदा जब यहां सुविधाएं ही नहीं मिल पा रही।
मनरेगा का पैसा नहीं आने से कुछ पंचायत भवन का कार्य अधूरा है अब पैसा आ गया जल्द ही पंचायत भवन का निर्माण कराकर कामकाज शुरू करा दिया जाएगा। पंचायत सहायकों को सख्त हिदायत दिया गया है कि वह समय से पंचायत भवन में बैठकर ग्रामीणों की समस्या को दूर करें।
- संतोष कुमार, डीपीआरओ