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चौथ नजदीक है मेरे फौजी पिया, जीतकर के लड़ाई चले आइए
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मुंगराबादशाहपुर। सार्वजनिक इंटर कॉलेज परिसर में सोमवार को विजय बहादुर सिंह, भूपेंद्र सिंह, विनोद कुमार सिंह की पुण्य स्मृति में अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। इसमें कलाकारों ने एक से बढ़ एक कविता का गायन कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
प्रीति पांडेय ने मधुबन पुकारे चले आइए, वो मेरा अंजन पुकारे चले आइए, चौथ नजदीक है मेरे फौजी पिया, जीतकर के लड़ाई चले आइए कविताओं का गायन किया। बाराबंकी से आए कवि रामकिशोर तिवारी ने दिलो में अरमान लेकर भाई बैठे है... करके हिसाब पाई पाई बैठे है...वसीयत करने वाले है आज बाबू जी दौलत की... घर में पहली बार आज इकट्ठे सारे भाई बैठे है। झांसी से आए कवि पंकज अभिराज ने लक्ष्य तक ले जाएगी तुमको सो कर देखना... गिर गए तो क्या हुआ खड़े तुम फिर से होकर देखना... जल तुम्हारे घर का पावन गंगाजल बन जाएगा.. मां जब थक जाए तो इसके पांव धोकर देखना। अमन अक्षत इंदौरी ने राज पाठ त्याग, पूण्य काम की तलाश में... तीर्थ खुद भटक रहे थे, धाम की तलाश में... न तो दाम न तो काम की तलाश में, राम वन गए थे राम की तलाश में। कवयित्री मीनू शर्मा राजस्थान ने राधा किशन से सीखा मैंने प्यार दोस्तों, श्री राम से मर्यादा संस्कार दोस्तों, मस्तक की खूबसूरती चंदन है दोस्तों, करने लगा है पूजा मेरा परिवार दोस्तों। छत्तीसगढ़ से पधारे मनोज चौहान ने वतन की आन जिंदा है.... वतन की शान जिंदा है... मिटा दूं दुश्मनों को दिल में ये अरमान जिंदा है... उन्नाव से आए नर कंकाल और बिहारीलाल अंबर इलाहाबादी हास्य रस कवियों ने श्रोताओं को हंसाते-हंसाते सराबोर कर दिया। गाजियाबाद के मुस्कान शर्मा, बाराबंकी के राम किशोर तिवारी, झांसी के पंकज अभिराज आदि कवियों ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत कर समा बांध दिया। कवि सम्मेलन का संचालन राम किशोर तिवारी ने किया।
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प्रीति पांडेय ने मधुबन पुकारे चले आइए, वो मेरा अंजन पुकारे चले आइए, चौथ नजदीक है मेरे फौजी पिया, जीतकर के लड़ाई चले आइए कविताओं का गायन किया। बाराबंकी से आए कवि रामकिशोर तिवारी ने दिलो में अरमान लेकर भाई बैठे है... करके हिसाब पाई पाई बैठे है...वसीयत करने वाले है आज बाबू जी दौलत की... घर में पहली बार आज इकट्ठे सारे भाई बैठे है। झांसी से आए कवि पंकज अभिराज ने लक्ष्य तक ले जाएगी तुमको सो कर देखना... गिर गए तो क्या हुआ खड़े तुम फिर से होकर देखना... जल तुम्हारे घर का पावन गंगाजल बन जाएगा.. मां जब थक जाए तो इसके पांव धोकर देखना। अमन अक्षत इंदौरी ने राज पाठ त्याग, पूण्य काम की तलाश में... तीर्थ खुद भटक रहे थे, धाम की तलाश में... न तो दाम न तो काम की तलाश में, राम वन गए थे राम की तलाश में। कवयित्री मीनू शर्मा राजस्थान ने राधा किशन से सीखा मैंने प्यार दोस्तों, श्री राम से मर्यादा संस्कार दोस्तों, मस्तक की खूबसूरती चंदन है दोस्तों, करने लगा है पूजा मेरा परिवार दोस्तों। छत्तीसगढ़ से पधारे मनोज चौहान ने वतन की आन जिंदा है.... वतन की शान जिंदा है... मिटा दूं दुश्मनों को दिल में ये अरमान जिंदा है... उन्नाव से आए नर कंकाल और बिहारीलाल अंबर इलाहाबादी हास्य रस कवियों ने श्रोताओं को हंसाते-हंसाते सराबोर कर दिया। गाजियाबाद के मुस्कान शर्मा, बाराबंकी के राम किशोर तिवारी, झांसी के पंकज अभिराज आदि कवियों ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत कर समा बांध दिया। कवि सम्मेलन का संचालन राम किशोर तिवारी ने किया।
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