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परिवादी को कोरोना रक्षक पॉलिसी की धनराशि न देने पर बीमा कंपनी समेत तीन पर वाद दर्ज
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जौनपुर। कोरोना महामारी के दौरान कोरोना संक्रमित को कोरोना रक्षक पॉलिसी के तहत एक लाख रुपए बीमा कंपनी ने अदा नहीं किया। परिवादी के प्रार्थना पत्र पर उपभोक्ता फोरम अध्यक्ष विनोद कुमार सिंह ने परिवाद दर्ज करके द ओरियंटल इंश्योरेंस कंपनी के मंडलीय प्रबंधक समेत तीन लोगों के खिलाफ नोटिस जारी किया है। साथ ही अगली सुनवाई 2 फरवरी तय की है।
परिवादी अखिलेश कुमार सिंह निवासी ग्राम पतरही, थाना चंदवक ने द ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी के मंडलीय प्रबंधक समेत तीन के खिलाफ परिवाद दायर किया है। बीमा कंपनी के अधिकृत अभिकर्ता अनुभव के पालिसी के विषय में बताने पर परिवादी ने कोरोना रक्षक पालिसी के तहत अपना एक लाख रुपए की पॉलिसी 1376 रुपए प्रीमियम अदा किया, जो 21 जुलाई 2020 से 1 मई 2021 तक प्रभावी था। 12 मार्च 2021 को परिवादी सर्दी, जुकाम बुखार से पीडि़त हुआ। आरटीपीसीआर की जांच में सेंपल रिजेक्ट हो गया। लेकिन स्वास्थ्य में सुधार न होने पर परिवादी ने 18 अप्रैल को एंटीजन टेस्ट सीएचसी बक्शा में कराया। रिपोर्ट पॉजिटिव आई। स्वास्थ्य खराब होने के कारण 19 अप्रैल 2021 को परिवादी प्रशासन द्वारा कोविड-19 के इलाज के लिए अधिकृत निजी नर्सिगिं होम में भर्ती हुआ। 24 अप्रैल तक परिवादी का इलाज चला। डिस्चार्ज होने के बाद जांच और मेडिकल के सभी प्रपत्र बीमा कंपनी को भेजकर परिवादी ने क्लेम की मांग की। जुलाई में सर्वेयर नियुक्त हुआ। सर्वेयर को भी संपूर्ण प्रपत्र उपलब्ध करा दिया गया। सर्वेयर ने रिपोर्ट भी भेजी लेकिन बीमा कंपनी द्वारा बार-बार संपर्क के बावजूद परिवादी को भुगतान नहीं किया। परिवादी ने 7 अक्तूबर 2021 को कंपनी को नोटिस भी अपने अधिवक्ता हिमांशु श्रीवास्तव के माध्यम से सही नाम और पते पर भेज दिया गया लेकिन उसका कोई उत्तर बीमा कंपनी ने नहीं दिया। परिवादी ने एक लाख रुपए बीमा धन 18 प्रतिशत ब्याज के साथ और मानसिक उत्पीड़न व आर्थिक क्षेत्र के लिए 50 हजार क्षतिपूर्ति की मांग की।
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परिवादी अखिलेश कुमार सिंह निवासी ग्राम पतरही, थाना चंदवक ने द ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी के मंडलीय प्रबंधक समेत तीन के खिलाफ परिवाद दायर किया है। बीमा कंपनी के अधिकृत अभिकर्ता अनुभव के पालिसी के विषय में बताने पर परिवादी ने कोरोना रक्षक पालिसी के तहत अपना एक लाख रुपए की पॉलिसी 1376 रुपए प्रीमियम अदा किया, जो 21 जुलाई 2020 से 1 मई 2021 तक प्रभावी था। 12 मार्च 2021 को परिवादी सर्दी, जुकाम बुखार से पीडि़त हुआ। आरटीपीसीआर की जांच में सेंपल रिजेक्ट हो गया। लेकिन स्वास्थ्य में सुधार न होने पर परिवादी ने 18 अप्रैल को एंटीजन टेस्ट सीएचसी बक्शा में कराया। रिपोर्ट पॉजिटिव आई। स्वास्थ्य खराब होने के कारण 19 अप्रैल 2021 को परिवादी प्रशासन द्वारा कोविड-19 के इलाज के लिए अधिकृत निजी नर्सिगिं होम में भर्ती हुआ। 24 अप्रैल तक परिवादी का इलाज चला। डिस्चार्ज होने के बाद जांच और मेडिकल के सभी प्रपत्र बीमा कंपनी को भेजकर परिवादी ने क्लेम की मांग की। जुलाई में सर्वेयर नियुक्त हुआ। सर्वेयर को भी संपूर्ण प्रपत्र उपलब्ध करा दिया गया। सर्वेयर ने रिपोर्ट भी भेजी लेकिन बीमा कंपनी द्वारा बार-बार संपर्क के बावजूद परिवादी को भुगतान नहीं किया। परिवादी ने 7 अक्तूबर 2021 को कंपनी को नोटिस भी अपने अधिवक्ता हिमांशु श्रीवास्तव के माध्यम से सही नाम और पते पर भेज दिया गया लेकिन उसका कोई उत्तर बीमा कंपनी ने नहीं दिया। परिवादी ने एक लाख रुपए बीमा धन 18 प्रतिशत ब्याज के साथ और मानसिक उत्पीड़न व आर्थिक क्षेत्र के लिए 50 हजार क्षतिपूर्ति की मांग की।
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