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नियमित कर्मी घोषित करें
जौनपुर ब्यूराे
Updated Thu, 11 Feb 2016 01:00 AM IST
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नियमित कर्मचारी घोषित करने समेत 12 सूत्री मांगों को लेकर मिड डे मील योजना के तहत परिषदीय विद्यालयों में तैनात रसोइयों ने बुधवार को नगर में रैली निकाल कर कलेक्ट्रेट में प्रदर्शन किया।
कलेक्ट्रेट में सभा कर रसोइयों न आवाज बुलंद की। टीडी कालेज से निकली रैली में बड़ी संख्या में शामिल रसोइयों ने हाथ में बेलन, चिमटा, छिलनी आदि ले रखा था। अपनी मांग से संबंधित पत्रक जिलाधिकारी को सौंपा।
राष्ट्रीय मध्यान्ह् भोजन रसोइया फ्रंट के राष्ट्रीय अध्यक्ष जुल्फेकार अली की अगुवाई में निकली रैली में शामिल रसोइयां एक हजार में दम नहीं, छह हजार से कम नहीं का नारा लगाते चल रहे थे।
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कलेक्ट्रेट में आयोजित धरना सभा में वक्ताओं ने कहा कि उनसे फुल टाइम ड्यूटी ली जाती है और 27 रुपये की दर से दैनिक मजूरी दी जा रही है। वह भी प्रति वर्ष नवीनीकरण के नाम पर भी उनका शोषण किया जाता है।
जुल्फेकार अली ने कहा कि मौजूदा समय में रसोइयों की हालत बधुआ मजदूर से भी बदतर है। प्रदेश संयोजक रमेश चंद्रा ने कहा कि काम के बदले उचित मजदूरी का भुगतान करना सरकार की बाध्यता होनी चाहिए।
रसोइयों का मानदेय छह हजार से कम नहीं होना चाहिए। एमडीएम से ठेकेदारी प्रथा हटाकर रसोइयों के चयन की जिम्मेदारी जिला बेसिक शिक्षाधिकारी को मिलनी चाहिए।
यह जिम्मेदारी पंचायतों को दिए जाने से उनका शोषण किया जा रहा है। इस मौके पर रामसजीवन केवट, मंडल प्रभारी लालमती, सेवालाल, विनोद, कुमार, संतोष मिश्रा आदि मौजूद ने भी संबोधित किया।
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कलेक्ट्रेट में सभा कर रसोइयों न आवाज बुलंद की। टीडी कालेज से निकली रैली में बड़ी संख्या में शामिल रसोइयों ने हाथ में बेलन, चिमटा, छिलनी आदि ले रखा था। अपनी मांग से संबंधित पत्रक जिलाधिकारी को सौंपा।
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राष्ट्रीय मध्यान्ह् भोजन रसोइया फ्रंट के राष्ट्रीय अध्यक्ष जुल्फेकार अली की अगुवाई में निकली रैली में शामिल रसोइयां एक हजार में दम नहीं, छह हजार से कम नहीं का नारा लगाते चल रहे थे।
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कलेक्ट्रेट में आयोजित धरना सभा में वक्ताओं ने कहा कि उनसे फुल टाइम ड्यूटी ली जाती है और 27 रुपये की दर से दैनिक मजूरी दी जा रही है। वह भी प्रति वर्ष नवीनीकरण के नाम पर भी उनका शोषण किया जाता है।
जुल्फेकार अली ने कहा कि मौजूदा समय में रसोइयों की हालत बधुआ मजदूर से भी बदतर है। प्रदेश संयोजक रमेश चंद्रा ने कहा कि काम के बदले उचित मजदूरी का भुगतान करना सरकार की बाध्यता होनी चाहिए।
रसोइयों का मानदेय छह हजार से कम नहीं होना चाहिए। एमडीएम से ठेकेदारी प्रथा हटाकर रसोइयों के चयन की जिम्मेदारी जिला बेसिक शिक्षाधिकारी को मिलनी चाहिए।
यह जिम्मेदारी पंचायतों को दिए जाने से उनका शोषण किया जा रहा है। इस मौके पर रामसजीवन केवट, मंडल प्रभारी लालमती, सेवालाल, विनोद, कुमार, संतोष मिश्रा आदि मौजूद ने भी संबोधित किया।