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कब्रगाह बन सकती हैं जर्जर इमारतें 

Thu, 26 May 2016 07:04 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला, जौनपुर
ब्यूरो, अमर उजाला, जौनपुर Updated Thu, 26 May 2016 07:04 PM IST
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Buildings can become shabby cemetery
ओलंदगंज नखास मोहल्ले में स्थित जर्जर हवेली।
शहर की पुरानी और जर्जर इमारतें कभी भी कब्रगाह में तब्दील हो सकती हैं। करीब तीन दर्जन से अधिक इमारतें जर्जर हालत में हैं। उनके छज्जे आए दिन रह रहकर गिरते रहते हैं। इसकी वजह से पिछले सालों एक रिक्शा चालक की मौत हो चुकी है।
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जबकि हाल ही में मखदूमशाह अढ़न मोहल्ले में मकान धराशायी होने से परिवार के कई सदस्य घायल हो गए थे। इसमें कई लोगों को इलाज के लिए भर्ती भी कराया गया था। 

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शहर में ओलंदगंज स्थित राजा सिंगरामऊ की कोठी समेत सब्जी मंडी, उर्दू बाजार, रुहट्टा, नईगंज, किला रोड, सिपाह, पुरानी बाजार समेत कई अन्य मोहल्लों में भी जर्जर इमारतें कभी भी धराशाई हो सकती हैं।

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खास तौर से बारिश के दिनों में यहां खतरे की संभावना और भी बढ़ जाती है। मानसून करीब है फिर भी नगरपालिका प्रशासन के पास ऐसे जर्जर भवनों का कोेई लेखाजोखा नहीं है। पूर्व में हुए हादसों से भी प्रशासन कोई सबक नहीं लेना चाहता।


 

जर्जर और जीर्णशीर्ण हो चुके अधिकतर भवनों के स्वामी उसकी मरम्मत इसलिए भी नहीं करा पा रहे हैं कि भवन विवादित है और उसका मुकदमा कोर्ट में लंबित है। मानसून आने से पहले अगर प्रशासन जीर्णशीर्ण मकानों की सुधि ले तो संभावित हादसे को टाला जा सकता है। 

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